नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दायर कर ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत ‘‘सार्वजनिक प्राधिकरण’’ घोषित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने कोष को कानून के तहत ‘‘सार्वजनिक प्राधिकरण’’ की श्रेणी में रखे जाने के मुद्दे से जुड़ी एक लंबित अपील में अर्जी दायर की।
याचिकाकर्ता ने कहा कि एक संवैधानिक प्राधिकरण (भारत के प्रधानमंत्री) की अगुवाई और प्रधानमंत्री के संयुक्त सचिव द्वारा संचालित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) में एक ‘‘सार्वजनिक प्राधिकरण’’ होने के लिए सभी विशेषताएं हैं और इस तरह कोष से जुड़ी कुछ सूचना के खुलासे का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने अप्रैल 2020 में प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी दायर कर कोष के गठन, कोष प्रधानमंत्री को सौंपे जाने तथा ऑडिट करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के चयन से जुड़ी सूचना मांगी गयी थी।
हालांकि, केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कोष के सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में आने से जुड़ा विषय उच्च न्यायालय में लंबित रहने के आधार पर आरटीआई अर्जी का निस्तारण कर दिया था।
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