(फोटो के साथ)
शिलॉन्ग, छह फरवरी (भाषा) मेघालय पुलिस ने एक अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। बृहस्पपतिवार को इस विस्फोट में 18 लोगों की जान चली गई है। वहीं, मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने जोर देकर कहा है कि उनकी सरकार इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आई. नोंगरांग ने कहा कि इन दो लोगों की गिरफ्तारी के अलावा घटना के संबंध में एक तीसरे व्यक्ति की भी पहचान की गई है और मामले में जांच की जा रही है।
पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के सुदूरवर्ती थांगस्कू इलाके में एक अवैध कोयला खदान में बृहस्पतिवार को हुए विस्फोट में कम से कम 18 खनिक मारे गए थे और आठ अन्य घायल हो गए थे।
घायल हुए आठ खनिकों में से सात की पहचान हो चुकी है। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि इनमें से चार नेपाल से, दो असम से और एक स्थानीय नागरिक है। उन्होंने बताया कि इन सभी का शिलॉन्ग के अस्पतालों में इलाज हो रहा है।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।’’
इस बीच मुख्यमंत्री ने दो कैबिनेट मंत्रियों को घटनास्थल का दौरा करने, अधिकारियों से मिलने तथा राहत एवं बचाव और कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और खनन विभाग के अधिकारी पहले से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं।
संगमा ने कहा कि पुलिस को इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं और चेतावनी दी है कि अवैध खनन गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खनन की शुरुआत के साथ खनिकों से उम्मीद की जाती है कि वे वैध खनन लाइसेंस के लिए आवेदन करें और यह विकल्प अब उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अब नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से तीन-तीन लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
मलबे में अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका के मद्देनजर शुक्रवार सुबह नौ बजकर 55 मिनट पर खोज एवं बचाव अभियान फिर से शुरू किया गया और कई एजेंसियों को सेवा में लगाया गया।
एक अधिकारी ने बताया कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की दो टीम, एक विशेष बचाव दल (एसआरटी) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तीन टीम घटनास्थल पर तैनात की गई हैं।
जोवाई और शिलॉन्ग से अतिरिक्त चिकित्सा दल जुटाए गए हैं, जिनमें से सात एंबुलेंस जोवाई से भेजी गई हैं।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भी इस अभियान में सहायता के लिए एक डिप्टी कमांडेंट, 15 कर्मियों, नर्सिंग स्टाफ के साथ दो एंबुलेंस और दो चिकित्सकों को भेजा है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने कहा कि बचाव अभियान में घटनास्थल पर मौजूद सभी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है और घायलों के इलाज के लिए चिकित्सा सहायता को मजबूत किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य जारी रहने के कारण सेना और वायु सेना को भी तैयार रखा गया है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और एसडीएमए स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खनिकों की मौत पर दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया और घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि तथा प्रत्येक घायल के लिए 50,000 रुपये दिये जाने की घोषणा की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगमा से बात की और उन्हें जारी बचाव कार्यों के लिए केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
मेघालय उच्च न्यायालय ने इस घटना से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए पूर्वी जयंतिया हिल्स के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अवैध खनन में शामिल खदान मालिकों एवं संचालकों की पहचान करने तथा उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और की गई कार्रवाई का विवरण देने के लिए भी तलब किया है।
इस घटना ने राज्य में अवैध कोयला खनन के मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2014 में मेघालय में अवैध कोयला खनन और अन्य अवैज्ञानिक खनन पद्धतियों पर प्रतिबंध लगा दिया था, साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान और सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के परिवहन पर भी रोक लगा दी थी। प्रतिबंध के बावजूद राज्य में हाल के वर्षों में कोयला खदानों में कई घातक दुर्घटनाएं हुई हैं।
राज्य सरकार ने कहा है कि अब खनन केवल वैज्ञानिक और विनियमित प्रक्रियाओं के तहत ही किया जाएगा और खनिकों से उचित लाइसेंस प्राप्त करने और कानूनी ढांचे के भीतर ही काम करने का आग्रह किया गया है।
‘रैट-होल’ खनन (हाथ से खनन) में श्रमिकों के प्रवेश और कोयला निकालने के लिए संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं जो आमतौर पर तीन से चार फुट ऊंची होती हैं। इन क्षैतिज सुरंगों को ‘‘रैट-होल’’ कहा जाता है क्योंकि एक सुरंग में मुश्किल से एक व्यक्ति ही समा पाता है।
भाषा सुरभि पवनेश
पवनेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
