नई दिल्ली: कश्मीर की बैसरन घाटी की रेकी करने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया GoPro Hero 12 Black कैमरा चीन स्थित एक डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा पाया गया है और यह घातक पहलगाम आतंकी हमले से एक साल से ज्यादा पहले एक्टिव किया गया था. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब लेटर रोगेटरी जारी करने की तैयारी में है क्योंकि कैमरे के एक्टिवेशन, पहली बार इस्तेमाल और उसके व्यापारिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी चीन के अधिकार क्षेत्र में आती है.
लेटर रोगेटरी एक देश की अदालत द्वारा दूसरे देश की अदालत को भेजा जाने वाला औपचारिक और कूटनीतिक अनुरोध होता है. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने इस प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है. जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने यह दर्ज किया.
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए, जब हमले की साजिश और उसे अंजाम देने से जुड़े अलग-अलग सामान और इलेक्ट्रॉनिक टूल्स की जांच की गई.
मामले की जांच करते हुए एनआईए ने अमेरिका स्थित निर्माता GoPro बी.वी. को नोटिस भेजा, ताकि कैमरे के खरीदार, आखिरी यूज़र और उससे जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड की जानकारी मिल सके.
एनआईए ने विशेष अदालत में निर्माता के जवाब का हवाला देते हुए कहा, “यह कैमरा पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में स्थित एई ग्रुप इंटरनेशनल लिमिटेड नामक डिस्ट्रीब्यूटर को सप्लाई किया गया था और कैमरा 30.01.2024 को डोंगगुआन, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में एक्टिव किया गया था.”
हालांकि, केंद्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी अभी तक कैमरे के आखिरी यूज़र के रिकॉर्ड या चीन से जम्मू-कश्मीर तक उसकी आवाजाही का पता नहीं लगा पाई है. कड़ी जोड़ने और यूज़र्स का रिकॉर्ड ढूंढने के लिए उसने जम्मू की विशेष एनआईए अदालत से चीन की अधिकारियों को औपचारिक न्यायिक अनुरोध भेजने की अनुमति मांगी.
विशेष अदालत ने एनआईए को चीन की अधिकारियों को लेटर रोगेटरी भेजने की मंजूरी दे दी और जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि लेटर रोगेटरी की सॉफ्ट कॉपी, उसके अनुवाद के साथ, म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) पोर्टल पर अपलोड की जाए.
इसके अलावा, एनआईए के जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया कि लेटर रोगेटरी की तीन हार्ड कॉपी (एक मूल और दो फोटो कॉपी), चीनी भाषा में अनुवाद के साथ, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट (आईपीसीयू) को भेजी जाए. सीबीआई की आईपीसीयू को आगे कूटनीतिक माध्यम से यह अनुरोध चीनी अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया है. सीबीआई की आईपीसीयू इकाई वैश्विक एजेंसियों और इंटरपोल से संपर्क की नोडल इकाई है.
एनआईए ने कहा कि कैमरा निर्माता ने आखिरी यूज़र के रिकॉर्ड की जानकारी न होने की सीमा बताई है.
एनआईए ने अदालत से कहा, “निर्माता ने यह भी बताया है कि उसके पास आगे की लेन-देन की जानकारी नहीं है. इस टूल का एक्टिवेशन, पहली बार यूज़ और व्यापारिक रिकॉर्ड पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के क्षेत्र में आते हैं. खरीदार, आखिरी यूज़र और तकनीकी रिकॉर्ड का पता केवल चीनी अधिकारियों की न्यायिक सहायता से ही लगाया जा सकता है, इसलिए यह आवेदन किया गया है.”
विशेष एनआईए जज ने आदेश में कहा, “मांगी गई जानकारी जब्त किए गए कैमरे की कस्टडी की कड़ी, यूज़र, जिम्मेदारी तय करने और सबूत जोड़ने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह कैमरा GoPro बी.वी. का है, जिसे चीन स्थित एई ग्रुप इंटरनेशनल लिमिटेड को सप्लाई किया गया था.” इसके बाद जज ने लेटर रोगेटरी जारी करने की मंजूरी दे दी.
जज ने आवेदन स्वीकार करते हुए सक्षम चीनी न्यायिक प्राधिकरण को लेटर रोगेटरी जारी करने का आदेश दिया, ताकि खरीदार, आखिरी यूज़र और तकनीकी रिकॉर्ड का पता लगाकर बड़ी साजिश का खुलासा किया जा सके.
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें एक नेपाली पर्यटक भी शामिल था. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. बाद में जुलाई में भारत सरकार ने संसद में बताया कि इस हमले में शामिल तीनों आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है.
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