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Saturday, 3 January, 2026
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‘मरने पर कोई नहीं आएगा’ : इंदौर के भागीरथपुरा में पानी का संकट, बीमारियां और सिस्टम की नाकामी से जंग

दूषित पानी से इलाके में सैकड़ों लोग बीमार पड़ रहे हैं, अस्पतालों पर भारी दबाव है, दिहाड़ी मजदूरों की कमाई रुक गई है और लोग सुरक्षित पीने के पानी के लिए जूझ रहे हैं.

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इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा के पास के अस्पतालों में एक जैसे लक्षण वाले मरीज भरे पड़े हैं—दस्त, उल्टी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत—ये सभी पानी से फैलने वाली बीमारियों से जुड़े हैं. इलाके की ओर जाने वाली सड़कें खुदी हुई हैं और बड़े-बड़े पानी के टैंकरों का मोहल्ले में आना अब रोज़ का नज़ारा बन गया है.

यह इलाका शहर में पानी से फैलने वाली बीमारियों के प्रकोप का केंद्र बन गया है, जब सीवेज का पानी पीने के मुख्य पाइपलाइन में मिल गया. लोगों को पानी के गंभीर दूषण की समस्या झेलते हुए आठ दिन हो चुके हैं और फिलहाल इसका कोई अंत नज़र नहीं आ रहा है.

हाई कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर पानी के दूषण से चार मौतों की बात स्वीकार की है, हालांकि,याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मौतों की संख्या 8 से 15 के बीच हो सकती है.

गुरुवार सुबह, 70-वर्षीय किसान मधुबाई सांस लेने में तकलीफ के साथ गोलियों का एक पत्ता पकड़े सरकारी अस्पताल की ओर चल रही थीं. वह चने के खेत में काम करके थोड़ी-बहुत कमाई करती हैं और सरकार से 600 रुपये महीने की पेंशन पाती हैं.

सुनील प्रजापति, भागीरथपुरा के रहने वाले, जिन्होंने बताया कि उनकी बहन की सोमवार को पानी से फैलने वाली बीमारी से मौत हो गई | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
सुनील प्रजापति, भागीरथपुरा के रहने वाले, जिन्होंने बताया कि उनकी बहन की सोमवार को पानी से फैलने वाली बीमारी से मौत हो गई | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

वे इलाके में किराए के घर में अपनी बहन के साथ रहती हैं. साथ जाने के लिए परिवार में कोई नहीं था, इसलिए उन्हें अकेले ही अस्पताल जाना पड़ा.

उन्होंने रास्ते में दिप्रिंट से कहा, “मुझे अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं है. सड़क पर एंबुलेंस खड़ी है, लेकिन मुझे अस्पताल में भर्ती होने से बहुत डर लगता है. तीन दिन से मेरी कमाई बंद है. अगर मैं मर गई तो मुझे लेने कोई नहीं आएगा.”

उनसे कुछ ही मीटर दूर, 55 साल की एक महिला की पानी से फैलने वाली बीमारी के लक्षणों के साथ मौत हो गई.

दूषण के स्थानों का पता लगाने के लिए कई जगहों पर सड़कें खोदी गई हैं | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
दूषण के स्थानों का पता लगाने के लिए कई जगहों पर सड़कें खोदी गई हैं | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

इस प्रकोप ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को रोज़ की जद्दोजहद बना दिया है और यह दिखा दिया है कि जब सिस्टम फेल होता है तो शहर के सबसे कमजोर लोगों के लिए बुनियादी सेवाएं कितनी जल्दी टूट जाती हैं.

भागीरथपुरा की एक मेडिकल फैसिलिटी | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
भागीरथपुरा की एक मेडिकल फैसिलिटी | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

जैसे-जैसे बीमारियां फैल रही हैं और कमाने वाले सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं, परिवारों की दिहाड़ी छिन रही है. बुजुर्गों को अस्पताल जाते देखना आम हो गया है और तंग गलियों में, जहां टैंकर नहीं पहुंच पाते, वहां पीने के पानी की कीमत दोगुनी हो गई है.

भागीरथपुरा का एक निवासी अस्पताल में भर्ती | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
भागीरथपुरा का एक निवासी अस्पताल में भर्ती | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

भागीरथपुरा के रहने वाले सुनील प्रजापति ने कहा कि उन्होंने भी सोमवार को अपनी बहन खो दी. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “उस दिन पानी का स्वाद बहुत खराब और कड़वा था. हमारी बहन की मौत हो गई और हमारे इलाके के करीब आठ लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं.”

संगीता गुप्ता (45) को गुरुवार देर रात इंदौर के वर्मा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया. वह अस्पताल नहीं आना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने पहले हर संभव विकल्प आजमाया.

गुप्ता ने अस्पताल के बिस्तर से दिप्रिंट को बताया, “मैं पहले मेडिकल स्टोर गई और दवाइयां लीं. मैं एक निजी क्लिनिक भी गई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. आखिर में मुझे यहां आकर भर्ती होना पड़ा. अभी भी उल्टी और दस्त से कोई राहत नहीं है.”

इंदौर की निवासी शगुन ने कहा,“पहले वे (20 लीटर पानी की बोतल) 20 रुपये में बेचते थे. अब उन्होंने दाम दोगुने कर दिए हैं. मैं रोज़ पानी के लिए 80 रुपये नहीं दे सकती. अगर सारा पैसा पानी पर खर्च कर दूंगी तो खाऊंगी क्या?”

रात करीब 10 बजे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बाद, उनका 21-वर्षीय बेटा खाना लाने चला गया. उन्होंने कहा, “हम दिहाड़ी मजदूर हैं, हम हाथ-मुंह चलाने वाले लोग हैं. इस तरह बीमार पड़ने का खर्च हम नहीं उठा सकते.”

अगले बिस्तर पर राखा कराड़िया भर्ती हैं. वह दो दिनों से अस्पताल में हैं, लेकिन उनकी सेहत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. वे नर्स के आने का इंतजार कर रही हैं. उन्होंने कहा, “मुझे कल सुबह उल्टी और दस्त के साथ भर्ती किया गया था. हमारे मोहल्ले में हर किसी की कहानी एक जैसी है.”

संकट के बीच भागीरथपुरा के निवासी पानी की बोतलों की बढ़ी कीमतों पर चर्चा करते हुए | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
संकट के बीच भागीरथपुरा के निवासी पानी की बोतलों की बढ़ी कीमतों पर चर्चा करते हुए | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

वर्मा नर्सिंग होम में 25 मरीजों की क्षमता है. पिछले सात दिनों से यहां क्षमता से कहीं ज्यादा मरीज आ रहे हैं.

अस्पताल की नर्स शॉन दुबे ने कहा, “हम नंदा नगर अस्पताल में काम करते हैं, लेकिन हमें यहां आने को कहा गया क्योंकि हर अस्पताल में बहुत ज्यादा मरीज हैं. कुछ दिन पहले स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन अब बेहतर है. आगे धीरे-धीरे और सुधार होगा.”

पानी की कीमतों में बढ़ोतरी

शगुन (29) ने तीन दिनों के लिए 20-20 लीटर की दो पानी की बोतलें खरीदीं, उतने ही पैसे उनकी जेब ने इजाज़त दी और चौथे दिन दुकानदार ने दाम दोगुने कर दिए. वह जिस संकरी गली में रहती हैं, वहां पानी के टैंकर पहुंच नहीं पाते, जिससे समस्या और बढ़ गई.

उन्होंने कहा, “पहले वे (20 लीटर पानी की बोतल) 20 रुपये में बेचते थे. अब उन्होंने दाम दोगुने कर दिए हैं. मैं रोज़ पानी के लिए 80 रुपये नहीं दे सकती. अगर सारा पैसा पानी पर खर्च कर दूंगी तो खाऊंगी क्या?”

अब वह पास के एक घर से, जहां बोरवेल कनेक्शन है, दो बाल्टियों में पानी भर लेती हैं. सफाई के लिए वह नगर निगम की सप्लाई वाला पानी इस्तेमाल करती हैं.

भागीरथपुरा का एक नगर निगम पार्क | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
भागीरथपुरा का एक नगर निगम पार्क | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

पास वाले घर में जितेंद्र प्रजापति अपने परिवार के साथ रहते हैं. उन्हें अपने रिश्तेदारों की तरफ से एक तरह के बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है—वे उनके घर आते तो हैं, लेकिन पानी साफ होने के बावजूद नहीं पीते.

प्रजापति ने कहा, “उन्हें लगता है कि पानी पीने से वे बीमार पड़ जाएंगे, कभी-कभी तो वे अपना पानी साथ लेकर आते हैं. लोग हमारे घरों में चाय भी नहीं पी रहे हैं, मुझे बहुत बुरा लगता है.”

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भागीरथपुरा से कुल 309 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 101 को छुट्टी दे दी गई है.

भागीरथपुरा में एक पानी का टैंकर | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट
भागीरथपुरा में एक पानी का टैंकर | फोटो: नूतन शर्मा/दिप्रिंट

बाकी 208 मरीज अभी इलाज के लिए अस्पताल में हैं.

विभाग ने बताया कि 27 मरीज आईसीयू में गंभीर हालत में हैं. इलाके में कुल छह एंबुलेंस तैनात की गई हैं.

शहरी प्रशासन को मजबूत करने के सरकार के फैसले के तहत राज्य सरकार ने इंदौर नगर निगम में तीन अतिरिक्त आयुक्त—आईएएस अधिकारी आकाश सिंह, प्रखर सिंह और आशीष पाठक—तैनात किए हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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