नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निचली अदालतों को पूर्व तथा मौजूदा सांसदों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर प्राथमिकता से फैसला करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम की पीठ ने ऐसे मामलों को निपटाने की दर पर विचार करने के बाद यह निर्देश दिया।
अदालत संसद सदस्यों और विधानसभा सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों के निस्तारण के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।
इसने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘मामलों के निस्तारण की दर बहुत कम है। निस्तारण लगभग शून्य है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘दिसंबर 2022 के लिए स्थिति रिपोर्ट पर सावधानीपूर्वक गौर करने के बाद और मामलों के लंबित रहने पर विचार करते हुए विशेष अदालतों तथा अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालतों को मौजूदा तथा पूर्व सांसदों/विधायकों से जुड़े मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जाता है।’’
अदालत ने अपने रजिस्ट्रार जनरल से तीन दिन के भीतर विशेष अदालतों को यह निर्देश देने के लिए कहा।
उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2020 में उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश पर स्वत: संज्ञान कार्यवाही शुरू की थी जिसमें सभी उच्च न्यायालयों को सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी करने के लिए कहा गया था।
इस मामले पर अगली सुनवाई अब चार मई को होगी।
भाषा
गोला नेत्रपाल
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