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Sunday, 22 March, 2026
होमदेशकभी ‘शॉटकर्ट’ ना अपनाएं, नकल से अल्पकालिक लाभ लेकिन दीर्घकालिक नुकसान: मोदी ने छात्रों से कहा

कभी ‘शॉटकर्ट’ ना अपनाएं, नकल से अल्पकालिक लाभ लेकिन दीर्घकालिक नुकसान: मोदी ने छात्रों से कहा

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( तस्वीरों के साथ )

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को छात्रों को दिए अपने संदेश में कहा कि वे जीवन में कभी भी ‘‘शॉर्टकट’’ ना अपनाएं। उन्होंने नकल के प्रति भी छात्रों को आगाह किया और कहा कि इससे उन्हें अल्पकालिक लाभ तो हो सकता है लेकिन ‘‘दीर्घकालिक नुकसान’’ ही होगा।

प्रधानमंत्री ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपनी सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बच्चों पर दबाव नहीं डालें। साथ ही, उन्होंने छात्रों को अपेक्षाओं के किसी भी बोझ से बाहर निकलने के लिए अपने काम (पढ़ाई) पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।

राष्ट्रीय राजधानी के तालकटोरा स्टेडियम में ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ वार्षिक संवाद के छठे संस्करण के दौरान छात्रों से संवाद में मोदी ने कहा कि छात्रों को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री इस संवाद के दौरान छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करते हैं और तनाव तथा परीक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘नकल से किसी को एक या दो परीक्षा में तो मदद मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में जीवन में नहीं। शॉर्टकट कभी न लें। छात्रों की कड़ी मेहनत उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में हमेशा मदद करेगी। छात्रों को कई बार उन पर पड़ रहे दबाव का विश्लेषण करना चाहिए, ताकि यह देखा जा सके कि कहीं वे अपनी ताकत को कम तो नहीं आंक रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने ‘फुट ओवरब्रिज’ के बजाय रेल पटरी पार कर दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने वाले लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘शार्टकट’ आपको कहीं नहीं ले जाएगा। उन्होंने छात्रों से कहा कि शॉर्टकट उन्हें फायदा नहीं पहुंचाएगा।

उन्होंने यह उल्लेख किया कि ट्यूशन कक्षाएं संचालित करने वाले कुछ स्कूल शिक्षक अनुचित तरीकों का सहारा लेते हैं ताकि उनके छात्र परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को ये तरीके ढूंढने और नकल के लिए सामग्री तैयार करने में समय बर्बाद करने से बचना चाहिए और वह समय सीखने में व्यतीत करना चाहिए। दूसरी बात यह कि इस बदलते समय में जब हमारे आसपास का जीवन बदल रहा है, आपको हर कदम पर परीक्षा का सामना करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि इस तरह के छात्र सिर्फ कुछ परीक्षाएं उत्तीर्ण कर सकते हैं लेकिन जीवन में नाकाम हो जाते हैं।

उन्‍होंने छात्रों द्वारा ‘गैजेट्स’ के अत्यधिक इस्‍तेमाल पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि छात्रों को अपनी बुद्धिमत्ता पर भरोसा करना चाहिए, ना कि अपने मोबाइल फोन पर।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया मंचों पर बातचीत के लिए जब आप मोबाइल फोन का उपयोग करें तो इसके लिए एक अलग समय तय करें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी को खुद से अधिक स्मार्ट नहीं मानिए।’’ प्रधानमंत्री ने ध्यान भटकाने का कारण बनने वाले ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया की लत से बचने के लिए छात्रों को यह सलाह दी।

मोदी ने अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर केंद्र की आलोचना करने वालों पर तंज करते हुए कहा कि उनकी सरकार को ‘औसत’ प्रतिभा वाले लोगों से भरा बताकर मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन जिस भारत को सामान्य समझा गया, वह अब दुनिया में चमक रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा के नतीजे जीवन का अंत नहीं है। परिवार के अपेक्षाएं रखने में कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, जब ये उम्मीदें सामाजिक दिखावे से जुड़ी उम्मीदों के चलते हैं तो यह चिंतित करने वाला है। आसपास मौजूद अपेक्षाओं के दबाव के आगे झुकना सही नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि जैसे एक बल्लेबाज दर्शकों के चौके और छक्के की मांग वाली आवाजों को नजरअंदाज करते हुए फेंकी गई गेंद पर ध्यान केंद्रित करता है, उसी प्रकार छात्रों को भी अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।

मोदी ने कहा, ‘‘माता-पिता को बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं नहीं थोपनी चाहिए और छात्रों से अपनी क्षमता के अनुसार अपना आकलन करने को कहें।’’

प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे तनाव से बचने के लिए यह शेखी नहीं बघारे कि उनकी परीक्षा कितनी अच्छी रही। उन्होंने कहा कि तनाव के कारणों में से एक यह है कि ‘‘हमने अपनी परीक्षा में कितना अच्छा प्रदर्शन किया’’, इस बारे में शेखी बघारने लगते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में माता-पिता बच्चों की बातों पर विश्वास करने लगते हैं और यह बात अपने आसपास के लोगों को बताने लगते हैं। परीक्षा में अपने प्रदर्शन के बारे में गलत धारणा बनाने से बचें।’’

छात्रों द्वारा अपने दायरे का विस्तार करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, मोदी ने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के बाद कुछ स्थानों की यात्रा करने के लिए कुछ पैसे दें और उन्हें इसके बारे में लिखने के लिए कहें।

उन्होंने कहा, ‘‘बच्‍चों को घर के भीतर बंद नहीं रखना चाहिए और उन्‍हें उन गतिव‍िधियों को करने की अनुमति दी जानी चाहिए जो वे समाज में करना चाहते हैं। उन्हें समाज के विभिन्न लोगों से मिलने देना चाहिए। छात्रों को बंधनों में नहीं बांधना चाहिए। उन्हें उनका दायरा बढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि जो छात्र उनसे सवाल करते हैं, वे उनका स्वागत करें।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई छात्र प्रश्‍न करता है तो इसका अर्थ है वह उत्‍सुक है। यह अच्छा संकेत है और शिक्षकों को उनकी उत्‍सुकता को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए।’’

‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ में भाग लेने के लिए इस वर्ष रिकॉर्ड 38 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, छात्रों का पंजीकरण पिछले साल की तुलना में कम से कम 15 लाख अधिक है।

‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ का पहला संस्करण 16 फरवरी 2018 को हुआ था।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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