नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) अभिनेता पंकज त्रिपाठी और उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी की पहली नाट्य प्रस्तुति ‘लाइलाज’ का प्रदर्शन भारत के सबसे बड़े नाट्य उत्सव, भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण में किया जाएगा।
इस संगीतमय हास्य नाटक का निर्माण इस दंपति के बैनर तले किया गया है और इसे राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित महोत्सव में मंचित किया जाएगा।
इस महोत्सव को लोकप्रिय रूप से ‘भारंगम’ के नाम से जाना जाता है। यह महोत्सव मंगलवार को शुरू हुआ और 20 फरवरी तक चलेगा, इसमें भारत और विदेश से प्रशंसित नाट्य प्रस्तुतियों को एक साथ लाया जाएगा।
फैज मोहम्मद खान द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक ‘लाइलाज’ त्रिपाठी की एक दशक से अधिक समय बाद मंच पर वापसी का प्रतीक है। इससे पंकज त्रिपाठी और मृदुला त्रिपाठी की बेटी आशी का नाट्य मंच पर पदार्पण भी होगा।
यह चयन रूपकथा रंगमंच के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह पहली बार है जब इस बैनर की पहली प्रस्तुति प्रतिष्ठित नाट्य महोत्सव में प्रस्तुत की जाएगी।
त्रिपाठी ने एक बयान में कहा, “भारत रंग महोत्सव का भारतीय रंगमंच में एक विशेष स्थान है, और इसके 25वें संस्करण के लिए ‘लाइलाज’ का चयन होना मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है। रंगमंच ही मेरी जड़ों से जुड़ा है, और एनएसडी ने हमेशा अनुशासन, ईमानदारी और कला के प्रति गहरे सम्मान का प्रतिनिधित्व किया है। रूपकथा रंगमंच के बैनर तले अपनी पहली प्रस्तुति को इस मंच पर लाना मेरे लिए एक यादगार पल है।”
उन्होंने कहा, “…’लाइलाज’ एक सरल, संगीतमय और भावपूर्ण कहानी है, लेकिन इसके पीछे उन अनेक लोगों की मेहनत है जो रंगमंच को एक जीवंत कला का उदाहरण मानते हैं। अपनी बेटी आशी के साथ इस मंच को साझा करना एक ऐसा भावनात्मक पहलू जोड़ता है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा। मैं इसे केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि उस रंगमंच समुदाय के प्रति एक भेंट मानता हूं, जिसने मुझे आकार दिया है।”
नाटक की सह-निर्माता मृदुला त्रिपाठी ने कहा कि रूपकथा रंगमंच शुरू करने के पीछे का इरादा मान्यता हासिल करने की बजाय ईमानदारी से कहानियां सुनाना था।
मृदुला त्रिपाठी ने कहा, ‘खासकर अपने 25वें वर्ष में ‘लाइलाज’ का भारत रंग महोत्सव के लिए चुना जाना बेहद उत्साहजनक है। इस नाटक को प्रेम, धैर्य और प्रक्रिया में विश्वास के साथ पोषित किया गया है। इसे एनएसडी जैसे मंच पर देखना, जहां कुछ बेहतरीन नाट्य कृतियों को सम्मानित किया जाता है, इस यात्रा को और भी सार्थक बनाता है।’
उन्होंने कहा, ‘इस वातावरण में आशी को मंच पर पहला कदम रखते देखना हम माता-पिता के लिए बेहद भावुक क्षण है। हम महोत्सव, दर्शकों और हर उस कलाकार के आभारी हैं जो मानते हैं कि रंगमंच में आज भी लोगों को प्रभावित करने, घावों को भरने और जोड़ने की शक्ति है।’
भाषा तान्या सुरेश
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