गुवाहाटी, 26 अगस्त (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि हाल में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान बेदखल किए गए लोगों का एक वर्ग कई एकड़ वन भूमि पर रह रहा था, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हो गई थी।
कोकराझार में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा कि बेदखल किए गए कुछ लोगों के कब्जे वाली जमीन का आकार देखकर उनका सिर चकरा गया।
उन्होंने पूछा, “उनमें से कुछ ने व्यक्तिगत रूप से 200 से 300 बीघा (8 से 9 एकड़) जमीन पर कब्जा कर लिया था। इससे कोई नाराज क्यों नहीं होगा?”
उन्होंने कहा, “उरियमघाट की स्थिति ने मुझे वहां एक फार्महाउस में रहने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।”
शर्मा ने कहा कि यदि गरीब लोग छोटे भूखंडों पर बसे होते तो लोगों में गुस्सा नहीं होता, लेकिन जंगल के इतने बड़े हिस्से पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार ने जून में वन भूमि, ग्राम आरक्षित चरागाह, व्यावसायिक स्तर पर पशुपालन करने वालों के लिये आरक्षित चरागाह, तथा सत्रों (मठ एवं पारंपरिक प्रदर्शन कला केंद्र) और नामघरों (प्रार्थनास्थल) की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए बेदखली अभियान शुरू किया था।
बेदखली अभियान से विस्थापित होने वाले अधिकांश लोग बांग्ला भाषी मुस्लिम समुदाय के हैं, जिन्हें अपमानजनक रूप से ‘मिया’ कहा जाता है, जिनका कहना है कि उनके पूर्वज ब्रह्मपुत्र के कटाव के कारण ‘कछार’ या नदी क्षेत्रों में भूमि खोने के बाद इन क्षेत्रों में बस गए थे।
शर्मा ने कहा कि बेदखली अभियान लोगों को सही और गलत के बीच का अंतर समझा रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं ‘मियां’ लोगों के साथ सहानुभूति रखने के खिलाफ नहीं हूं। मैंने उन तक विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है, लेकिन लोगों को सही दिशा दिखाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्हें यह समझना होगा कि वन भूमि, ग्राम आरक्षित चरागाह, व्यावसायिक स्तर पर पशुपालन करने वालों के लिये आरक्षित चरागाह पर अतिक्रमण नहीं किया जा सकता।”
शर्मा ने कहा कि उन्हें वहीं रहना चाहिए जहां वे मूल रूप से रहते थे और ऊपरी असम या राज्य के उत्तरी भागों में नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “असम के लिए खतरा पिछले कुछ वर्षों में हुए जनसांख्यिकीय परिवर्तन से है और यह मतदाता सूची में बदलाव से स्पष्ट है।”
उन्होंने कहा कि “समस्या” का समाधान “हमारे द्वारा उठाए गए कदमों” से होगा।
उन्होंने कहा, “1971 से पहले यहां आए सभी स्थायी निवासियों के प्रति हमारी कोई दुश्मनी नहीं है और हमने अदालत में हलफनामा दिया है कि जो लोग पहले यहां आए थे वे भारतीय हैं।”
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प्रशांत वैभव
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