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Saturday, 15 June, 2024
होमदेशरामायण, बिग बॉस के दोबारा प्रसारण ने दर्शकों को बांधे रखा लेकिन लॉकडाउन में टीवी को एक दिन में हो रहा करोड़ों का नुकसान

रामायण, बिग बॉस के दोबारा प्रसारण ने दर्शकों को बांधे रखा लेकिन लॉकडाउन में टीवी को एक दिन में हो रहा करोड़ों का नुकसान

शीर्ष उद्योग के सूत्रों ने बताया कि, हर समय चैनल अधिकतम 10-12 दिनों की सामग्री तैयार रखते हैं. 'एपिसोड केवल उतने दिनों के लिए ही शूट किए जाते हैं. किसी ने भी ऐसी स्थिति की आशंका नहीं की थी'.

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नई दिल्ली: भारतीय सामान्य मनोरंजन चैनल (जीईसी) मीडिया उद्योग के सबसे आकर्षक क्षेत्रों में से एक माना जाता है. पर कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से खतरे में है. उनके पास अभी भी दर्शक हैं लेकिन उन्हें विज्ञापन नहीं मिल पा रहे हैं और पुनरुद्धार की संभावनाएं भी कमजोर नज़र आ रही हैं.

यहां तक कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा जैसे लोकप्रिय शो के दोबारा प्रसारण और रामायण जैसे पौराणिक क्लासिक्स की वापसी से दर्शकों को बांधे रखने के बावजूद एंटरटेनमेंट उद्योग को ताज़ा कार्यक्रमों की कमी के कारण एक दिन में करोड़ों का नुकसान हो रहा है.

लॉकडाउन की वजह से बॉलीवुड की तरह सभी टीवी सीरियल और रियलिटी शोज़ के शूट रोक दिए गए हैं.

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, लॉकडाउन समाप्त होने के बाद भी टीवी परिदृश्य के बहुत अलग दिखने की संभावना है. सोशल डिसटेंसिंग के कारण संभवतः कुछ समय के लिए रियलिटी शो शूट और स्थगित करने पड़ेंगे. यहां तक कि टीवी सीरियलों को भी कई प्रतिबंधों के बीच शूट करना होगा.

कुछ कार्यक्रम, जैसे सोनी पर प्रसारित होने वाला कपिल शर्मा शो, लौट सकते हैं. लेकिन उसमें भी लाइव दर्शक नहीं होंगे जो अपनी प्रतिक्रियाओं के साथ माहौल को और हास्यपूर्ण कर देते हैं.

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व्यापक प्रभाव

फिक्की-इवाय की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग जिसमें अखबार, रेडियो और सिनेमा शामिल हैं, की कीमत 1.82 ट्रिलियन रुपये है. 2018 से इसमें 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी.

खेल चैनलों के बाद मनोरंजन चैनल ही हैं जिनमें सबसे ज्यादा लाभ होता है. इनमें स्टार प्लस, स्टार भारत और स्टार ग्रुप शामिल हैं.

शीर्ष प्रसारणकर्ताओं के निकाय इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन ने कहा है कि कोरोनावायरस लॉकडाउन के परिणामस्वरूप मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लिए विज्ञापन बुकिंग में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट आई है.

कोविड-19 लॉकडाउन के 25 मार्च को शुरू होते ही लगभग सभी भारतीय जीईसी चलन से बाहर चले गए हैं और अपने लोकप्रिय कार्यक्रमों का दोबारा प्रसारण कर रहे हैं.


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कलर्स टीवी रियलिटी शो बिग बॉस को प्रसारित कर रहा है, वहीं सोनी सब के दर्शक 3,000 से अधिक एपिसोड वाली लोकप्रिय कॉमेडी श्रृंखला तारक मेहता का उल्टा चश्मा को देख रहे हैं.

इस बीच, दूरदर्शन ने रामायण (अंतिम एपिसोड 18 अप्रैल को प्रसारित किया गया था) जैसे पौराणिक कथाओं को वापस लाकर अपने 1991 के पूर्व वर्चस्व को पुनः प्राप्त किया है. गौरतलब है कि रामायण और महाभारत अपने दौर में शहर को कर्फ्यू जैसी स्थिति में ले आते थे क्योंकि अधिकांश लोग उन्हें देखने के लिए घरों में रहा करते थे.

ज़ी टीवी सिर्फ डांस इंडिया डांस जैसे रियलिटी शो के पुराने एपिसोड को वापस नहीं ला रहा है, बल्कि 1990 के दौर में लोकप्रिय रहे हम पांच और ज़ी हॉरर शो जैसे शोज़ को भी पिटारे से निकल लाया है. स्टार प्लस पर दीया और बाती का प्रसारण हो रहा है.

प्रतिष्ठित चेन्नई स्थित प्रोडक्शन हाउस गणेश पिक्चर्स के रवि कोटरकारा ने दिप्रिंट को बताया कि उत्पादकों के पास एपिसोड को दोहराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि लॉकडाउन से सब कुछ अचानक रुक गया.

शीर्ष उद्योग के सूत्रों ने बताया कि, हर समय चैनल अधिकतम 10-12 दिनों की सामग्री तैयार रखते हैं. ‘एपिसोड केवल उतने दिनों के लिए ही शूट किए जाते हैं. किसी ने भी ऐसी स्थिति की आशंका नहीं की थी’.

‘परिणामस्वरूप, फिल्मों को छोड़कर, किसी भी चैनल पर कोई ताजा सामग्री उपलब्ध नहीं है. हर कोई अपने शो के पुराने एपिसोड को दोहरा रहा है.

चैनलों को अपने राजस्व के मुख्य स्रोत विज्ञापनों से भी हाथ धोना पड़ा है.

मानदंडों के अनुसार, एक जीईसी 10 मिनट के लिए विज्ञापन दे सकता है और हर घंटे दो चैनल प्रोमो दिखा सकता है. लेकिन लॉकडाउन के बाद से, चैनलों पर काफी कम विज्ञापन आए हैं.

उद्योग जगत के प्रमुख जीईसी चैनलों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान एक दिन में 25 करोड़ रुपये से लेकर 30 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है.

सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सामान्य मनोरंजन चैनलों में से एक, दंगल टीवी के पूर्व सीईओ जॉय चक्रवर्ती ने कहा कि विज्ञापनदाताओं की संख्या अब तक सबसे कम रही है.

उन्होंने कहा कि मनोरंजन चैनलों के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट है.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन जीईसी को दर्शकों की संख्या पर अभी भी एक फायदा होगा क्योंकि सिनेमाघर नहीं खुलेंगे और खेल के मुकाबले भी बंद हैं. जीईसी को अतिरिक्त लाभ है क्योंकि उनमें से अधिकांश का भुगतान किया जाता है और ये राजस्व अभी सुरक्षित हैं.’

दिप्रिंट ने ईमेल के माध्यम से टिप्पणी के लिए ज़ी और स्टार समूहों की राय जानने की कोशिश की, पर इस खबर के छपने तक कोई जवाब नहीं मिला.

मुंबई के एक प्रोडक्शन हाउस नीला टेली फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक असित कुमार मोदी ने कहा कि लोगों ने दोबारा प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में रुचि नहीं खोई है. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा निर्मित और निर्देशित तारक मेहता का उल्टा चश्मा, जीईसी पर शीर्ष पांच शो में शामिल है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसका कोई राजस्व नहीं मिल पा रहा है.

दर्शकों की संख्या में कमी नहीं, पर माइथोलोजी हिट

प्रायोजन राशि भले ही कम हो गयी हो लेकिन लॉकडाउन के दौरान जीईसी की दर्शकों की संख्या में बड़ी गिरावट नहीं हुई है क्योंकि लोग घरों में हैं.

लॉकडाउन व्यूइंग पैटर्न पर बीएआरसी-नेल्सन की रिपोर्ट के छठे संस्करण के अनुसार, जनवरी की तुलना में, 18 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच सप्ताह में कुल मिलाकर टेलीविजन दर्शकों की संख्या में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.


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जबकि समग्र जीईसी दर्शकों की संख्या में जनवरी की तुलना में 18 से 24 अप्रैल के बीच 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, रिपोर्ट में हिंदी भाषी बाजार (शहरी) बेल्ट में हिंदी जीईसी के लिए दर्शकों की संख्या में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी.

इस बीच, जीईसी ने दर्शकों की संख्या को बनाए रखने के लिए अपनी फिल्म लाइब्रेरी का लाभ उठाया.

चक्रवर्ती ने कहा कि भारत भर में कई जीईसी पौराणिक शो के पुनर्प्रसारण की और झुके क्योंकि वे दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय रहे.

उन्होंने कहा, ‘पौराणिक सामग्री में हमेशा अच्छी दर्शकों की संख्या होती है, चाहे नया हो या पुराना. लॉकडाउन के इस चरण के दौरान आप देखेंगे कि अधिकांश चैनलों की प्रसारण सूची में पौराणिक कथाएं प्रमुख होंगी.’

उन्होंने कहा, ‘अधिकांश टीवी घरों में एक ही टीवी होता है और पौराणिक सामग्री को सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा एक साथ बैठे देखा जा सकता है.’

यह इस बात से सिद्ध होता है की दूरदर्शन ने लॉकडाउन के दौरान दूसरों चैनलों की तुलना में ज्यादा संख्या पायी.

उन्होंने कहा, ‘दंगल टीवी पर भी, महिमा शनि देव की (पहली बार एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित) ने चैनल के अपने कुछ मूल कार्यक्रमों की तुलना में सबसे ज्यादा दर्शकों की संख्या हासिल की.’

आगे क्या

ये समय मनोरंजन उद्योग के साथ काम करने वाले हजारों कलाकारों, तकनीशियनों और श्रमिकों के लिए भी अनिश्चित समय है, विशेष रूप से उन टेलीविजन क्षेत्रों में जहां वर्तमान में कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है.

गणेश पिक्चर्स के रवि कोताराकर, जो कि दक्षिण भारतीय फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव भी हैं, फिल्म निर्माताओं, वितरकों और प्रदर्शकों के चेन्नई स्थित संघ ने कहा कि उत्पादकों द्वारा अभी तक हुए नुकसान की क्षति का आकलन करना बाकी है.

उदाहरण के लिए, एमएसओ (कई सिस्टम ऑपरेटर, जो कई केबल टेलीविजन सिस्टम के ऑपरेटर हैं) ने हमें बताया है कि वे दो महीने तक हमें भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं. यहां तक कि केबल ऑपरेटर ब्रॉडकास्टर्स को कीमत कम करने के लिए कह रहे हैं.

ब्रॉडकास्टरों ने कहा कि इस साल जनवरी में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा जारी न्यू टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) के संशोधन और न्यू इंटरकनेक्शन रेगुलेशन को रोक कर रखने की मांग की जा रही है.

ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर में पहले के 19 रुपये से घटाकर 12 रुपये प्रति चैनल की एमआरपी अनिवार्य कर दी गयी है. यह अ-ला कार्टे को बढ़ावा देने के लिए चैनलों के गुलदस्ते पर दी जा रही छूट को प्रतिबंधित करता है.

प्रसारकों ने परिवर्तनों को ‘विघटनकारी’ करार दिया है और कहा है कि वे ग्राहकों के लिए अधिक महंगे साबित होंगे.

फिक्की ने मांग की है कि मौजूदा प्रोसेसिंग शुल्क और साथ ही लाइव टेलीकास्ट के लिए अप-लिंकिंग शुल्क को हटा दिया जाना चाहिए, ताकि लॉकडाउन के बाद अधिक मनोरंजन और खेल की घटनाओं को प्रोत्साहित किया जा सके.

इस बीच, उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि केबल और डीटीएच सब्सक्रिप्शन को अपने मौजूदा 18 प्रतिशत स्लॉट से 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में लाया जाना चाहिए.

यह भी तर्क दिया है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्राइवेट टीवी और रेडियो ऑपरेटर्स को दी जाने वाले लाइसेंस इत्यादि के शुल्क को दो साल तक माफ़ कर देना चाहिए.

लॉकडाउन सुगम होने के बाद भी ताज़ा सामग्री जल्द ही उपलब्ध होने की संभावना नहीं है.

एक सूत्र ने कहा, ‘हमारी कंटेंट टीम प्रोडक्शन हाउस के संपर्क में है, लेकिन लॉकडाउन के धीरे-धीरे खुलने के बाद भी कोई ताजी सामग्री सामने आने की संभावना नहीं है, क्योंकि नए एपिसोड की शूटिंग में कई तरह के प्रतिबंध होंगे.’


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उदाहरण के लिए, बाज़ार, कैफे या किसी अन्य भीड़-भाड़ वाली जगह पर एक बाहरी दृश्य करने का सवाल ही नहीं उठता.

‘इसके अलावा, इस तथ्य के बावजूद कि अधिकांश प्रोडक्शन हाउस मुंबई में हैं, अभिनेताओं और अन्य कर्मचारियों को शूट के लिए मुंबई से बाहर यात्रा करने के लिए तैयार रहना होगा, और जब तक परिवहन प्रतिबंधों को कम नहीं किया जाता है, यह एक समस्या हो सकती है.’

हालांकि टीवी सीरियल अभी भी प्रतिबंधों के साथ विशिष्ट स्थानों पर शूट किए जा सकते हैं, लेकिन रियलिटी शो की शूटिंग कुछ समय के लिए ‘सवाल से बाहर’ है, अंदरूनी सूत्रों ने बताया.

‘रियलिटी शो (जैसे नृत्य और गायन प्रतियोगिता) दर्शकों के साथ एक बंद स्थान पर शूट किए जाते हैं. सोशल डिसटेंसिंग की वजह से रियलिटी शो की शूटिंग शुरू होने में लंबा वक्त लगेगा.’

बिग बॉस और इंडियन आइडल जैसे रियलिटी शो जीईसी के लिए व्यूअरशिप ड्राइवरों में से हैं और सभी सामग्री का लगभग 30 प्रतिशत बनाते हैं.

मुंबई स्थित फिल्म, टेलीविजन और डिजिटल सामग्री उत्पादकों के फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सीईओ कुलमीत मक्कड़* ने कहा कि संशोधित मानक ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (एसओपी) और अन्य सुरक्षा मानदंडों के बारे में उन्मादी चर्चा चल रही है.

उन्होंने कहा, ‘टेलीविजन उद्योग, विशेष रूप से जीईसी, ताजा सामग्री के बिना काम नहीं कर सकते. काम को जल्द से जल्द फिर से शुरू करना चाहिए, हमें यह देखना होगा कि हम धीरे-धीरे शूटिंग को फिर से शुरू करने के बारे में सरकार को कैसे मना सकते हैं… लेकिन इसके लिए, श्रमिकों और कलाकारों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए. इसलिए, हम सभी हितधारकों को यह तय करने के लिए मिल रहे हैं कि हमें कब शुरू करना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि नुकसान की वजह से अधिक मनोरंजक सामग्री के निर्माण की आवश्यकता होगी.

‘लॉकडाउन के साथ, मनोरंजक सामग्री की आवश्यकता बढ़ी है और बढ़ती रहेगी. इसलिए, मैं उम्मीद कर रहा हूं कि, अगले 15-20 दिनों में, शूटिंग को फिर से शुरू करने और सावधानियों के साथ उत्पादन के लिए कुछ नए नियम आने चाहिए.’

उन्होंने कहा कि वह तारक मेहता का उल्टा चश्मा और ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए कुछ सामग्री (नेटफ्लिक्स, अमेज़न, आदि) के लिए नए एपिसोड की शूटिंग करना चाहते हैं.

‘लेकिन उत्पादन फिर से शुरू हो सकता है जब यह सरकार और उद्योग दोनों के लिए लाभ की स्थिति हो.’

* मक्कड़ का शुक्रवार को निधन हो गया.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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2 टिप्पणी

  1. रामायण सीरियल इस लॉक डाउन में खूब चला।साथ ही महाभारत भी

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