बैतूल, 22 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक निजी स्कूल की पांचवीं कक्षा की छात्रा ने स्कूल बस में न बैठाये जाने पर वाहन के आगे धरना दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि छात्रा के अभिभावकों ने स्कूल परिवहन की बकाया राशि कथित तौर पर जमा नहीं की थी, जिस कारण उसे बस में नहीं बैठने दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, छात्रा करीब तीन घंटे तक बस के सामने बैठी रही, जिसे बाद में पुलिस ने समझा बुझाकर उठाया।
पुलिस ने बताया कि यह घटना चिचोली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम चूनाहजूरी में गत शनिवार की है।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। चिचोली थाना प्रभारी हरिओम पटेल ने बताया कि उन्हें जैसे ही स्कूल बस के सामने बच्ची के धरना देने की सूचना मिली, वह स्वयं मौके पर पहुंचे।
पटेल ने बताया कि उन्होंने बच्ची के माता-पिता को कहा था कि अगर वे गरीब हैं तो वह उनकी फीस जमा करने को तैयार हैं लेकिन इस तरह से बाकी के बच्चों को स्कूल जाने से नहीं रोका जा सकता।
उन्होंने बताया, “मेरे समझाने के बाद बच्ची को उन्होंने बस के सामने से उठवाया और बस को रवाना किया।”
पांचवीं कक्षा की छात्रा सुरभि के पिता दुर्गेश यादव ने बताया कि शनिवार को स्कूल बस गांव में आई और सभी बच्चों को बस में बिठाया लेकिन उनकी बेटी को बैठाने से मना कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उनकी बच्ची बस के सामने ही धरने पर बैठ गई। यादव ने बताया कि सुरभि का चिचोली स्थित गुरुसाहब पब्लिक स्कूल में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत प्रवेश हुआ है।
सुरभि की मां आशा यादव ने कहा कि बच्ची तनाव में थी क्योंकि उसे बस में नहीं बैठाया गया था इसलिए वह बस के सामने ही बैठ गई थी।
उन्होंने कहा, “बच्चों के साथ इस तरह से भेदभाव नहीं करना चाहिए।”
इस बारे में जब गुरुसाहब स्कूल के प्राचार्य अमित यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत छात्रा को स्कूल में दाखिला मिला है, इसलिए स्कूल में वह नि:शुल्क पढ़ रही है।
उन्होंने दावा किया कि छात्रा के स्कूल बस परिवहन का बकाया किराया ही करीब 40 से 42 हजार रुपये तक पहुंच गया है, जो कि उनके परिजनों ने अब तक जमा नहीं किया है।
प्राचार्य ने आरोप लगाया कि शनिवार को जब बस गांव में पहुंची थी तो दुर्गेश यादव ने स्कूल बस के संचालक के साथ मारपीट भी की।
उन्होंने दावा किया कि दुर्गेश यादव की बड़ी बेटी भी उनके ही स्कूल में ही पढ़ती थी, जिसका करीब डेढ़ लाख रुपये और स्कूल बस का शुल्क भी जमा नहीं किया गया है।
भाषा सं ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र
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