बरेली (उप्र), 22 जनवरी (भाषा) मैनपुरी के एक व्यक्ति को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने डकैती के एक मामले में बरी कर दिया है और उसे करीब 24 साल जेल में बिताने के बाद बरेली सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि मैनपुरी ज़िले के ज्योति कटरा गांव का रहने वाला 45 वर्ष का आज़ाद खान 2001 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद था।
जेल अधिकारियों ने बताया कि उच्च न्यायालय ने उसे 19 दिसंबर, 2025 को डकैती के मामले में बरी कर दिया था, लेकिन प्रक्रियात्मक दिक्कतों के कारण उसकी रिहाई में देरी हुई।
बरेली सेंट्रल जेल के जेलर नीरज कुमार ने बताया कि खान की रिहाई उसके भाई मस्तान खान द्वारा 20,000 रुपये का निजी मुचलकता जमा करने के बाद संभव हुई।
अधिकारियों ने बताया कि खान को बुधवार रात करीब 9 बजे रिहा किया गया और वह अपने भाई के साथ मैनपुरी ज़िले में अपने घर चला गया।
रिकॉर्ड के अनुसार, खान को 2001 के आसपास डकैती के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2002 में, मैनपुरी की एक विशेष अदालत ने उसे डकैती और गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया, उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई और 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया, साथ ही जुर्माना न देने पर दो साल की अतिरिक्त जेल की सज़ा भी सुनाई।
एक अलग मामले में, मैनपुरी अपर ज़िला और सत्र न्यायालय ने उसे शस्त्र अधिनियम के तहत और हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल जेल की सजा सुनाई थी, साथ ही 7,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, और जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त जेल की सज़ा भी सुनाई। खान ने बाद के मामलों में सज़ा पूरी कर ली थी।
उसे शुरू में फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया था और 2003 में बाकी सज़ा काटने के लिए बरेली सेंट्रल जेल में भेज दिया गया था।
खान की अपील पर सुनवाई करते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सबूतों की कमी और चश्मदीदों की गैरमौजूदगी का हवाला देते हुए उसे डकैती के मामले में बरी कर दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उसे मुचलका जमा करने पर रिहा कर दिया जाए। हालांकि, मैनपुरी की अदालत में औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण तुरंत रिहाई का आदेश जारी नहीं हो सका, जिससे यह मामला जेल अधिकारियों के संज्ञान में आया।
बाद में जेल अधिकारियों के बीच तालमेल और ईमेल से रिहाई वारंट मिलने के बाद, खान को रिहा कर दिया गया।
भाषा सं जफर मनीषा वैभव
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