बेंगलुरु, आठ जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केरल सरकार द्वारा कन्नड़ माध्यम के स्कूलों में भी मलयालम को अनिवार्य प्राथमिक भाषा बनाने संबंधी विधेयक का बृहस्पतिवार को विरोध किया और पड़ोसी राज्य से अपने ‘‘दबावपूर्ण दृष्टिकोण’’ को वापस लेने तथा देश की संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारत की एकता हर भाषा का सम्मान करने और प्रत्येक नागरिक को अपनी मातृभाषा में सीखने के अधिकार का सम्मान करने पर आधारित है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो कर्नाटक संविधान द्वारा प्रदत्त सभी अधिकारों का उपयोग करते हुए इसका विरोध करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
सिद्धरमैया ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘प्रस्तावित मलयालम भाषा विधेयक-2025, कन्नड़ माध्यम के स्कूलों में भी मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य करके, भाषाई स्वतंत्रता और केरल के सीमावर्ती जिलों, विशेष रूप से कासरगोड की वास्तविकता पर सीधा प्रहार करता है।’’
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