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Wednesday, 1 April, 2026
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दिल्ली के रिठाला में आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक, एक लड़की का शव बरामद

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(तस्वीरों के साथ जारी)

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) दिल्ली के रिठाला इलाके में बृहस्पतिवार तड़के एक झुग्गी बस्ती में भीषण आग लगने से एक नाबालिग लड़की की मौत हो गई और 100 से अधिक झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

आग लगने के बाद से लड़की लापता थी। बाद में दमकलकर्मियों ने उसका जला हुआ शव बरामद किया।

प्राधिकारियों को आग लगने की सूचना तड़के सवा चार बजे मिली। आग घनी आबादी वाली झुग्गियों में तेजी से फैल गई, जिससे निवासियों में दहशत फैल गई और वे आग की लपटों से बचने के लिए अपनी झोपड़ियों से बाहर भागने लगे।

निवासियों ने बताया कि इस झुग्गी बस्ती में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर रहते हैं और वे पास के कारखानों, निर्माण स्थलों और छोटे प्रतिष्ठानों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं।

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने आग बुझाने का अभियान बड़े पैमाने पर शुरू किया और आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 18 से अधिक गाड़ियां तैनात कीं।

आग पर काबू पाने के बाद दमकलकर्मियों ने मलबे से 17 वर्षीय लड़की का जला हुआ शव बरामद किया।

एक दमकल अधिकारी ने कहा, ‘‘आग लगने की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग ने कई झुग्गियों को पहले ही अपनी चपेट में ले लिया था।’’

अधिकारियों ने बताया कि झोपड़ियां एक-दूसरे के बहुत करीब बनी हुई थीं और उनमें से कई में प्लास्टिक की चादरें, लकड़ी के तख्ते और कपड़े जैसे अत्यधिक ज्वलनशील सामग्रियां थीं इसलिए आग तेजी से फैली।

दमकलकर्मियों और स्थानीय पुलिस कर्मियों ने बचाव अभियान चलाया और सुबह लगभग साढ़े छह बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।

अधिकारी ने कहा, ‘‘आग 100 से अधिक झोपड़ियों और पास स्थित कागज रोल एवं गत्ते के गोदाम में फैल गई तथा कुछ आवासीय फ्लैट के दरवाजे और खिड़कियां भी आग की चपेट में आ गईं। इस दौरान 17 वर्षीय लड़की का झुलसा हुआ शव बरामद किया गया। उसके शव को पुलिस ने बीएसए (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर) अस्पताल पहुंचाया।’’

पुलिस ने बताया कि लड़की की पहचान हो गई है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।

कई परिवारों ने बताया कि आग लगने पर उन्हें अपना सारा सामान छोड़कर वहां से भागना पड़ा और उनका सब कुछ जलकर राख हो गया।

आग की चपेट में आए इलाके में रहने वाले बिहार के एक मजदूर रमेश कुमार ने कहा, ‘‘आग लगते ही हम अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे। कुछ ही मिनट में सब कुछ जलकर राख हो गया। हमारी झोपड़ी, कपड़े, पैसे और दस्तावेज – सब कुछ राख हो गया।’’

पश्चिम बंगाल की एक अन्य महिला ने कहा कि आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बच्चों को जगाकर जान बचाकर बाहर भागने का मुश्किल से ही मौका मिला।

उसने कहा, ‘‘हम चीख-पुकार सुनकर जागे और हर तरफ आग थी। हम किसी तरह बच्चों को बाहर लेकर भागे। हम झोपड़ी में रखा कोई सामान नहीं बचा सके। हमारा सारा सामान जल गया।’’

कुछ निवासी इस आस में अपनी जली हुई झोपड़ियों में कुछ खोजते दिखे कि शायद उनका कुछ सामान बच गया हो।

उत्तर प्रदेश से आए गए मजदूर ने कहा, ‘‘हमने वर्षों तक मेहनत कर यह छोटी-सी झोपड़ी बनाई थी और घर का सामान जुटाया था। हमने जो कुछ कमाया था, वो कुछ ही मिनट में तबाह हो गया।’’

पुलिस ने कहा कि आग लगने के सटीक कारण का अभी पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।

भाषा सिम्मी नोमान

नोमान

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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