नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) श्रीलंका में स्थिति बहुत नाजुक है तथा प्रदर्शनकारियों पर कोई भी सैन्य कार्रवाई समग्र माहौल को और खराब कर सकती है। यह चेतावनी बुधवार को रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने दी।
उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि श्रीलंका में राजनीतिक अराजकता से बचा जाए और सभी हितधारकों को राजनीतिक स्थिरता बहाल करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
राजपक्षे ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया और घंटों बाद उन्होंने सेना तथा पुलिस को देश में कानून और व्यवस्था बहाल करने के लिए जो कुछ भी आवश्यक हो, करने का आदेश दिया।
वर्ष 2009 से 2013 तक श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में कार्य करने वाले अशोक के. कंठ ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘इस समय स्थिति बहुत अनिश्चित है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक अराजकता से बचा जाए, लेकिन साथ ही सेना और पुलिस के किसी भी हस्तक्षेप से स्थिति और खराब हो सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘स्थिति बहुत कठिन है। लेकिन आज जिस चीज की आवश्यकता है वह वास्तव में श्रीलंका के संविधान की सीमा के भीतर किसी प्रकार की राजनीतिक स्थिरता की बहाली है।’
कंठ ने कहा, ‘यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे श्रीलंका के भीतर ही होने की जरूरत है और भारत सहित अन्य देशों के लिए बहुत कम भूमिका है।’
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए कि राजनीतिक स्थिति स्थिर हो।
कंठ ने कहा, ‘इसे जितनी जल्दी हो सके स्थिर होना चाहिए क्योंकि राजनीतिक स्थिरता के बिना, श्रीलंका की सरकार के लिए अभूतपूर्व आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना बहुत मुश्किल होगा।’
विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव अनिल वाधवा ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा, ‘ यह हमारे हित में होगा कि भारत में कोई शरणार्थी प्रवाह न हो क्योंकि इससे दूसरे किस्म का संकट पैदा हो सकता है।’
वाधवा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से श्रीलंका के लिए ‘तत्काल राहत पैकेज’ दिए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘जितनी जल्दी नयी सरकार बनेगी, यह श्रीलंका के लिए उतना ही बेहतर है क्योंकि यह प्रमुख मुद्दों का समाधान कर सकती है।’
पूर्व राजनयिक ने समग्र स्थिति पर भारत के रुख की भी सराहना की।
कोलंबो में बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में, भारत ने रविवार को कहा कि वह लोकतांत्रिक साधनों, स्थापित संस्थानों और संवैधानिक ढांचे के माध्यम से समृद्धि और प्रगति की आकांक्षाओं में श्रीलंकाई लोगों के साथ खड़ा है।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर एस डी मुनि ने कहा कि अगले कुछ महीनों में श्रीलंका के लिए चीजें आसान नहीं होंगी।
कंठ ने कहा कि भारत ने श्रीलंका की काफी उदारता से मदद की।
भाषा नेत्रपाल नरेश
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