मुंबई/नयी दिल्ली/गुवाहाटी, 27 जून (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुवाहाटी के होटल में ठहरे हुए नौ बागी मंत्रियों के विभाग सोमवार को छीन लिए जबकि बागी विधायक अपनी याचिका उच्चतम न्यायालय में लेकर पहुंचे जिसने विधानसभा उपाध्यक्ष द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही पर 11 जुलाई तक रोक लगा दी।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के खिलाफ शुरू हुई बगावत को एक हफ्ते हो रहा है। उनका 36 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा है। दोनों ही पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं और लंबी लड़ाई के लिये तैयार दिख रहे हैं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, शिंदे के नेतृत्व में गुवाहाटी में डेरा डाले बैठे बागी मंत्रियों के विभाग अन्य मंत्रियों को इसलिए दिए जा रहे हैं ताकि प्रशासन चलाने में आसानी हो।
शिवसेना में अब चार कैबिनेट मंत्री हैं जिनमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, अनिल परब और सुभाष देसाई शामिल हैं।
आदित्य को छोड़कर शेष तीन विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) हैं।
शिंदे के शहरी विकास और सार्वजनिक उपक्रम विभागों को शिवसेना के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई को दिया गया है।
उदय सामंत के पास उच्च शिक्षा विभाग था जिसे अब आदित्य ठाकरे को आवंटित किया गया है। वहीं गुलाब राव पाटिल से जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग लेकर अनिल परब को सौंपा गया है।
संदीपान भुमरे के रोज़मार गारंटी और बागबानी महकमे तथा दादा भूसे के कृषि एवं पूर्व सैनिक कल्याण विभाग शंकरराव गडाख को दिए गए हैं।
राज्य मंत्री शम्बुराज देसाई को आवंटित विभागों का जिम्मा संजय बनसोडे (गृह-ग्रामीण) और विश्वजीत कदम (वित्त, योजना एवं कौशल विकास) को सौंपा गया है।
वहीं राज्य मंत्री राजेंद्र पाटिल-यड्रावकर के विभागों को विश्वजीत कदम (लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), प्रजक्त तानपुरे (मेडिकल शिक्षा एवं कपड़ा), सतेज पाटिल (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) और अदिति तटकरे (सांस्कृतिक गतिविधियां) को सौंपे गए हैं।
अन्य राज्य मंत्री एवं प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता ओमप्रकाश कडू (बच्चू कडू) के महकमों को तटकरे (स्कूल शिक्षा), सतेज पाटिल (जल संसाधन), संजय बनसोडे (महिला एवं बाल विकास) और दत्तात्रेय भरणे (अन्य पिछड़ा वर्ग विकास) को आवंटित किए गए हैं।
इसके अलावा राज्य मंत्री अब्दुल सत्तार के विभागों को तानपुरे (राजस्व), सतेज पाटिल (ग्रामीण विकास) और तटकरे (बंदरगाह) को सौंपे गए हैं।
शिवसेना के अगुवाई वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में बगावत से पहले, पार्टी के 10 कैबिनेट मंत्री और चार राज्य मंत्री थे। चारों राज्यमंत्री विरोधी खेमे में शामिल हो गए हैं। एनसीपी और कांग्रेस एमवीए के अन्य प्रमुख घटक हैं।
वहीं, उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस के खिलाफ शिवसेना के बागी विधायकों को राहत प्रदान करते हुए कहा कि संबंधित विधायकों की अयोग्यता पर 11 जुलाई तक फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने हालांकि महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसमें विधानसभा में बहुमत परीक्षण नहीं कराए जाने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने कहा कि वे किसी भी अवैध कदम के खिलाफ उसका रुख कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को शिवसेना के 39 बागी विधायकों और उनके परिवार के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा करने का निर्देश भी दिया।
शिंदे ने न्यायालय द्वारा उन्हें और अन्य बागी शिवसेना विधायकों को मिली राहत को बाल ठाकरे के हिंदुत्व और अपने गुरु आनंद दिघे के आदर्शों की जीत बताया।
शिंदे ने ट्वीट किया, “यह हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब के हिंदुत्व और (दिवंगत) धर्मवीर आनंद दिघे के आदर्शों की जीत है।”
ठाणे में शिंदे के बेटे और पार्टी सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल ने दबाव में उनके पिता और 15 अन्य बागी विधायकों को अयोग्यता का नोटिस भेजा था, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश से स्पष्ट है।
कल्याण के सांसद ने कहा, “विधानसभा अध्यक्ष का विधानसभा में अधिकार है। अगर कोई विधायिका में व्हिप के खिलाफ जाता है तो उनके पास शक्ति होती है। यह किसी भी बैठक में नहीं आने वाले किसी व्यक्ति पर लागू नहीं होता है। ‘तुगलकी फरमान’ (अयोग्यता नोटिस) दबाव में (उनके द्वारा) जारी किया गया था और अदालत ने आज यह दिखाया है।”
उच्चतम न्यायालय के फैसले के कुछ घंटों बाद कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री ठाकरे से मुलाकात की और राजनीतिक स्थिति का जायजा लिया।
कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख नाना पटोले ने मुख्यमंत्री के आवास मातोश्री के बाहर संवाददाताओं से कहा, “हम गठबंधन के भागीदार हैं। हम एक साथ बैठकर चर्चा करेंगे।’’
कांग्रेस मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, राकांपा के दिलीप वलसे पाटिल और जयंत पाटिल ने भी ठाकरे से मुलाकात की।
महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने सोमवार को दावा किया कि बागी खेमे में शामिल हुए शिवसेना के 15 से 20 विधायक उनके संपर्क में हैं और पार्टी से उन्हें गुवाहाटी से मुंबई वापस लाने का आग्रह किया है।
मुंबई के बाहरी इलाके करजत में शिवसेना कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, एमवीए सरकार को बचाने की जद्दोजहद में जुटे ठाकरे ने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मौजूदा स्थिति को एक अवसर के रूप में देख रहा है, समस्या के रूप में नहीं।
बागी विधायकों का संदर्भ देते हुए ठाकरे ने कहा, “धूल छंट गई है। अब हम कुछ अच्छा कर सकते हैं।”
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि 21 जून के विद्रोह से पहले इस बात की चर्चा थी कि पार्टी में कुछ विकास होगा।
राजनीतिक खींचतान के बीच बागी विधायकों के खिलाफ शिवसेना के हमले की कमान संभाल रहे पार्टी सांसद संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई की एक ‘चॉल’ के पुन:विकास और उनकी पत्नी और मित्रों से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़ी धन शोधन की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए मंगलवार को तलब किया है।
शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता राउत ने इसे पार्टी के राजनीतिक विरोधियों से लड़ने से रोकने के लिए “साजिश” करार दिया।
राउत ने कहा, “भले ही आप मेरा सिर काट दें, मैं गुवाहाटी का मार्ग नहीं लूंगा।”
शिवसेना के बागी विधायक दीपक केसरकर ने पार्टी नेता संजय राउत को राकांपा का ‘लाडला’ करार दिया।
उन्होंने संजय राउत पर हमला बोलते हुए कहा कि 2019 में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार का गठन जब महज़ औपचारिकता थी तो वह एक “प्रभावशाली राकांपा नेता” के आशीर्वाद से “सक्रिय” हो गए और शिवसेना को खत्म करने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को संबोधित एक पत्र में, केसरकर ने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग विधायकों के कारण चुने जाते हैं, वह अब हर दिन उन्हें गाली दे रहे हैं।
महाराष्ट्र के शिवेसना के बागी विधायकों को केंद्र की ओर से ‘वाई प्लस’ सुरक्षा दिए जाने के बाद सोमवार को पार्टी ने दावा किया कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही यह सब ”तमाशा” कर रही है।
शिवेसना के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले पार्टी के बागी विधायकों पर आरोप लगाया गया है कि वे 50-50 करोड़ रुपये में ”बिक” गए हैं।
कोल्हापुर जिले में बागी मंत्री पाटिल-याद्रवकर के समर्थक और शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने हस्तक्षेप किया और झड़प से रोकने के लिए दोनों समूहों को एक-दूसरे से दूर रखने की कोशिश की।
इस बीच गुवाहाटी के होटल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई, जहां बागी विधायक डेरा डाले हुए हैं। वहां अधिवक्ता, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी अधिकारी प्रवेश करते नजर आए।
शिवसेना की मणिपुर इकाई के अध्यक्ष एम. टॉम्बी सिंह बागी विधायकों से मिलने होटल आए थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गयी। उन्होंने कहा कि वह उन्हें (बागी विधायकों को) यह समझाने आए थे कि पार्टी में विभाजन नहीं किया जाए।
सिंह ने दावा किया कि होटल आने से पहले “मुंबई में उनका कुछ लोगों से सम्पर्क’’ हुआ था।
भाषा
शोभना देवेंद्र
देवेंद्र
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