(वर्षा सागी)
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में वर्ष 2021 से 2025 के बीच 10,000 से अधिक जंगली जानवरों को सुरक्षित रूप से पुनर्वासित किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन जानवरों में शहरी इलाकों से स्थानांतरित किए गए बंदर और रिहायशी बस्तियों से बचाए गए सांप व पक्षी शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच नागरिक एजेंसियों द्वारा 6,691 बंदरों का पुनर्वास किया गया जबकि वर्ष 2021 से 2024 के बीच गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न प्रजातियों के 3,339 जंगली जानवरों का पुनर्वास किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने बंदरों का पुनर्वास किया, जबकि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने सांप, पक्षी और छोटे स्तनधारी जीवों को बचाया। इन जीवों को मानव बस्तियों से बचाकर लाया गया और फिर सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित किया गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 फरवरी 2021 से पहले 23,263 बंदरों को असोला भाटी में स्थानांतरित किया जा चुका था। इसके बाद के वर्षों के आंकड़ों को मिलाकर अब अभयारण्य में पुनर्वासित बंदरों की कुल संख्या बढ़कर 29,854 हो गई है।
एनजीओ के आंकड़ों के अनुसार, कई प्रजातियों के पुनर्वास में हर साल बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। 2021 में 266 जानवरों के पुनर्वास के बाद, यह संख्या 2022 में बढ़कर 2,067 हो गई जो 2023 में घटकर 387 रह गई और 2024 में यह फिर से बढ़कर 619 तक पहुंच गई। सांपों में, भारतीय कोबरा की सबसे अधिक संख्या थी।
भाषा प्रचेता अविनाश
अविनाश
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