जयपुर, 19 जनवरी (भषा) देश के मौजूदा हालात में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर काफी विचारोत्तेजक बहस हुई और मुद्दे के पक्ष एवं विपक्ष में भाग लेने वाले वक्ताओं ने मत भिन्नता के बावजूद यहां माना कि तमाम तरह के खतरों के बावजूद चुप्पी की स्थिति सबसे अधिक खतरनाक है।
उन्नीसवें जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) के अंतिम दिन विभिन्न वक्ताओं ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है’ विषय के पक्ष और विपक्ष में अपने- अपने तर्क पेश किए।
मुद्दे के पक्ष में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के प्रवक्ता आशीष गवांडे, भारत में जन्मे ब्रिटिश इतिहासकार, प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और ‘व्हाट इज फ्री स्पीच’ किताब के लेखक फारा डाभोइवाला, पूर्व राज्यसभा सदस्य और पूर्व नौकरशाह पवन के वर्मा तथा शिवसेना (उबाठा) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने विचार पुरजोर तरीके से रखे।
विषय के विरुद्ध अपने विचार रखने वालों में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कविता को एक विषय के तौर पर पढ़ाने वाली ऐलिस आस्वल्ड, ब्रिटिश पत्रकार, व्यंग्यकार और जानी मानी टेलीविजन हस्ती इयान डेविड हिस्लोप, अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत नवतेज सरना तथा आस्ट्रेलिया में भारत के पूर्व उच्चायुक्त नवदीप सूरी ने अपने विचार रखे।
आशीष गवांडे ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है’ के पक्ष में बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि यदि यह आजादी केवल कुछ लोगों को हासिल है तो यह एक खतरनाक विचार है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ लोगों के हाथों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होने से युवा नेता उमर खालिद जैसे लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है।
लेखक और पूर्व नौकरशाह पवन वर्मा ने कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस पर बहस करते हुए संदर्भ को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने छात्र नेता उमर खालिद का नाम लिए बिना कहा, ‘‘क्या आप बिना जमानत के जेल में रहना चाहेंगे।’’
उन्होंने मीडिया के संदर्भ में कहा कि सच्चाई को सामने रखने वाले वक्ताओं को टीवी पर होने वाली बहसों में एंकर ही दूसरे पक्ष के साथ मिलकर दरकिनार कर देते हैं। वर्मा ने कहा, ‘‘इसीलिए मैं कहता हूं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक खतरनाक विचार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यकीन रखता हूं, यह एक अच्छा विचार है लेकिन यह तेजी से खतरनाक होता जा रहा है, फिर चाहे अमेरिका हो, यहां या कहीं और।’’
शिवसेना (उबाठा) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं के लिए तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अधिक खतरनाक विचार है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर स्वतंत्र रूप से अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए ट्रोल किए जाने का उदाहरण दिया और कहा कि महिलाओं के लिए अपने अधिकार मांगते ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरनाक बन जाती है।
चतुर्वेदी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक अच्छा लेकिन खतरनाक विचार है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि महिलाओं को किसी भी डर के बिना अपनी आवाज उठाना जारी रखना चाहिए।
ऐलिस आस्वल्ड ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भले ही कितना ही खतरनाक विचार हो लेकिन चुप्पी उस खतरे से कहीं अधिक खतरनाक है।
अधिकतर वक्ताओं ने कहा कि पिछले एक दशक में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता घटी है।
इसके साथ ही पांच दिवसीय 19वां जयपुर साहित्योत्सव गीत-संगीत के बीच संपन्न हो गया।
भाषा नरेश नरेश नेत्रपाल
नेत्रपाल
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