(कोमल पंचमाटिया)
मुंबई, 13 जनवरी (भाषा) शक्ति सामंत के बेटे आशीष सामंत का कहना है कि उनके पिता ने ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, लेकिन इन फिल्मों की प्रशंसा और सफलता के बावजूद, उन्हें पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा नहीं गया।
मंगलवार को अपने पिता की 100वीं जयंती पर सिनेमा में उनके योगदान को याद करते हुए, आशीष सामंत ने कहा कि निर्देशक एक बहुमुखी कहानीकार थे, जो विभिन्न विधाओं के बीच सहजता से काम करते थे, चाहे वह उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘बहू’ हो, क्राइम थ्रिलर ‘हावड़ा ब्रिज, रोमांटिक थ्रिलर ‘चाइना टाउन’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ हों या रोमांटिक फिल्में जैसे ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कश्मीर की कली’।
आशीष ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘मेरे पिता पद्मश्री या पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान के पूरी तरह हकदार थे। मुझे बताया गया है कि ऐसी चीज़ों के लिए राजनीतिक स्तर पर सिफ़ारिश करनी पड़ती है। वह ऐसे व्यक्ति नहीं थे, जो ऐसी चीजों की मांग करते। अगर उन्हें खुद ये सम्मान मिल जाते तो ठीक था, लेकिन उन्होंने खुद इसकी मांग नहीं की थी। अगर उनका यही रवैया था, तो वह बिल्कुल सही रवैया था।’
नौ अप्रैल 2009 को 83 वर्ष की आयु में शक्ति सामंत का निधन हो गया था। वह अपने दौर के शीर्ष निर्देशकों में से एक थे, जो सामाजिक विषयों जैसे समाज में महिलाओं की दुर्दशा, लालच और भ्रष्टाचार पर आधारित अपनी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों के लिए जाने जाते थे। इन फिल्मों में शानदार संगीत और अशोक कुमार, मधुबाला, शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर और राजेश खन्ना जैसे कलाकारों ने काम किया।
भाषा तान्या दिलीप
दिलीप
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