नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) जेल में बंद शरजील इमाम के वकील ने बृहस्पतिवार को यहां एक अदालत में कहा कि उमर खालिद ने 2020 के दिल्ली दंगों से पहले कभी भी उनके मुवक्किल का मार्गदर्शन नहीं किया था और अभियोजन पक्ष का यह आरोप कि इमाम खालिद का शिष्य था, ‘बेतुका’ है।
इमाम के वकील ने ये दलीलें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी के समक्ष पेश कीं जो 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उसके (इमाम के) खिलाफ आरोप पर सुनवाई कर रहे थे।
इमाम के वकीलों–अहमद इब्राहिम और तालिब मुस्तफा ने अदालत के समक्ष यह दलील दी कि उनके मुवक्किल और खालिद एक ही विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र थे, फिर भी उनके बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क नहीं था।
मुस्तफा ने अदालत में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री से आरोपों का कोई समर्थन नहीं मिलता। वास्तव में, आवेदक (इमाम) ने उमर खालिद से कभी बात नहीं की। यह बिल्कुल असंभव और अविश्वसनीय है कि अभियोजन पक्ष ने जिस इमाम को उमर खालिद से मार्गदर्शन मिलने का आरोप लगाया है, उसकी उससे कभी फोन पर न कोई बात हुई और न ही संदेशों का आदान प्रदान हुआ।’’
उन्होंने कहा कि दोनों को दो समूहों– ‘मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू (एमएसजे)’ और सीएबी टीम में, केवल इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वे एक ही विश्वविद्यालय के छात्र थे।
अभियोजन पक्ष के इस आरोप का जिक्र करते हुए कि इमाम ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ‘चक्का जाम’ कराने की आपराधिक साजिश रची, जो बाद में हिंसक दंगों में तब्दील हो गई, उसके वकील ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि इमाम का किसी भी समय हिंसा भड़काने का कोई इरादा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इमाम ने एमएसजे के अन्य सदस्यों के साथ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भाग लिया, जहां कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने और उन्हें सीएए के खिलाफ विरोध करने के लिए उकसाने वाले पर्चे बांटे गए थे।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
भाषा राजकुमार पवनेश
पवनेश
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