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Monday, 22 April, 2024
होमदेशतेजस एक्सप्रेस की तरह चलाई जाएंगी नई ट्रेनें, पीपीपी मॉडल से विकसित होंगे रेलवे स्टेशन

तेजस एक्सप्रेस की तरह चलाई जाएंगी नई ट्रेनें, पीपीपी मॉडल से विकसित होंगे रेलवे स्टेशन

150 ट्रेनों को पीपीपी मॉडल के तहत चलाई जाएंगी. इसके लिए नीलामी और प्राइवेट पार्टनरशिप की प्रकिया चल रही है. वहीं चार रेलवे स्टेशनों को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा.

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नई दिल्ली: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2020 लोकसभा में पेश कर दिया. इस बजट में रेलवे के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणा की गई है. अपने भाषण के दौरान वित्तमंत्री ने कहा कि रेलवे में खर्चा बहुत ज्यादा है, लेकिन कमाई बहुत कम है.

वित्तमंत्री ने कहा, ‘देश के 550 रेलवे स्टेशनों को वाईफाई से जोड़ा गया है. वहीं आने वाले कुछ समय में देशभर में मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है.’

वित्तमंत्री सीतारमण ने कहा, 27 हजार किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण किया जाएगा. वहीं सोलर पावर ग्रिड रेल पटरी के किनारे बनाने का प्लान है.


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वित्तमंत्री ने कहा, बेंगलुरु में 148 किलोमीटर का उपनगरीय ट्रेन सिस्टम बनाए जाएंगे. इसके लिए कुल 18 हजार 600 करोड़ का खर्चा आएगा. इसका 20 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी. इसका विकास मेट्रो की तर्ज पर किया जाना है.

आम बजट 2020 में रेलवे के लिए बड़ी घोषणा करते हुए वित्तमंत्री ने कहा, देशभर में तेजस जैसी नई ट्रेनें जल्द ही शुरू की जाएगी. इन ट्रेनों के माध्यम से देश के पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा. इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन के काम में तेजी लाई जाएगी.

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इसके अलावा 150 ट्रेनों को पीपीपी मॉडल के तहत ट्रेने चलाई जाएंगी. इसके लिए नीलामी और प्राइवेट पार्टनरशिप की प्रकिया चल रही है. वहीं चार रेलवे स्टेशनों को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाएंगे.

कैसा था पिछला बजट

मोदी सरकार 2.0 ने अपने पहले बजट में रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की थी. पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि रेलवे को 2018 से 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरुरत होगी. वहीं उन्होंने यात्री और माल ढुलाई सेवाओं में तेजी से विकास करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी का प्रस्ताव दिया था.

वित्त मंत्री ने अपने पिछले बजट भाषण में कहा था कि एक अनुमान के अनुसार 2018-2030 के बीच रेलवे की आधारभूत संरचना के लिए 50 लाख करोड़ के निवेश की ज़रूरत है. रेलवे का पूंजीगत व्यय 1.5 से 1.6 लाख करोड़ प्रतिवर्ष है. सभी स्वीकृत योजनाओं को पूरा करने में दशकों का समय लग सकता है. इसके चलते ही ट्रेन और रॉलिंग स्टॉक्स यानी रेल इंजन, कोच व वैगन निर्माण कार्य और यात्री सेवाएं संचालित करने मे ज्यादा विकास लाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी का प्रस्ताव लाया गया है.


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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था कि रेलवे को रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के ज़रिए उपनगरीय नेटवर्क में ज्यादा निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. बजट में इसी तरह का रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम, दिल्ली-मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित किया गया है.

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने सार्वजनिक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करके मेट्रो रेलवे पहल को आगे बढ़ाने और सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा कि स्वीकृत कार्य जल्द पूरे किए जाएंगे. इसके साथ ही ट्रांसिट हब के चारों तरफ वाणिज्यिक गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड विकास की बात भी दोहराई थी.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान ही रेल बजट को आम बजट का हिस्सा कर दिया था. इसके बाद से आम बजट में ही रेल मंत्रालय संबंधित बजट और योजनाओं की घोषणा की जाती है.

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