मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और बेहद बहुमुखी आवाज़ आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली.
डॉक्टर प्रतीत समदानी के मुताबिक, उनका निधन मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण हुआ. उन्हें एक दिन पहले अत्यधिक थकान और छाती में संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उनके बेटे आनंद भोसले ने भी निधन की पुष्टि करते हुए अंतिम संस्कार की जानकारी दी. पार्थिव शरीर को 13 अप्रैल को सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित उनके घर कासा ग्रांडे में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में किया जाएगा.
1933 में जन्मीं आशा भोसले ने बहुत कम उम्र में संगीत की शुरुआत की और 1950 के दशक में पहचान बनाई. आठ दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हजारों गाने रिकॉर्ड किए, जो कई भारतीय भाषाओं और शैलियों—क्लासिकल, ग़ज़ल, पॉप, कैबरे और फोक, में फैले हुए हैं.
“दिल चीज़ क्या है”, “पिया तू अब तो आजा”, “चुरा लिया है तुमने” और “मेरा कुछ सामान” जैसे उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और पद्म विभूषण जैसे सम्मान मिले, वहीं 2011 में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी थी.
उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि आशा भोसले भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाज़ों में से एक थीं और उनके गीत पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें “मेलोडी क्वीन” बताते हुए कहा कि उनका जाना संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.
दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि उनकी आवाज़ और कला ने कई पीढ़ियों को परिभाषित किया. वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे भारतीय संगीत के “स्वर्ण युग का अंत” बताया.
अरविंद केजरीवाल ने भी शोक जताते हुए कहा कि उनके गीत उन्हें हमेशा अमर बनाए रखेंगे.
मशहूर गायक शंकर महादेवन ने भावुक होकर कहा कि “यह भारतीय संगीत के लिए बहुत दुखद दिन है…आशा ताई हमेशा अपने संगीत के जरिए हमारे साथ रहेंगी.”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख जताया.
आठ दशकों तक भारतीय सिनेमा और संगीत की पहचान बनी आशा भोसले अपने पीछे एक ऐसा विरासत छोड़ गई हैं, जिसने संगीत की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया.
