नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) उच्च न्यायालय ने दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा दायर एक अर्जी पर अपना आदेश बृहस्पतिवार को सुरक्षित रख लिया। इस अर्जी में 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से आपत्तिजनक ट्वीट पोस्ट करने के लिए मिश्रा के खिलाफ एक मामले में निचली अदालत के समक्ष दायर पूरक आरोप-पत्र से संबंधित कुछ प्रतियां मांगी गई थीं।
न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा, जिन्होंने पहले इस मामले में निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, ने मामले में दायर आरोप-पत्र की सुपाठ्य प्रतियों की मांग करने संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत वर्तमान में मिश्रा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उन्होंने सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। उसने मामले में मजिस्ट्रेट अदालत के समन के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के संबंध में 23 जनवरी, 2020 को अपने ‘एक्स’ हैंडल से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बयान कथित तौर पर पोस्ट किए थे।
निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
सत्र अदालत ने सात मार्च को कहा था कि वह मजिस्ट्रेट अदालत के इस विचार से ‘‘पूरी तरह सहमत’’ है कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा दायर की गई शिकायत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के संबंध में विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त है।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश
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