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Sunday, 25 January, 2026
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वंदे मातरम् की विरासत पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर संबोधन

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता ने औपनिवेशिक शासन का अंत किया, लेकिन संविधान को अपनाने से भारत का कानून, संस्थागत जवाबदेही और भारतीयों की इच्छा पर आधारित आत्म-शासन की ओर संक्रमण पूरा हुआ.

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को ‘वंदे मातरम्’ की विरासत पर जोर देते हुए कहा कि यह राष्ट्रगीत भारत माता के “दिव्य स्वरूप की प्रार्थना” है और यह हर भारतीय में “देशभक्ति का संचार” करता है.

77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रगीत के विभिन्न अनुवादों का भी उल्लेख किया, जिन्हें मूल रूप से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था और जिनकी भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आकार देने में अहम भूमिका रही.

उन्होंने कहा, “पिछले वर्ष 7 नवंबर से हमारे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित किए जा रहे हैं. यह गीत, जो भारत माता के दिव्य स्वरूप की प्रार्थना है, हर भारतीय में देशभक्ति का संचार करता है.”

उन्होंने कहा, “महान राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्यम भारती ने तमिल भाषा में ‘वंदे मातरम् येनबोम’ गीत की रचना की, जिसका अर्थ है ‘आओ वंदे मातरम् का जाप करें’, और उन्होंने वंदे मातरम् की भावना से और भी बड़े पैमाने पर जनसमूह को जोड़ा. इस गीत के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी लोकप्रिय हुए. श्री अरबिंदो ने इस गीत का अंग्रेजी में अनुवाद किया. आदरणीय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ हमारा काव्यात्मक राष्ट्रीय प्रार्थना गीत है.”

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस का विषय राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित है.

1923 में तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा बनाई गई चित्रों की एक विशिष्ट श्रृंखला, जिसमें ‘वंदे मातरम्’ की पंक्तियों को दर्शाया गया है और जिसे ‘बंदे मातरम एल्बम’ (1923) में प्रकाशित किया गया था, सोमवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस के दौरान व्यू-कटर के रूप में प्रदर्शित की जाएगी.

परेड के समापन पर ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ एक बैनर जारी किया जाएगा, इसके साथ रबर के गुब्बारे छोड़े जाएंगे, जो राष्ट्र की स्थायी भावना को उपयुक्त श्रद्धांजलि देंगे.

गणतंत्र दिवस भारत की राष्ट्रीय यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर है. यह उस दिन को चिह्नित करता है जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश को औपचारिक रूप से एक ‘संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य’ के रूप में स्थापित किया गया.

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता ने औपनिवेशिक शासन का अंत किया, लेकिन संविधान को अपनाने से भारत का कानून, संस्थागत जवाबदेही और भारतीयों की इच्छा पर आधारित आत्म-शासन की ओर संक्रमण पूरा हुआ.


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