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Saturday, 14 March, 2026
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अमीर राज्य, बढ़ता कर्ज़: कर्नाटक के विकास मॉडल की बड़ी चुनौती

कर्नाटक राष्ट्रीय विकास और FDI में अरबों का योगदान देता है, लेकिन उसके अपने वित्त में राजस्व घाटा, तेज़ी से बढ़ती ब्याज लागत और 11.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां दिखाई देती हैं.

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बेंगलुरु: 5वें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की कुल देनदारियां अगले चार वर्षों में 11.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है. इस रिपोर्ट में बढ़ते फंड संकट को कम करने और राजस्व बढ़ाने के लिए कई उपायों की सिफारिश की गई है.

इन उपायों में टैक्स सुधार, गैर-टैक्स राजस्व में वृद्धि, संपत्ति का मुद्रीकरण, योजनाओं का युक्तिकरण, गैर-योजना आधारित निश्चित खर्च (वेतन) में कमी, ऋण प्रबंधन, GST संग्रह में दक्षता में सुधार, मनोरंजन कर और कई अन्य पहलें शामिल हैं.

आयोग ने यह भी बताया कि बेंगलुरु के विकास के लिए पूंजी जुटाने हेतु पार्किंग नीति लागू करने, लंदन-मॉडल के आधार पर कंजेशन चार्ज लगाने, CSR फंड का उपयोग करने और संपत्ति कर के दायरे को बढ़ाने जैसे प्रस्ताव भी हैं.

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, “सार्वजनिक ऋण प्राप्तियां, जो राज्य द्वारा लिए गए उधार को दर्शाती हैं, लगातार बढ़ी हैं. ये 2022-23 में 44,549 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,16,000 करोड़ रुपये (बजट अनुमान, या BE) तक पहुंच गई हैं.”

मध्यम अवधि राजकोषीय योजना (MTFP) के अनुसार, कर्नाटक द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 में 1,32,000 करोड़ रुपये का उधार लेने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 6 मार्च को बजट पेश करने से एक दिन पहले कहा, “उधार लिए बिना कोई विकास संभव नहीं है.”

बजट पेश करते समय भी, सिद्धारमैया ने अपने 208 पृष्ठों के बजट में से लगभग सात पृष्ठों का उपयोग केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड में हो रही कमी पर जोर देने और इस प्रकार अधिक उधार लेने के कदम को सही ठहराने के लिए किया.

अपने बजट भाषण में, केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “जो गाय भरपूर दूध देती है, उसकी उचित देखभाल करना आवश्यक होता है.”

इसके बावजूद, कर्नाटक भारत के सबसे बड़े विकास इंजनों में से एक बना हुआ है. इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) (मौजूदा कीमतों पर) में 2023-24 के 25,67,340 करोड़ रुपये से बढ़कर 2029-30 तक 48,30,867 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

हालांकि, सरकार के वित्त से संबंधित कई रिपोर्टें यह दर्शाती हैं कि इस विकास का एक बड़ा हिस्सा अधिक उधार लेने पर ही निर्भर रहेगा. सिद्धारमैया, जिनके पास वित्त मंत्रालय का प्रभार भी है, अब ऐसे संसाधनों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें मौद्रिक रूप दिया जा सके. इससे बढ़ते हुए फंड संकट को कम करने और उधार लेने की ज़रूरत को घटाने में मदद मिलेगी.

कर्नाटक भारत के सबसे बड़े विकास इंजनों में से एक है. यह सेवा और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता है, और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के साथ-साथ उन वैश्विक निगमों से अन्य पूंजी का भी निरंतर प्रवाह आकर्षित करता है, जो इस दक्षिणी राज्य में अपना कारोबार स्थापित करना चाहते हैं.

लेकिन कांग्रेस सरकार की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि उसने ऐसे दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण के बजाय, जो रोज़गार पैदा कर सकें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकें, अपने प्रमुख गारंटी कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने को प्राथमिकता दी है.

Graphic: Shruti Naithani | ThePrint
ग्राफ़िक: श्रुति नैथानी | दिप्रिंट

राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी

कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इस दक्षिणी राज्य ने लगातार राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा विकास दर बनाए रखी है, फिर भी कर्नाटक को कल्याण, विकास और दूसरी गतिविधियों के लिए पूंजी जुटाने के लिए कर्ज़ पर निर्भर रहना पड़ा है.

सरकार ने फरवरी 2026 तक अब तक 1,21,598 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और 2026-27 के वित्त वर्ष के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है.

हालांकि सिद्धारमैया ज़्यादा कर्ज़ लेने के पक्ष में तर्क देते हैं, लेकिन कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ रहा है. इन कर्ज़ों पर ब्याज चुकाने के लिए ही खर्च 2023-24 में 30,826 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 36,122 करोड़ रुपये हो गया है.

MTFP के अनुसार, “2025-26 (BE) के लिए, ब्याज भुगतान का अनुमान 45,600 करोड़ रुपये है और 2026-27 (BE) में इसके और बढ़कर 53,332 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. यह पूंजी निवेश के वित्तपोषण और केंद्र से मिलने वाले हस्तांतरण से होने वाली राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए लिए गए ज़्यादा कर्ज़ के संचयी प्रभाव को दर्शाता है.”

इसका मतलब यह होगा कि 2029-30 में ब्याज भुगतान GSDP का 1.85 प्रतिशत होगा, जबकि 2024-25 में यह 1.26 प्रतिशत था.

इसमें आगे कहा गया है कि GSDP के प्रतिशत के रूप में कुल देनदारियां लगातार बढ़ रही हैं – 2024-25 (संशोधित अनुमान, या RE) में 23.94 प्रतिशत से बढ़कर चालू वर्ष में 24.91 प्रतिशत हो गई हैं. हालांकि कमीशन ने यह भी कहा कि देनदारियां राजकोषीय सीमा के भीतर ही रहेंगी, लेकिन 2029-30 में देनदारियों के 23.19 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है.

Graphic: Shruti Naithani | ThePrint
ग्राफ़िक: श्रुति नैथानी | दिप्रिंट

आबकारी और स्टांप शुल्क जैसे राज्य करों के कुछ स्रोतों को छोड़कर, कर्नाटक को ज़्यादातर कर्ज़ पर ही निर्भर रहना पड़ता है, और इसके परिणामस्वरूप उसका राजस्व और राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है. 2026-27 में अनुमानित राजस्व घाटा (जब राजस्व खर्च राजस्व प्राप्तियों से ज़्यादा होता है) 22,957 करोड़ रुपये है, और MTFP का सुझाव है कि राज्य 2029-30 तक ही सरप्लस की स्थिति में आ पाएगा.

लेकिन, राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ता रहेगा. राजकोषीय घाटा, जो गैर-ऋण प्राप्तियों के मुकाबले सरकार की कुल उधार ज़रूरतों को दिखाता है, 2024-25 में 85,030 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में अनुमानित 99,449 करोड़ रुपये हो गया है. MTFP के अनुसार, 2029-30 तक कर्नाटक का राजस्व घाटा 1,11,440 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है.

MTFP ने सुझाव दिया, “आगे चलकर, खर्च की दक्षता को मज़बूत करना, पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता और उत्पादकता को बढ़ाना, सब्सिडी जैसे निश्चित खर्चों को तर्कसंगत बनाना, और ऋण तथा आकस्मिक देनदारियों का समझदारी से प्रबंधन सुनिश्चित करना, राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने और राज्य के विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी होगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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