(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 16 जनवरी (भाषा) झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों से शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कई हिस्सों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ, क्योंकि आक्रोशित स्थानीय लोगों ने रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को घंटों तक अवरुद्ध रखा। इससे हजारों यात्री फंस गए और मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के साथ झड़प के दौरान भीड़ के कुछ समूहों ने एक ‘ट्रैफिक बूथ’ में तोड़फोड़ की और एक पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाया, जिससे तनाव बढ़ गया। पथराव में कम से कम 12 लोग घायल हो गए, जिनमें से कई मीडियाकर्मी शामिल हैं।
एक बांग्ला समाचार चैनल की महिला पत्रकार पर उपद्रवी प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर हमला किया। मीडिया संस्थाओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की।
एक अन्य पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस घटनाक्रम की शुरुआत अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा के सुजापुर कुमारपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के निवासी 36 वर्षीय अलाउद्दीन शेख की मौत से हुई। शेख का शव झारखंड में उसके किराए के मकान से बरामद किया गया, जहां वह कबाड़ का व्यापार करता था।
परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उसकी पीटकर हत्या की गई और बाद में फंदे पर लटका दिया गया ताकि यह आत्महत्या जैसा लगे। शुक्रवार सुबह जब उसका शव गांव में लाया गया तो रोष उत्पन्न हो गया।
सुबह करीब नौ बजे से, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने महेशपुर में सियालदह-लालगोला रेलवे लाइन पर कब्जा जमा लिया और पटरियों पर बांस के डंडों का ढेर लगा दिया, जबकि अन्य लोगों ने टायर जलाकर एनएच-12 को अवरुद्ध कर दिया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच रेल और सड़क संपर्क प्रभावित हुआ।
कई स्थानीय और लंबी दूरी की ट्रेनें रोक दी गईं और सैकड़ों बसें और ट्रक राजमार्ग पर फंस गए।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘प्रदर्शनकारी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, कड़ी सजा और जिले के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे।’
इस नाकाबंदी के कारण क्षेत्र में घंटों तक जनजीवन ठप रहा और उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह से रुक गया। वरिष्ठ जिला अधिकारियों की लंबी बातचीत के बाद दोपहर के आसपास रेल और सड़क यातायात धीरे-धीरे फिर से बहाल हो सका।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मुर्शिदाबाद के विभिन्न स्टेशनों से कोलकाता जाने वाली एक ट्रेन और लालगोला जाने वाली दो ट्रेनों को रवाना होने की अनुमति दी गई, जबकि एनएच-12 पर वाहनों का आवागमन धीरे-धीरे सामान्य हो गया।
बहरामपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मृतक के घर जाकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की, जिससे प्रदर्शन को राजनीतिक रंग मिल गया।
चौधरी ने कहा, ‘ये प्रवासी मजदूर अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। वे अपराधी नहीं हैं। उनसे अपनी पहचान साबित करने के लिए क्यों कहा जा रहा है और उन्हें राज्य के बाहर बांग्लादेशी क्यों करार दिया जा रहा है?’
उत्तर बंगाल के दौरे पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शांति और संयम बनाए रखने की अपील की।
ममता ने कहा, “बेलडांगा में उकसावे वाली घटनाएं हो रही हैं, आप जानते हैं कि इनके पीछे कौन है। मैं सभी से शांति बनाए रखने और किसी भी जाल में न फंसने का आग्रह करती हूं। गुस्सा स्वाभाविक है लेकिन पत्रकारों पर हमला नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में “जानबूझकर अशांति फैलाने” के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें “भाजपा और केंद्रीय एजेंसियां भूमिका निभा रही हैं”।
ममता ने बढ़ते असंतोष को बांग्ला भाषी लोगों के उत्पीड़न और निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनीक्षण (एसआईआर) से भी जोड़ा और निर्वाचन आयोग पर आधार कार्ड और माध्यमिक विद्यालय के प्रवेश पत्र जैसे दस्तावेजों को खारिज करके दहशत पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पूछा, “लोगों को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। आदिवासियों के नाम हटाए जा रहे हैं। आम लोग कहां जाएंगे?”
प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “मुर्शिदाबाद के लोगों को बंगाल के बाहर सिर्फ बांग्ला बोलने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। हम अपने प्रवासी श्रमिकों के लिए न्याय और सुरक्षा चाहते हैं।”
मृतक की मां, सोना बीबी, अपने बेटे से हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए फूट-फूटकर रो पड़ीं।
उन्होंने आरोप लगाया, “मेरे बेटे ने मुझे बताया कि वहां हालात खराब हैं और वह डरा हुआ है। मेरे बेटे ने कहा कि अगर उसे मौका मिला तो वह घर लौट आएगा। उन्होंने मेरे बेटे की हत्या कर दी और फिर उसके शव को लटका दिया।”
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहने के लिए राज्य पुलिस की आलोचना की और पुलिस महानिदेशक से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “एनएच-12 घंटों से बंद है, ट्रेनें रुकी हुई हैं, पथराव हो रहा है और गुंडे उत्पात मचा रहे हैं। फिर भी, पुलिस ने कुछ नहीं किया।”
मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से कई दौर की बातचीत की और उन्हें आश्वासन दिया कि प्रवासी मजदूर की मौत की गहन जांच की जा रही है और परिवार को न्याय मिलेगा।
पुलिस ने बताया कि शाम तक शांति बहाल हो गई थी और एहतियात के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
भाषा
राखी पवनेश
पवनेश
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