श्रीनगर: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के मारे जाने के विरोध में कश्मीर में हुए व्यापक प्रदर्शनों के मद्देनज़र लोगों की आवाजाही पर एहतियातन आंशिक प्रतिबंध बरकरार रहने के कारण कश्मीर में गुरुवार को लगातार पांचवें दिन भी जनजीवन प्रभावित रहा.
अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में खामेनेई के मारे जाने के विरोध में पूरे कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हुए जिसके कारण सोमवार को ये बैन लगाए गए.
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं के साथ बुधवार को बैठक की ताकि स्थिति को पुन: सामान्य किया जा सके.
बैठक के बाद अब्दुल्ला ने लोगों से ‘‘मस्जिदों, दरगाहों और इमामबाड़ों’’ में शोक और आक्रोश व्यक्त करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की.
सरकार ने शनिवार तक शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया है और मोबाइल इंटरनेट की गति कम कर दी है.
अधिकारियों ने कहा, ‘‘गुरुवार को कश्मीर के कई हिस्सों में लोगों की आवाजाही और उनके एकत्र होने पर प्रतिबंध जारी रहा.’’
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने को रोकने के लिए शहर भर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के जवानों को तैनात किया गया था.
अधिकारियों ने कहा कि शहर में महत्वपूर्ण चौराहों पर कंटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि ये कदम कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर लागू किए गए हैं.
शहर के बीचों-बीच स्थित लाल चौक का घंटा घर प्रतिबंधित क्षेत्र बना हुआ है. प्राधिकारियों ने रविवार देर रात चारों ओर अवरोधक लगाकर इस इलाके को सील कर दिया था.
खामेनेई के मारे जाने के विरोध में रविवार को घंटाघर में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद इस इलाके को सील किया गया था.
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
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