नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि सरकारी कर्मचारियों से संबंधित सेवा मामलों को लेकर उच्च न्यायालयों में दायर की जाने वाली गैर-जरूरी अपीलों से बचने के उपाय खोजने की जरूरत है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से यह सुनिश्चित करने में मदद करने का आग्रह किया कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) उच्च न्यायालयों में सेवा संबंधी मामलों से जुड़े लंबित मामलों को कम करने के अपने मूल दायित्व को पूरा करे।
कैट सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों पर निर्णय देता है।
सिंह ने उच्च न्यायालयों में गैर-जरूरी अपीलों से बचने के उपाय खोजने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि कैट का उद्देश्य कर्मचारियों को न्याय दिलाने में आसानी के लिए न्यायाधिकरण स्तर पर अंतिम निर्णय प्रदान करना और न्यायिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है।
यहां भारत मंडपम में कैट के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन में बोलते हुए मंत्री ने न्यायपालिका के सदस्यों से ‘न्याय प्रशासन के हित और राष्ट्र की सेवा में’ न्यायाधिकरण में कार्यभार संभालने के लिए स्वेच्छा से आगे आने का आग्रह किया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने अपने उद्घाटन भाषण में न्याय तक पहुंच को आसान बनाने और उच्च न्यायालयों का बोझ कम करने में कैट की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति गवई ने प्रस्ताव दिया कि सरकारी विभाग आगे के मुकदमों पर निर्णय लेने से पहले मामलों की समीक्षा के लिए नोडल कार्यालय स्थापित करें।
उन्होंने न्यायाधिकरणों के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस के निर्माण के साथ-साथ मामलों के वर्गीकरण और निर्णयों के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग की पैरवी की।
अपने स्वागत भाषण में कैट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोरे ने नियमित अदालतों से अलग न्यायाधिकरण की विशिष्ट भूमिका और आवश्यकताओं के बारे में बात की।
भाषा
संतोष प्रशांत
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