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Saturday, 17 January, 2026
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सोमनाथ मंदिर शाश्चत सनातन का प्रतीक, सृजन करने वालों की ताकत विध्वंसकों से कहीं अधिक : शाह

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(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि गुजरात का सोमनाथ मंदिर गत एक हजार साल में 16 आक्रमणों के बावजूद शाश्वत ‘सनातन धर्म’ के प्रतीक के रूप में शान से खड़ा है और दिखाता है कि सृजन करने वालों की शक्ति विनाश करने वालों से कहीं अधिक है।

शाह ने यहां यमुना नदी के किनारे स्थित विशाल बांसेरा पार्क में तीसरे अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया और लोगों को, विशेषकर किसानों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

शाह ने कहा कि मकर संक्रांति को विभिन्न क्षेत्रों में लोहड़ी, बिहू, पोंगल और खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है जो मूल रूप से किसानों का त्योहार है और सूर्य देवता की जीवनदायी शक्ति का प्रतीक है।

शाह ने पतंग महोत्सव पर कहा कि यह देश के लोगों को दिल्ली से जोड़ेगा और उन्होंने दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से इसे देश और दुनिया के अग्रणी आयोजनों में से एक बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस आयोजन को और अधिक समग्र बनाने के लिए एक समिति का गठन किया जाए।

अधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उपस्थित थे।

महमूद गजनवी द्वारा 1026 में सोमनाथ मंदिर पर किये गए पहले हमले को लेकर हाल में संपन्न हुए सोमनाथ ‘स्वाभिमान पर्व’ का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुजरात के इस मंदिर को 1000 वर्षों में 16 बार लूटा गया, लेकिन आज भी यह भव्य रूप में खड़ा है, जो इस बात का प्रमाण है कि निर्माण करने वालों की शक्ति विध्वंस करने वालों से कहीं अधिक है।

शाह ने कहा कि सोमनाथ मंदिर सनातन धर्म की ‘शाश्वतता’ के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की ‘अमरता’ का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश ने 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया और आने वाला वर्ष पूरे देश में ‘सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष’ के तौर पर मनाया जाएगा।

शाह ने कहा कि आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल, जामनगर के महाराजा, कन्हैयालाल मुंशी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं ने सोमनाथ मंदिर को एक भव्य और शानदार संरचना के रूप में पुनर्निर्मित करने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अब उसी स्थान पर एक भव्य सोमनाथ मंदिर खड़ा है, जिसका धर्मध्वज नभ को छू रहा है।’’

शाह ने कहा,‘‘जिन्होंने इसे ध्वस्त किया फिर चाहे महमूद गजनवी हो, महमूद बेगड़ा, अलाउद्दीन खिलजी हो, वे आज विश्व मानचित्र पर कहीं नजर नहीं आते, जबकि सोमनाथ मंदिर उसी स्थान पर गौरव और गरिमा के साथ पूरी दुनिया के सामने खड़ा है।’’

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ और ‘सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष’ सभी भारतीयों को अपनी संस्कृति को अटूट, दृढ़ और अमर बनाने के अपने संकल्प को एक बार फिर से दोहराने का अवसर प्रदान करते हैं।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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