नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) और अन्य से केरल सरकार की उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें ‘न्यायिक शहर’ की स्थापना के उद्देश्य से कलमस्सेरी में एचएमटी की 27 एकड़ भूमि पर कब्जा लेने के लिए उसकी अनुमति मांगी गई है।
प्रस्तावित ‘न्यायिक शहर’ में केरल उच्च न्यायालय की न्यायिक शाखा और उससे संबंधित बुनियादी ढांचा होगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार की अर्जी पर एचएमटी और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
यह याचिका केरल उच्च न्यायालय के 2014 के उस फैसले से संबंधित काफी समय से लंबित दीवानी अपील में दायर की गई है, जो भूमि पर स्वामित्व और इसकी अधिकतम सीमा प्रतिबंधों से संबंधित है।
वर्ष 2016 में, शीर्ष अदालत ने एचएमटी द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया था और निर्देश दिया था कि भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए। वह अंतरिम आदेश अभी भी लागू है।
राज्य सरकार ने अब पीठ से यथास्थिति आदेश में संशोधन करने का आग्रह किया है, ताकि उसे एचएमटी की 27 एकड़ भूमि पर कब्जा करने की अनुमति मिल सके, बशर्ते कि वह 2014 की मूल मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार हिसाब लगाई गई मुआवजा राशि को केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के नाम पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा पावती (एफडीआर) के रूप में जमा कराए।
कलमस्सेरी में 900 एकड़ भूमि मूल रूप से 1960 के दशक में एक केंद्रीय क्षेत्र परियोजना के रूप में मशीन टूल फ़ैक्टरी स्थापित करने के लिए अधिग्रहित की गई थी।
समय के साथ, भूमि के कुछ हिस्से नौसेना आयुध डिपो और केरल राज्य विद्युत बोर्ड जैसी संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिए गए। हालांकि, एचएमटी द्वारा भूमि का एक बड़ा हिस्सा अप्रयुक्त रह गया।
केरल सरकार ने लगभग 400 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी, जिसके बाद लंबी मुक़दमेबाज़ी शुरू हुई और अंततः 2014 में उच्च न्यायालय का निर्णय आया।
उच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया था कि एचएमटी को आवंटित ज़मीन पर केरल भूमि सुधार अधिनियम के तहत कार्यवाही नहीं की जा सकती, क्योंकि यह मूल रूप से सरकारी ज़मीन थी और वैधानिक ‘कट-ऑफ़’ तारीख़ के बाद आवंटित की गई थी।
भाषा सुभाष रंजन
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