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Sunday, 8 February, 2026
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भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के लिए मोदी को इस्तीफा देना चाहिए: सिद्धरमैया

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बेंगलुरु, आठ फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रविवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाया है और किसानों की आजीविका को कमजोर किया है। उन्होंने मोदी से इस्तीफा देने की मांग की।

सिद्धरमैया ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “एक ऐसा प्रधानमंत्री जो देश पर दबाव डालता है, किसानों की आजीविका को कमजोर करता है और भारत की गरिमा को नुकसान पहुंचाता है, वह पद पर नहीं रह सकता। भारत की संप्रभुता और आत्म-सम्मान को हुए नुकसान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।’’

सिद्धरमैया के अनुसार, मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित अंतरिम व्यापार समझौता बराबर और निष्पक्ष बातचीत से नहीं हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह अमेरिका द्वारा भारत के व्यापार और ऊर्जा विकल्पों पर “शुल्क संबंधी धमकियों, दबावकारी रणनीतियों और सार्वजनिक चेतावनियों” के बाद किया गया और ऐसे दबाव के सामने झुकना कूटनीति नहीं बल्कि ‘‘समर्पण’’ है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इन शर्तों को स्वीकार करके नरेन्द्र मोदी ने भारत की स्वतंत्रता को कमजोर और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को कमतर किया है।’’

सिद्धरमैया ने कहा कि यह ढांचा गहराई से असमान है क्योंकि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगभग 18 प्रतिशत शुल्क जारी रखेगा, जबकि भारत पर अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य करने और अन्य बाधाओं को हटाने का दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह दावा किया जा रहा है कि भारत 500 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं का आयात करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि यह ढांचा अमेरिकी किसानों और ग्रामीण अमेरिका के लिए लाभकारी होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही, भारतीय कृषि को भारी नुकसान होगा। भारतीय किसानों को सस्ते और सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी, जिससे 72 करोड़ किसानों और खेत मजदूरों की आजीविका को खतरा होगा। यह मुक्त व्यापार नहीं है, बल्कि आर्थिक दबाव है।’’

सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि भारत ने इन शर्तों को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मोदी ने भारत को कमजोर स्थिति में ला दिया, जहां देश की सुरक्षा से ज्यादा अपनी सुरक्षा मायने रखती है।

उन्होंने कहा कि अरबपति उद्योगपति और मोदी के ‘‘करीबी मित्र गौतम अदाणी’’ से जुड़े मामले अमेरिका की अदालतों में चल रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के नाम जेफ्री एप्सटीन फाइलों में सामने आए हैं। इस दावे को विदेश मंत्रालय ने पहले ही खारिज कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का वैश्विक सम्मान उन नेताओं ने बनाया जिन्होंने दबाव के समय दृढ़ता दिखाई और सिद्धांत तथा साहस के माध्यम से नैतिक नेतृत्व दिया।

सिद्धरमैया ने याद दिलाया कि स्वर्गीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के जरिए भारत की स्वतंत्रता की रक्षा की। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव के बावजूद पाकिस्तान को निर्णायक रूप से दो हिस्सों में विभाजित किया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मनमोहन सिंह ने वैश्विक आर्थिक मंदी के समय भारत को आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए संभाला। उन्होंने कहा कि यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी ने भी परमाणु परीक्षण के समय साहस दिखाया।

सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी ने इस परंपरा को तोड़ दिया, विदेश नीति को नारेबाजी, आयोजनों और व्यक्तिगत छवि निर्माण तक सीमित कर दिया।’’ उन्होंने कहा कि जब वास्तविक दबाव राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से आया, तब ‘‘चुप्पी साध ली गई।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की किताब से सामने आए खुलासों के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चीन को संभालने पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो महत्वपूर्ण समय में कमजोर राजनीतिक नेतृत्व की ओर इशारा करते हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वही चुप्पी तब भी रही जब डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने का श्रेय लिया।’’

उन्होंने कहा कि यह घटनाओं की एक श्रृंखला नहीं, बल्कि व्यापार, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में स्पष्ट ‘‘समर्पण’’ है।

भाषा

अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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