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Friday, 2 January, 2026
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पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में शामिल होने की पीएम मोदी ने की अपील

प्रधानमंत्री 3 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा अवशेषों की इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित होने जा रही पिपरहवा के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में लोगों को शामिल होने का आमंत्रण दिया.

प्रधानमंत्री 3 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा अवशेषों की इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. प्रदर्शनी का शीर्षक है — “द लाइट एंड द लोटस: रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन”.

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कार्यक्रम की झलकियां साझा करते हुए संस्कृति और बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले लोगों से प्रदर्शनी देखने की अपील की. उन्होंने लिखा, “दिल्ली में पिपरहवा के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी की ये झलकियां हैं. संस्कृति और बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले सभी लोगों से आग्रह है कि वे इस प्रदर्शनी में जरूर आएं.”

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह प्रदर्शनी पहली बार एक सदी से अधिक समय बाद वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों को राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में सुरक्षित प्रामाणिक अवशेषों और पुरातात्विक सामग्रियों के साथ एक मंच पर प्रस्तुत कर रही है.

1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. ये भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से अहम अवशेषों में शामिल हैं. पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे व्यापक रूप से वह स्थान माना जाता है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन बिताया था.

यह प्रदर्शनी बुद्ध के उपदेशों के साथ भारत के गहरे और सतत सभ्यतागत संबंध को दर्शाती है और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है. इन अवशेषों की हालिया वापसी सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से संभव हो सकी है.

प्रदर्शनी को विषयवार रूप से आयोजित किया गया है. इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित मॉडल है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों के प्रामाणिक अवशेषों और वापस लाए गए रत्नों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है. अन्य खंडों में पिपरहवा पुनःदर्शन, बुद्ध के जीवन की झलकियां, मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की सौंदर्य भाषा, सीमाओं से परे बौद्ध कला और विचारों का विस्तार, और सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी: निरंतर प्रयास शामिल हैं.

जनता की समझ को और गहरा करने के लिए प्रदर्शनी में व्यापक ऑडियो-विजुअल सामग्री भी शामिल की गई है. इसमें इमर्सिव फिल्में, डिजिटल पुनर्निर्माण, व्याख्यात्मक प्रोजेक्शन और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां हैं, जो भगवान बुद्ध के जीवन, पिपरहवा अवशेषों की खोज, उनके विभिन्न क्षेत्रों में प्रसार और उनसे जुड़ी कला परंपराओं की जानकारी सहज रूप से प्रदान करती हैं.

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