जयपुर, पांच फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कहा कि राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए नया कानून बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कानून बनाने प्रक्रिया के तहत मसौदा विधेयक सदन में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री, विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि खेजड़ी के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे राज्य वृक्ष घोषित किया है और उसे बचाने के लिए सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं सदन के माध्यम से राजस्थान की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि राज्य के कल्पवृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए कानून लाएंगे ताकि प्रदेश में खेजड़ी संरक्षित रहे।”
शर्मा ने कहा कि उन्होंने खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाने के संबंध में निर्देश दे दिए थे और प्रक्रिया पूरी होते ही हम सदन में इसका मसौदा पेश करेंगे।
मुख्यमंत्री द्वारा यह घोषणा बीकानेर में पर्यावरण प्रेमियों और संत समुदाय के धरने के बीच हुई है। ये लोग पेड़ संरक्षण विधेयक लाने और राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले दिन में राज्य सरकार की ओर से मंत्री के के बिश्नोई, राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह बिश्नोई, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई के साथ सरकारी प्रतिनिधिमंडल आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए महापड़ाव स्थल पर पहुंचे।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान वृक्ष संरक्षण विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने कानून लागू होने तक बीकानेर और जोधपुर संभागों में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव दिया। आश्वासन के बाद 29 संतों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
हालांकि, आंदोलन अब भी जारी है क्योंकि प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने प्रस्तावित प्रतिबंध की भौगोलिक सीमाओं पर असंतोष व्यक्त किया है।
आंदोलनकारियों ने दो मुख्य मांगें रखी हैं जिसमें इसी विधानसभा सत्र में वृक्ष संरक्षण कानून बनाना और पूरे राजस्थान राज्य में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना शामिल है।
हालांकि सरकार विधायी मांग पर सहमत हो गई है लेकिन कटाई पर प्रतिबंध को केवल बीकानेर और जोधपुर संभागों तक सीमित रखने के प्रस्ताव का विरोध हुआ है।
आंदोलन से जुड़े परसराम विश्नोई ने बताया कि अनशन खत्म नहीं हुआ है। संतों का कहना था कि पूरे राजस्थान में रोक लगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आमरण अनशन चल रहा है।
भाषा पृथ्वी राजकुमार
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