नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह केवल छह वर्ष तक की आयु के नागरिकों को ही नए आधार कार्ड जारी करे तथा किशोरों और वयस्कों को आधार कार्ड जारी करने के लिए सख्त दिशानिर्देश तैयार करे, ताकि भारत के नागरिक होने का दिखावा करने वाले घुसपैठियों को रोका जा सके।
वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) में अधिकारियों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे सामान्य सेवा केंद्रों पर सूचना पट्ट लगाएं जिनमें यह बताया गया हो कि 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या केवल “पहचान का प्रमाण” है, न कि नागरिकता, पता या जन्मतिथि का प्रमाण।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा, याचिका में यूआईडीएआई (जो आधार कार्ड जारी करने वाला प्राधिकरण है) और केंद्रीय गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है।
वकील अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि आधार, जिसे मूल रूप से पहचान के प्रमाण के रूप में बनाया गया था, तेजी से एक “बुनियादी दस्तावेज” बन गया है जो व्यक्तियों को राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और मतदाता पहचान पत्र जैसे अन्य पहचान दस्तावेज प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
याचिका में कहा गया, “यूआईडीएआई ने 144 करोड़ आधार कार्ड जारी किए हैं और 99 प्रतिशत भारतीयों का पंजीकरण हो चुका है। इसलिए, याचिकाकर्ता अनुच्छेद 32 के तहत एक जनहित याचिका के रूप में यह रिट याचिका दायर कर रहा है, जिसमें यूआईडीएआई को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह केवल बच्चों को ही नए आधार कार्ड जारी करे और किशोरों और वयस्कों के लिए नए कठोर दिशानिर्देश बनाए, ताकि घुसपैठियों को आधार कार्ड प्राप्त करने और भारतीय नागरिक बनकर धोखाधड़ी करने से रोका जा सके।”
इसमें कहा गया है कि याचिका दायर करने की आवश्यकता ऐसे हालात में उत्पन्न हुई जब याचिकाकर्ता को पता चला कि घुसपैठिए एक कमजोर और आसानी से जोड़तोड़ की जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से आधार कार्ड प्राप्त करने में सक्षम हैं।
याचिका में कहा गया, “विदेशी नागरिक ‘विदेशी’ श्रेणी के तहत आधार कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन घुसपैठिए ‘भारतीय नागरिक’ श्रेणी के तहत आधार कार्ड के लिए आवेदन करते हैं और इसे आसानी से बनवा लेते हैं। इसके बाद, वे राशन कार्ड, जन्म और निवास प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि प्राप्त कर लेते हैं, जिससे मूलतः भारतीय नागरिकों के तौर पर उन्हें नहीं पहचाना जा सकता…।”
भाषा प्रशांत माधव
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