नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राज कुमार गोयल को मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए जाने पर असहमति जताई थी और आईएएस सुमिता डावरा, न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और प्रोफेसर फैजान मुस्तफा के नाम सुझाए थे।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जारी किए गए ब्योरे से यह जानकारी सामने आयी।
कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन के जवाब में, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने 10 दिसंबर, 2025 को संसद भवन में मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और आठ अन्य सूचना आयुक्तों के चयन के लिए आयोजित बैठक का विवरण दिया।
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उपस्थित थे।
सूचना अधिकार अधिनियम के अनुसार, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का चयन करने वाली तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
कार्यवाही से पता चलता है कि पूर्व आईएएस अधिकारी गोयल का नाम शाह द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
आरटीआई के तहत बत्रा को उपलब्ध कराए गए बैठक के विवरण से खुलासा हुआ, “गृह मंत्री ने केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए श्री राज कुमार गोयल, आईएएस (सेवानिवृत्त) (एजीएमयूटी: 1990) के नाम का सुझाव दिया। हालांकि, विपक्ष के नेता ने असहमति जताई और तीन अन्य नामों का सुझाव दिया।”
कार्यवाही के विवरण के अनुसार, गांधी ने इसके बजाय श्रम मंत्रालय की पूर्व सचिव और 1991 बैच की आईएएस अधिकारी सुमिता डावरा (सेवानिवृत्त) का नाम सुझाया, और इस बात पर जोर दिया कि “उन्हें विविध क्षेत्रों में सार्वजनिक नीति और विकास में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है”।
गांधी ने अपने लिखित प्रतिवेदन में कहा, “उनकी व्यापक विशेषज्ञता और प्रशासनिक कुशलता उन्हें सीआईसी की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त बनाती है।”
उन्होंने वरीयता क्रम में ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर और नेशनल एकाडमी आफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (एनएएलएसएआर) के पूर्व कुलपति फैजान मुस्तफा के नाम भी सुझाए, और उन्हें “कानून, न्याय और सार्वजनिक सेवा में अनुकरणीय रिकॉर्ड वाले विशिष्ट पेशेवर” बताया।
सरकार ने हालांकि गोयल को ही मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त करने का फैसला किया।
सूचना आयुक्तों के चयन में, तीनों सदस्य प्रस्तावित आठ नामों में से एक को छोड़कर बाकी सभी पर सहमत थे। गांधी ने सरकार द्वारा सुझाए गए एक नाम से असहमति जताई।
कार्यवाही के ब्योरे में दर्ज है, “सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, समिति के सभी सदस्य सात नामों पर सहमत हुए। हालांकि, विपक्ष के नेता एक नाम से असहमत थे।”
रिकॉर्ड में उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया गया जिसे सर्वसम्मति से समर्थन नहीं मिला, और न ही यह बताया गया कि बैठक के दौरान उस व्यक्ति का चयन हुआ या उसे अस्वीकार कर दिया गया।
सरकार ने 15 दिसंबर, 2025 को गोयल और आठ अन्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी।
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