भुवनेश्वर: जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे आभूषणों की चल रही सूची (इन्वेंट्री) अब तक 1978 के ऑडिट रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खा रही है.
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाढ़ी ने कहा कि अब तक किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है, जिससे किसी भी प्रकार की आशंकाओं पर विराम लगा है.
पाढ़ी ने बताया कि हर एक वस्तु को 1978 की सूची में दिए गए सीरियल नंबर से सावधानीपूर्वक मिलाया जा रहा है, ताकि उसकी सही पहचान और रिकॉर्ड से मेल सुनिश्चित किया जा सके.
उन्होंने कहा कि 1978 की सूची में दर्ज सभी सोने, चांदी और रत्नों के आभूषण वर्तमान जांच में पूरी तरह सही पाए गए हैं.
उन्होंने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, “एक भी गड़बड़ी सामने नहीं आई है. पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और हम खुद को इसके लिए सौभाग्यशाली मानते हैं.”
पाढ़ी के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है। हर वस्तु की फोटो ली जा रही है और 3D मैपिंग भी की जा रही है. यह सब CCTV निगरानी में और अधिकृत सेवायतों की मौजूदगी में हो रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे.
यह इन्वेंट्री 25 मार्च से शुरू हुई थी और अब तक 9 दिनों में कुल 57 घंटे 8 मिनट का काम हो चुका है. फिलहाल प्रक्रिया को रोक दिया गया है, लेकिन इसके 11 मई या उसके बाद फिर से शुरू होने की संभावना है.
इससे पहले आखिरी बार रत्न भंडार की सूची 13 मई से 23 जुलाई 1978 के बीच तैयार की गई थी, जो 72 दिनों तक चली थी. उस समय के रिकॉर्ड में 454 सोने के आभूषण (12,838 भरी) और 293 चांदी के आभूषण (22,153 भरी) दर्ज किए गए थे, जो मंदिर के भीतरी, बाहरी और चलंती कक्षों में रखे गए थे. अभी तक चलंती और बाहरी कक्षों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि भीतरी कक्ष की जांच जारी है.
गौरतलब है कि 2024 के चुनावों के दौरान वी.के. पांडियन ने आरोपों को “पूरी तरह झूठ और वोट के लिए फैलाया गया प्रचार” बताया था और कहा था कि “सच की जीत होगी और भगवान जगन्नाथ सब देख रहे हैं.”
मौजूदा जांच में अब तक सामने आए तथ्य उनके उस बयान के अनुरूप ही नजर आ रहे हैं.