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Saturday, 15 June, 2024
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G20 की तरह आ गया R20, मॉडरेट इस्लाम को बढ़ावा देने वाला संगठन जिसका RSS के राम माधव से है संबंध

एक इंडोनेशियाई थिंक टैंक द्वारा संगठित G20 धार्मिक फोरम (R20) का उद्देश्य ‘पहचान के राजनीतिक शस्त्रीकरण’ को रोकना है. इसे G20 शिखर सम्मेलन से 2 सप्ताह पहले बाली में आयोजित किया जाएगा

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नई दुनिया: अपनी तरह के दुनिया के पहले आयोजन में, एक मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया धार्मिक नेताओं का एक विश्व सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जो बीस के समूह (जी20) के अंतर-सरकारी मंच की तर्ज़ पर होगा.

‘जी20 रिलीजन फोरम’ या संक्षेप में R20 कहा जाने वाला ये आयोजन वार्षिक जी20 शिखर सम्मेलन के समानांतर एक आयोजन होगा, जिसकी मेज़बानी इस साल इंडोनेशिया करेगा और जिसे विद्वान लोग ‘कट्टर इस्लाम तथा उग्रवाद के विचारों को शांत करने’ की कोशिश के रूप में देख रहे हैं.

इंडोनेशिया के एक सबसे प्रभावशाली इस्लामिक थिंक टैंक, नहदलतुल उलमा (एनयू) की ओर से संगठित और होस्ट किए जाने वाला दो-दिवसीय आर20 शिखर सम्मेलन 2 और 3 नवंबर को बाली में आयोजित किया जाएगा, जो 15 और 16 नवंबर को होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से क़रीब दो हफ्ते पहले होगा.

दिप्रिंट के साथ एक विशेष ईमेल इंटरव्यू में, नहदलतुल उलमा के उप-महासचिव और आर20 प्रवक्ता मोहम्मद नजीब अज़का ने कहा, कि धार्मिक शिखर सम्मेलन जी20 का फायदा उठाकर ‘ये सुनिश्चित करने में सहायता करेगा कि 21वीं सदी में धर्म समस्याओं के बजाय समाधानों के एक ईमानदार और गतिशील स्रोत की तरह काम करे’.

अज़का ने कहा, ‘इसे हासिल करने के लिए आर20 एक वैश्विक मंच तैयार करेगा, जिसके ज़रिए हर आस्था और राष्ट्र के धार्मिक नेता अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकेंगे, और साझा नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों को एक आवाज़ दे सकेंगे’.

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दिप्रिंट को पता चला है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) न केवल इस विचार का समर्थन करता है, बल्कि संगठन की केंद्रीय समिति के एक सदस्य राम माधव भारत की ओर से इस आयोजन के प्रमुख प्रेरकों में से एक हैं.

इसी साल माधव ने इस तरह के शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की धारणा को अंतिम रूप देने, और इसे धार्मिक तथा आध्यात्मिक नेतृत्व के लिए एक स्थायी वैश्विक मंच बनाने की दिशा में, जकार्ता में एनयू के पदाधिकारियों से मुलाक़ात की थी. आयोजन में वो मुख्य वक्ताओं में से एक होंगे.

दिप्रिंट से बात करते हुए माधव ने कहा, ‘पूरा वैश्विक नैरेटिव और एजेंडा फिलहाल राजनीतिक नेतृत्व, बड़ी कंपनियों, कुछ आर्थिक थिंक टैंक्स या उग्रवादी और आतंकी संगठनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. हमें एक संतुलन लाने की आवश्यकता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इस तरह के आयोजन की मेज़बानी का विचार नहदलतुल उलमा की ओर से पेश किया गया था. भारत की ओर से हमने उग्र सुधारवाद, आतंकवाद, युद्ध और हिंसा की चुनौतियों का सामना करने के लिए उनके साथ हाथ मिलाया है. फिलहाल आध्यात्मिक या सभ्यतागत नेतृत्व की इसमें कोई भूमिका नहीं है. आर20 का उद्देश्य सांस्कृतिक, धार्मिक, और सभ्यतागत नेतृत्व का एक वैश्विक मंच विकसित करना है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में पूरी सक्रियता से कुछ देशों की सहायता कर सके.’

इंडोनेशिया का धार्मिक मामलों का मंत्रालय भी इस आयोजन का समर्थन कर रहा है, जिसने एनयू को 2022 में होने वाले आयोजन के समन्वयक के रूप में मान्यता दी है.

अज़का ने कहा, ‘जी20 धार्मिक फोरम एनयू के प्रयासों का एक स्वाभाविक परिणाम है, जो पिछले एक दशक से पहचान के राजनीतिक शस्त्रीकरण और सांप्रदायिक नफरत को फैलने से रोकने और दुनिया के विविध लोगों, संस्कृतियों और राष्ट्रों के बीच एकजुटता और सम्मान को बढ़ावा देने का प्रयास करती रही है.’

इस साल आर20 में चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा- ऐतिहासिक शिकायतें, सत्य वर्णन, सुलह और माफी; दुनिया के प्रमुख धर्मों और सभ्यताओं के साझा मूल्यों को पहचानना और उन्हें अपनाना, धर्म की पुरानी पड़ चुकी और समस्यात्मक शिक्षा को फिर से प्रासंगिक बनाना; और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए मूल्य विकसित करना.

इंडोनेशिया-स्थित एक शिक्षक और इस्लामिक विद्वान हादज़ा मिन फज़ली आर के अनुसार, आर20 के ज़रिए इंडोनेशिया ‘आधुनिक इस्लाम के विचार को बढ़ावा देने’ की कोशिश कर रहा है. मुसलमान इस देश की आबादी का क़रीब 88 प्रतिशत हैं.

हादज़ा मिन फज़ली आर ने दिप्रिंट से कहा, ‘विश्व समुदाय के लिए यह देखना बहुत अहम है कि एक उदार इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए, एक मुस्लिम-बहुल देश इस तरह के शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. इसका एक प्रमुख एजेंडा है एक उग्र सुधारवादी इस्लाम और आतंकवाद के विचारों को शांत करना. हमें बताया गया था कि धार्मिक मामलात का मंत्रालय इस सम्मेलन का समर्थन कर रहा है. सम्मेलन के व्यापक विचारों में लोकतंत्र, विकास, और मध्यमार्ग शामिल हैं.’


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एक ‘अनोखा’ सम्मेलन

भारत से एक प्रतिनिधि मंडल, जिसमें हिंदू भिक्षु और आध्यात्मिक नेता शामिल होंगे, सम्मेलन में शिरकत करेगा.

अज़का ने कहा, ‘इस साल के जी20 धार्मिक फोरम की तैयारियों और संचालन के लिए, एनयू भारत सरकार और सिविल सोसाइटी संगठनों दोनों के साथ समन्वय कर रही है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हम भारत से कुछ प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित कर रहे हैं, जिनमें राम माधव वाराणसी, आर्कबिशप फेलिक्स मकाडो, स्वपन दासगुप्ता, श्री श्री रविशंकर, शंकराचार्य परंपरा के एक प्रमुख प्रतिनिधि, और भारत के मुस्लिम समुदाय के नेता भी शामिल हैं’. उन्होंने आगे कहा कि सभी जी20 सदस्य देशों और उनसे आगे की प्रमुख धार्मिक हस्तियों और विद्वानों को भी आमंत्रित किया जाएगा.

उनके अनुसार मक्का-स्थित मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल करीम एल-ईसा, नहदलतुल उलमा सेंट्रल बोर्ड अध्यक्ष क्याई हाजी याहया चोलिल स्ताक़ुफ के साथ आर 20 सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे; और पोप फ्रांसिस पॉन्टिफिकल काउंसिल फॉर इंटर-रिलीजियस डायलॉग  के अध्यक्ष कार्डिनल मिगेल एंजिल आयुसो गुइक्सॉट को अपने आधिकारिक नुमाइंदे के तौर पर भेजेंगे.

एनयू के एक उच्च-स्तरीय सूत्र ने दिप्रिंट को बताया: ‘इंडोनेशिया पहले आर20 की मेज़बानी करेगा, और अगले सम्मेलन की मेज़बानी भारत करेगा क्योंकि वो जी20, 2023 शिखर सम्मेलन का भी मेज़बान देश होगा. तीसरा सम्मेलन ब्राज़ील में आयोजित किया जाएगा, जब वो जी20, 2014 की मेज़बानी करेगा. इस तरह- एक मुस्लिम-बहुल देश से एक हिंदू-बहुल देश और फिर एक कैथोलिक राष्ट्र- ये एक अनोखा सम्मेलन है जो सभी धर्मों को आपस में जोड़ेगा’.

अज़का ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो आर20 के ‘उदघाटन सत्र’ को संबोधित करेंगे. कई कैबिनेट मंत्री भी सम्मेलन में शिरकत करेंगे, जिनमें इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्री और एक प्रमुख एनयू लीडर याक़ूत चोलिल क़ूमास और विदेश मंत्री रेतनो मरसूदी शामिल हैं.


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NU की कोशिशों का नतीजा’

अज़का ने कहा कि आर20 शिखर सम्मेलन एनयू के पिछले कई सालों के रणनीतिक प्रयासों का परिणाम है. 2016 में, एनयू ने इंडोनेशिया के जकार्ता में उदारवादी मुस्लिम नेताओं के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसोमिल) का संयोजन किया था, जिसमें आईसोमिल नहदलतुल उलमा घोषणा जारी की गई थी.

अज़का ने बताया कि उस घोषणा में, अन्य बातों के अलावा थिंक टैंक ने आह्वान किया था कि ‘हर आस्था और देश के लोग एक वैश्विक आम राय बनाने में शामिल हों, कि इस्लाम का राजनीतिकरण नहीं किया जाएगा, और उन तत्वों को हाशिए पर किया जाएगा जो इस्लाम का इस तरह से शोषण करते हैं, कि उससे दूसरों को नुक़सान पहुंचता है.’

उन्होंने कहा कि 2017 में एनयू के 70 लाख युवा वयस्क सदस्यों ने ‘मानवीय इस्लाम पर गेराकन पेमुदा अंसॉर घोषणा’ का ऐलान किया था, जो 21 पन्नों का एक एक रोडमैप था जिसमें ‘इस्लामिक दुनिया के भीतर तेज़ी से बढ़ रहे कैंसर, जिसकी झलक आईएसआईएस, अल-क़ायदा, और लश्करे तैयबा जैसे आतंकी समूहों द्वारा की जा रही हिंसा, और यमन, लीबिया, सीरिया, और दूसरी जगहों पर चल रहे गृह-युद्धों में दिखाई देती है, से निपटने के एक समन्वित और दीर्घ-कालिक प्रयासों के कुछ बुनियादी तत्वों की रूपरेखा दी गई थी’.

अज़का ने कहा कि ऐसे प्रयासों की वजह से एनयू को इस साल इंडोनेशिया द्वारा जी20 की अध्यक्षता का फायदा उठाने में मदद मिली है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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