बालाघाट, सात फरवरी (भाषा) पाकिस्तान की जेल से सात साल बाद भाई की वापसी पर खुशी जताते हुए मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की एक महिला ने शनिवार को उसकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और सरकार से उसके उपचार में मदद देने की गुहार लगाई।
प्रसन्नजीत रंगारी (38) पाकिस्तान के लाहौर स्थित कोट लखपत जेल (सेंट्रल जेल) में सात साल तक कैद रहा। रिहाई के बाद उसे शुक्रवार को बालाघाट से करीब 32 किलोमीटर दूर उनके गांव खैरलांजी लाया गया।
रंगारी की बहन संगमित्रा ने बताया कि भाई की काफी हद तक याददाश्त चली गई है और उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद भाई की रिहाई के प्रयास कर रही थीं।
जिला कलेक्टर मृणाल मीणा ने संवाददाताओं से कहा कि यदि परिवार प्रसन्नजीत के इलाज के लिए सहायता चाहता है तो आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
रंगारी ने शनिवार को अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वह जबलपुर से दिल्ली ट्रेन से गया था। वह पाकिस्तान कैसे पहुंचा, इस बारे में उसने कभी ट्रेन तो कभी किसी अन्य वाहन से जाने की बात कही।
उसने बताया कि जेल में उसे दिन में दो बार रोटी दी जाती थी। वहीं अपने जीजा से बातचीत में उसने कहा कि उसे मांसाहार भी दिया जाता था। रंगारी अपनी बहन और जीजा राजेश खोब्रागढ़े को पहचान रहा है।
खोब्रागढ़े ने बताया कि प्रसन्नजीत ने जेल में रहते हुए गिरे हुए पत्तों की सफाई का काम सौंपे जाने की बात कही।
खोब्रागढ़े ने पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विक्रम देशमुख, अधिवक्ता कपिल फुले, कलेक्टर मृणाल मीणा और पुलिस अधीक्षक का आभार जताया, जिन्होंने संगमित्रा के प्रयासों में सहयोग किया।
उन्होंने बताया कि प्रसन्नजीत वर्ष 2017-18 में घर से लापता हो गया था। दिसंबर 2021 में परिवार को फोन के जरिए जानकारी मिली कि वह पाकिस्तान की जेल में कैद है।
रंगारी उन छह भारतीय कैदियों में शामिल है, जिन्हें 31 जनवरी को पाकिस्तान ने रिहा किया। अमृतसर पुलिस की हिरासत में रहने के बाद उसे मध्यप्रदेश लाया गया।
भाषा सं दिमो
धीरज
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