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Thursday, 13 June, 2024
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‘आउटसाइडर टैग, विरोधी IAS लॉबी’ जिम्मेदार! 2020 के बाद एक और लेटरल एंट्री वाले अधिकारी ने छोड़ा पद

2019 और 2021 में संयुक्त सचिव के रूप में काम करने के लिए 12 लेटरल एंट्री वाले अधिकारियों का चयन किया गया था. इनमें से फिलहाल 9 विशेषज्ञ सेवारत हैं. लेटरल एंट्री वाले पदों की भर्ती के लिए आवेदनों में भी कमी आई है.

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नई दिल्ली: 2019 में लेटरल एंट्री प्रक्रिया के जरिए मोदी सरकार ने नौ अधिकारियों का चयन किया था, जिसमें से एक अंबर दुबे ने अपना पद छोड़ दिया है.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव दुबे अपने तीन साल तक के अनुबंध पर अपने पद बने रहे थे. फिलहाल उन्होंने वैकल्पिक दो साल के विस्तार का लाभ नहीं उठाने का विकल्प चुना है. 2020 के बाद से, ऐसा करने वाले वह दूसरे ‘लेटरल एंट्री’ वाले अधिकारी है. इससे पहले अरुण गोयल ने वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था.

एक्सटेंशन लेने की अनिच्छा व्यक्त करते हुए, दुबे ने अपना कार्यकाल पूरा होने पर पिछले सप्ताह सरकार से बाहर होने का विकल्प चुना. आईआईटी-बॉम्बे और आईआईएम-अहमदाबाद के पूर्व छात्र रहे दुबे, सरकार में अपने कार्यकाल से पहले केपीएमजी में एक सीनियर पार्टनर थे.

2019 में सरकार द्वारा लेटरल एंट्री के माध्यम से चयन किए गए नौ अधिकारियों में से आठ को केंद्र सरकार के मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के रूप में तैनात किया गया था. इनमें से पांच कॉर्पोरेट क्षेत्र से और तीन सार्वजनिक क्षेत्र से सिविल सेवा के इन पदों पर शामिल हुए थे.

संयुक्त सचिव के रूप में पद छोड़ने के अपने निर्णय की पुष्टि करते हुए, दुबे ने दिप्रिंट को बताया: ‘सरकार में तीन साल काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं. फिर भी बेहद संतोषजनक थे. यहां सेवा करना सम्मान की बात है और उससे जुड़ी यादें जीवन भर बनी रहेंगी. अब मैं इंडस्ट्री में वापस जा रहा हूं. मंत्रालय को जब भी जरूरत होगी मैं किसी भी मदद या सुझाव के लिए हमेशा मौजूद रहूंगा.

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कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सूत्रों के अनुसार, साल 2019 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के रूप में शामिल किए गए सात लेटरल एंट्री के माध्यम से आने वाले अधिकारियों के प्रदर्शन से ‘खुश’ होकर सरकार ने उनका कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है.

हालांकि, दिप्रिंट ने जिन अधिकारियों से बात की उनमें से कुछ ने कहा कि वे अक्सर ‘आउटसाइडर’ की तरह महसूस करते हैं.


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सेवा में ‘आउटसाइडर’

2021 में, सरकार ने लेटरल एंट्री के जरिए तीन और अधिकारियों को नियुक्त किया था. इनमें से एक सार्वजनिक क्षेत्र से और दो निजी क्षेत्र से थे.

2019 और 2021 में सरकार द्वारा लेटरल एंट्री के जरिये नियुक्त किए गए कुल 12 अधिकारियों में से नौ अभी भी सेवारत हैं. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र से चार और कॉर्पोरेट क्षेत्र से पांच लोग शामिल हुए थे.

लेटरल एंट्री वाले एक अधिकारी ने पहचान न जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘नौकरशाही का लेटरल के प्रति व्यवहार एक विरोधी जैसा रहा है और हमें हमेशा बाहरी लोगों के रूप में देखा जाता है. हम आईएएस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा नहीं हैं, और हम में से कई लोगों को उनके सामाजिक समारोहों या पार्टियों में भी आमंत्रित नहीं किया जाता है. वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बहुत विरोध है.’

संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत एक अन्य लेटरल एंट्री वाले अधिकारी ने कहा कि विरोध तो साफतौर पर शुरू से ही था. उन्होंने बताया, ‘संस्थान (भारतीय लोक प्रशासन संस्थान) में हमें सरकार में शामिल होने से पहले ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था, हमसे कहा गया कि ‘औकात में रहना’. हम जैसे लेटरल एंट्री वाले अधिकारी बेहद मजबूत पृष्ठभूमि से आते हैं. हम आईआईटी, आईआईएम, एलएसई आदि संस्थानों से निकले हुए छात्र हैं. हमने इंडस्ट्री में सीनियर और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है.’

उन्होंने आगे कहा कि उनके जैसे अधिकारियों ने सरकार के लिए काम करना इसलिए चुना क्योंकि वे ‘राष्ट्र-निर्माण’ में योगदान देना चाहते थे. वह कहते हैं, ‘हम कभी नहीं जानते थे कि हमें ऐसी विरोधी लॉबी का सामना करना पड़ेगा.’


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आवेदकों की संख्या में गिरावट

2021 में सरकार को संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव सहित लगभग 40 पदों के लिए 2,000 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे.

डीओपीटी के एक प्रेस बयान के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को 2021 में संयुक्त सचिव के पद के लिए 295, निदेशक के लिए 1,247 और उप सचिव के लिए 489 एप्लीकेशन मिली थीं.

यह 2019 के उलट था. उस समय सरकार को सिर्फ 10 संयुक्त सचिव पदों के लिए 6,077 आवेदन प्राप्त हुए थे.

एक अन्य लेटरल एंट्री वाले अधिकारी ने कहा, ‘नौकरशाही से उलझाव’ इस क्षेत्र में आने की कम होती चाह की कई वजहों में से एक है. लेटरल निजी क्षेत्र में अपनी बड़ी नौकरियों को छोड़कर सरकार और सेवा में योगदान देने और इससे जुड़ी प्रतिष्ठा के लिए इससे जुड़ते हैं. लेकिन उन्हें मिलने वाले पद और अनुबंध बहुत कम लग रहे हैं.‘

उन्होंने कहा कि 2019 बैच के जिन लोगों ने विस्तार का विकल्प चुना है, वे ‘अनुभव के लिए’ दो साल के लिए सिविल सेवाओं में बने रहना चाहते हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘ लेटरल एंट्री योजना बहुत प्रगतिशील है, लेकिन सरकार को यहां नौकरशाही की मनमानी को नियंत्रित करने की जरूरत है. कॉन्ट्रेक्ट भी सख्त है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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