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Sunday, 1 February, 2026
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पहलगाम और रेड फोर्ट आतंकी हमलों के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो के कैपेक्स के लिए बजट में 10 गुना बढ़ोतरी

पहलगाम और दिल्ली के लाल किले पर हुए आतंकी हमलों में सामने आई कमियों के बाद, केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के लॉन्ग-टर्म एसेट्स में निवेश के लिए खर्च को 257 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,549 करोड़ रुपये कर दिया है.

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नई दिल्ली: 2025 में हुए दो आतंकी हमलों, पहलगाम और दिल्ली, के बाद केंद्र सरकार ने रविवार को देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के सालाना बजट आवंटन में बड़ी बढ़ोतरी की है.

2026-27 के यूनियन बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईबी के लिए आवंटन बढ़ाकर 6,782.43 करोड़ रुपये कर दिया है. यह मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान के अनुसार 4,159.11 करोड़ रुपये से 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है.

कुल 6,782 करोड़ रुपये के आवंटन में से 2,549 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं. यह मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित पूंजीगत खर्च आवंटन 257 करोड़ रुपये से करीब दस गुना ज्यादा है. पूंजीगत खर्च में लंबे समय की संपत्तियों में निवेश शामिल होता है. वहीं राजस्व खर्च में वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्च जैसे संचालन से जुड़े खर्च आते हैं.

केंद्र सरकार पहले ही एजेंसी के प्रशासनिक खर्चों के लिए बजटीय अनुमान से करीब 300 करोड़ रुपये ज्यादा आवंटित कर चुकी है. ये खर्च भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम माने जाते हैं. आईबी के बजट का इस्तेमाल प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है. इसमें आंतरिक खतरों, आतंकी गतिविधियों और संभावित सुरक्षा जोखिमों से जुड़ी जानकारी जुटाना और उसका विश्लेषण शामिल है.

दो भीषण आतंकी हमलों को रोकने में सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी के बाद आईबी की भूमिका पर कड़ी जांच हुई. इनमें अप्रैल में अनंतनाग जिले के पहलगाम ब्लॉक के बैसरन मैदानों में आम नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग और नवंबर 2025 में दिल्ली में लाल किले के बाहर हुआ आत्मघाती धमाका शामिल है.

पहलगाम में पाकिस्तान से आए आतंकियों द्वारा किए गए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक स्थानीय व्यक्ति भी शामिल था. इस हमले के बाद बैसरन मैदानों में पर्याप्त सुरक्षा न होने पर सवाल उठे. यह इलाका हजारों पर्यटकों, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, को आकर्षित करता है. इसी वजह से यह पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों के लिए संभावित निशाना माना जाता है. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन रेजिस्टेंस फ्रंट ने पहले इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन वैश्विक आक्रोश और निंदा के बाद उसने दावा वापस ले लिया.

पिछले नवंबर दिल्ली में हुए आतंकी हमले ने खुफिया सूचनाओं की कमी और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को लेकर और सवाल खड़े किए. इस मामले में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का एक सदस्य जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस की पकड़ से बच निकला. इसके बाद उसने विस्फोटकों से भरी कार को लाल किले के बाहर उड़ा दिया. इस मॉड्यूल का सदस्य उमर-उन-नबी था, जो अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी था. डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि वही उस कार का चालक था, जिसमें विस्फोट हुआ था.

इस मामले में एनआईए अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें जम्मू-कश्मीर के तीन डॉक्टर, डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, डॉ. आदिल अहमद राथर और डॉ. बिलाल नसीर मल्ला, के साथ लखनऊ के शाहीन सईद भी शामिल हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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