लद्दाख में पैंगोंग झील की फाइल फोटो | विशारद सक्सेना, विशेष व्यवस्था से
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श्रीनगर: लद्दाख में पैंगोंग त्सो को छह माह बाद पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया है. यहां पिछले साल जून में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवान में हिंसक टकराव के बाद लगाई गई पाबंदियां हटा दी गई हैं. इस घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

लद्दाख के पर्यटन विभाग ने रविवार से इनर लाइन परमिट जारी करना शुरू कर दिया है लेकिन फिलहाल इस क्षेत्र में पहुंचने का एकमात्र रास्ता विमान सेवा ही है क्योंकि खराब मौसम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग बंद पड़ा है.

आधिकारिक नियमों के अनुसार, क्षेत्र में भारत और चीन के बीच चल रहे सैन्य गतिरोध के बावजूद पर्यटक झील का दौरा कर सकते हैं. हालांकि, एकमात्र बदलाव यह है कि पर्यटकों को कोविड-19 दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा.


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पैंगोंग त्सो की यात्रा कैसे करें?

पैंगोंग त्सो की यात्रा इनर लाइन परमिट के लिए आवेदन के साथ शुरू होती है, जो एक पर्यटक के लद्दाख के कुछ क्षेत्रों तक जाने के लिए आवश्यक है.

लद्दाख प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई आवेदन करता है तो उसे एक दिन के अंदर ही परमिट दे दिया जाता है.

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अधिकारियों ने आगे कहा कि फिलहाल सड़क संपर्क नहीं होने से क्षेत्र तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता हवाई मार्ग ही है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘ऐसे पर्यटक जिनकी 72 घंटे की अवधि के भीतर कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई हो, बिना किसी प्रतिबंध के लद्दाख के सभी सार्वजनिक स्थानों पर जा सकते हैं. झील देखने के इच्छुक पर्यटकों को हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद एक रैपिड एंटीजन टेस्ट कराना होगा, इसके बाद उन्हें खुद को मौसम के अनुरूप ढालने के लिए कम से कम 24 घंटे की अवधि तक इंतजार करना होगा.’

उन्होंने कहा, ‘जो पर्यटक लद्दाख पहुंचने के साथ ही घूमने निकल पड़ने का फैसला करते हैं उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वह खुद को वहां के मौसम के अनुरूप नहीं ढाल पाएंगे.’

लेह प्रशासन की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट के अनुसार, बीमारी का कोई लक्षण न दिखने की स्थिति में पर्यटक कोविड-19 निगेटिव प्रमाणपत्र के बिना भी इस केंद्रशासित क्षेत्र में आ सकते हैं, बशर्ते किसी होटल में कम से कम 7 दिन के लिए बुकिंग होनी चाहिए. उन्हें सात दिनों तक उसी होटल के परिसर में रहना होगा, जिसके बाद वे राज्य भर में सार्वजनिक स्थानों पर जा सकते हैं.

एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि परमिट नहीं रखने वाले पर्यटकों को सुरक्षा चौकियों से आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.

अधिकारी ने कहा, ‘लेह क्षेत्र में कम से कम तीन से चार ऐसे चेक-पोस्ट हैं जहां पर्यटकों को परमिट दिखाना होगा. हम पर्यटकों से इसे अपने साथ रखने का अनुरोध कर रहे हैं.’


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झील

पैंगोंग त्सो दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील है और लद्दाख में सबसे लोकप्रिय और शानदार पर्यटन स्थलों में से एक है.

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा केवल जमीन को ही नहीं बांटती है बल्कि 135 किलोमीटर लंबी, संकरी, गहरी और भूमि से घिरी झील, जिसका कुल क्षेत्रफल 700 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है, को भी दोनों देशों के बीच विभाजित करती है. 45 किमी लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में है.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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