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Monday, 15 July, 2024
होमदेशमिलिए उन 5 जजों से जो मोदी सरकार और कॉलेजियम की खींचतान के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने

मिलिए उन 5 जजों से जो मोदी सरकार और कॉलेजियम की खींचतान के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने

5 जजों की पदोन्नति का प्रस्ताव दिसंबर में भेजा गया था, सरकार ने पिछले सप्ताह नियुक्तियों को मंजूरी दी थी. नई नियुक्तियों के साथ ही, SC में अब 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में से 32 जज हो जाएंगे.

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नई दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नए जजों को शपथ दिलाई. ये नियुक्तियां न्यायपालिका के लिए शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा भेजी गई सिफारिशों को मंजूरी देने में सरकार द्वारा देरी के बीच आई है.

सुप्रीम कोर्ट में शामिल होने वाले पांच न्यायाधीशों में राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, पी.वी. संजय कुमार, मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मनोज मिश्रा.

हालांकि पांचों की पदोन्नति का साझा प्रस्ताव दिसंबर में भेजा गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने गुरुवार को नियुक्तियों को हरी झंडी दे दी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार शाम उनके नियुक्ति के वारंट पर हस्ताक्षर किए, जिससे सोमवार को उनके शपथ ग्रहण समारोह का मार्ग प्रशस्त हो गया.

नए लोगों को शामिल किए जाने के साथ, शीर्ष अदालत में अब 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में से 32 जज हो जाएंगे. सरकार के पास शीर्ष अदालत में नियुक्तियों से जुड़ी दो और फाइलें हैं. एससी कॉलेजियम ने 31 जनवरी को सरकार को दो प्रस्ताव भेजे थे.

मित्तल और मिश्रा की पदोन्नति के साथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय से चार न्यायाधीश होंगे, जो कि सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व के मामले में दिल्ली के बाद दूसरा हाईकोर्ट होगा.

दिप्रिंट ने सुप्रीम कोर्ट के पांच नए जजों की प्रोफाइल तैयार की है.

पंकज मित्तल

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कामर्स ग्रेजुएट, पंकज मित्तल ने मेरठ कॉलेज से कानून का अध्ययन किया और 1985 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में एनरोल हुए. उन्होंने उसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपनी प्रेक्टिस शुरू की और 2006 में बेंच के लिए एडिशनल जज के रूप में पदोन्नत होने के पहले यूपी आवास एवम् विकास परिषद और डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा के लिए स्थायी वकील के रूप में काम किया.

जनवरी 2021 में, मित्तल को जम्मू और कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. पिछले अक्टूबर में, उन्हें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के लिए राजस्थान ले जाया गया था.


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संजय करोल

सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला के पूर्व छात्र, संजय करोल ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून में डिग्री प्राप्त करने से पहले इतिहास में स्नातक किया. 1986 में एक वकील के रूप में एनरोलमेंट के साथ करोल ने सुप्रीम कोर्ट में बड़े पैमाने पर प्रेक्टिस की और अंतर-राज्यीय जल विवाद (बीबीएमबी परियोजना) में हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने 1998 से 2003 तक राज्य के महाधिवक्ता के रूप में संवैधानिक कर्तव्यों का भी निर्वहन किया.

मार्च 2007 में, उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के 11 साल बाद, करोल को नवंबर 2018 में त्रिपुरा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. एक साल बाद, उन्हें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था.

मई 2020 में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद, करोल की पदोन्नति की वजह से शीर्ष अदालत में फिर एक बार आखिरकार हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का एक न्यायाधीश हो जाएगा.

पी.वी. संजय कुमार

आंध्र प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता पी.वी. संजय कुमार ने कॉमर्स में स्नातक किया और फिर 1988 में दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकन करने के बाद, वह अपने पिता के कार्यालय से जुड़ गए और कानून की विभिन्न शाखाओं में अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में सरकारी वकील के रूप में काम किया और अगस्त 2008 में उन्हें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.

2019 में, कुमार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्होंने 14 अक्टूबर, 2019 को न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला. अंत में, उन्होंने 14 फरवरी, 2021 को मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.

कुमार आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व करेंगे. इस राज्य के अंतिम न्यायाधीश जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में सेवा की, वे भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना थे, जो नवंबर 2022 में सेवानिवृत्त हुए थे.

अहसानुद्दीन अमानुल्लाह

विज्ञान में स्नातक अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पटना लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री पूरी की. 1991 में उन्होंने बिहार स्टेट बार काउंसिल में नामांकन करवाया. मुख्य रूप से उन्होंने पटना हाईकोर्ट में प्रेक्टिस की लेकिन इसके अलावा वह कलकत्ता, झारखंड, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी कभी-कभी पेश होते रहे. 2006 में बिहार सरकार के स्थायी वकील के रूप में नामित, अमानुल्लाह, उसके बाद राज्य के महाधिवक्ता बने. अदालत ने उन्हें कई महत्वपूर्ण मामलों में एमिकस क्यूरी के रूप में सहायता करने के लिए बुलाया था, और दलसिंहसराय (समस्तीपुर) फायरिंग इंक्वायरी कमीशन के समक्ष जिला प्रशासन के लिए भी उपस्थित हुए.

अमानुल्लाह को जून 2011 में पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. 10 साल की सेवा के बाद, उन्हें 10 अक्टूबर, 2021 को आंध्र उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन 20 जून, 2022 को पटना उच्च न्यायालय में फिर से स्थानांतरित कर दिया गया था. इससे पहले शीर्ष अदालत में सेवा देने वाले पटना हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा थे, जो 18 अगस्त, 2021 को सेवानिवृत्त हुए थे.

मनोज मिश्रा

2011 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, मनोज मिश्रा ने 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा पूरी की. उन्होंने सिविल, राजस्व और आपराधिक सहित कानून के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेक्टिस की. उन्हें नवंबर 2011 में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.

मिश्रा पांच नए नियुक्त हुए जजों में से एक हैं जो कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में सात साल का लंबा कार्यकाल पूरा करेंगे. उम्मीद इस बात की भी है कि वह सर्व-शक्तिशाली नियुक्ति पैनल – कॉलेजियम – का भी हिस्सा होंगे, जो उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करता है.

(अनुवाद एवं संपादनः शिव पाण्डेय)
(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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