नैनीताल, 19 मार्च (भाषा) उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (ऊर्जा) आर. मीनाक्षी सुंदरम बृहस्पतिवार को एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान वीडियो कांन्फ्रेंस के माध्यम से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पेश हुए।
अदालत के पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के संबंध में यह अवमानना याचिका दायर की गई थी और उच्च न्यायालय ने सुंदरम को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।
यह अवमानना याचिका देहरादून निवासी अनिल बलूनी तथा अन्य ने दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने 18 फरवरी 2026 के अपने आदेश में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद ध्यानी की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और राज्य सरकार को नियम, 2021 के अनुसार मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि, इस आदेश का पालन नहीं किया गया।
उच्च न्यायालय ने पाया था कि नियुक्ति में 2021 के नियम 9-ए का उल्लंघन हुआ जिसके तहत इस पद के लिए इंजीनियरिंग स्नातक की योग्यता आवश्यक है। ध्यानी के पास कथित तौर पर यह योग्यता नहीं है।
हालांकि, पेशी के दौरान सुंदरम ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि ध्यानी को 26 फरवरी 2026 को प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया गया।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ध्यानी को हटाने का आदेश पिछली तारीख से लागू किया गया। उन्होंने कहा कि मेहरबान बिष्ट को पिटकुल के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, लेकिन ध्यानी अब भी प्रबंध निदेशक के सभी कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
सुंदरम ने उच्च न्यायालय से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें दो सप्ताह का समय दिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ के सामने हुई। पीठ ने अब मामले में सुनवाई की अगली तारीख 30 अप्रैल तय की है।
भाषा सं दीप्ति सुरभि
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