नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस हफ्ते मेडिकल कॉलेजों की जांच में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर 10 राज्यों में 15 जगहों पर छापेमारी की.
यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा कथित सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने और अगस्त में रायपुर की एक अदालत में दायर चार्जशीट के बाद हुई. चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और नामी विश्वविद्यालयों के चांसलर व रजिस्ट्रारों का एक नेटवर्क बनाया गया था, जो घूस लेकर मेडिकल कॉलेजों को फेवरबल इंस्पेक्शन रिपोर्ट दिलाने में लगा था.
जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल कॉलेज इंस्पेक्शन की प्रक्रिया में बड़े सिस्टमेटिक खामियां थीं, जैसे जांच की तारीखें और इंस्पेक्शन टीमों के नाम जैसी गोपनीय जानकारी गुजरात के एक “भरोसेमंद” बिचौलिए के जरिए उन कॉलेजों तक पहुंचाई जाती थी जो घूस देने को तैयार थे.
इस केस के केंद्र में है रायपुर का श्री रावतपुरा सरकार इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च (SRIMSR). मेडिकल कॉलेजों की जांच का काम नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के तहत आने वाली स्टैच्यूटरी बॉडी मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) करती है.
सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए ईडी ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कॉलेजों व उनसे जुड़े व्यक्तियों के 15 ठिकानों पर छापे मारे. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, इनमें से सात जगहें सीबीआई की एफआईआर में भी शामिल थीं.
सीबीआई ने कुल 12 आरोपियों को चार्जशीट में नामजद किया है, जिनमें रायपुर का मेडिकल इंस्टिट्यूट, उसके चेयरमैन, विवादित ‘गोडमैन’ रवि शंकर जी महाराज और डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी शामिल हैं. चार्जशीट में रवि शंकर जी महाराज को “साजिश का मुख्य सूत्रधार और मार्गदर्शक” बताया गया है, जबकि तिवारी ऑपरेशन संभालते थे.
उदयपुर की गीतांजलि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मयूर रावल जिन्होंने कथित तौर पर गोपनीय जानकारी पहुंचाने में मदद की को एजेंसी ने ‘आरोपी नंबर 1’ बनाया है.
नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा कॉन्ट्रैक्ट की गई एक निजी कंपनी के प्रोजेक्ट हेड आर. रंदीप नायर को चार्जशीट में आरोपी नंबर 2 बताया गया है.
इन दोनों को और चार अन्य को जिनमें तीन असेसर्स भी शामिल हैं, जिन्होंने 30 जून को रायपुर कॉलेज का इंस्पेक्शन कर घूस के बदले फेवरबल रिपोर्ट दी, सीबीआई ने जुलाई में गिरफ्तार किया था.
चार्जशीट में कहा गया है, “श्री रवि शंकर जी महाराज साजिश के मुख्य सूत्रधार और मार्गदर्शक थे. उनके निर्देश पर, श्री अतुल कुमार तिवारी ने श्री मयूर रावल से असेसमेंट की तारीख और असेसर्स के नाम जैसी गोपनीय जानकारी पहले से जुटाने के लिए संपर्क किया.”
चार्जशीट में यह भी लिखा गया: “उन्होंने घूस की रकम को 50 लाख से घटाकर 30 लाख करने पर निर्देश दिए. इसके अलावा, श्री रवि शंकर जी महाराज ने अतुल कुमार तिवारी और डॉ. अतिन कुंडू को इंस्पेक्शन की तैयारी के लिए कहा जिसमें घोस्ट फैकल्टी और फर्जी मरीजों की व्यवस्था करना भी शामिल था, ताकि एनएमसी की आवश्यकताएं पूरी दिखाई जा सकें.”
अनधिकृत एक्सेस, एक ‘गुजरात बिचौलिया’
यह मामला तब सामने आया जब सीबीआई को जानकारी मिली कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों, एनएमसी, कुछ बिचौलियों और मेडिकल कॉलेजों के मैनेजमेंट के बीच बड़े स्तर पर सांठगांठ हो रही है, जिससे इंस्पेक्शन प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है.
एजेंसी को सूचना मिली थी कि स्वास्थ्य मंत्रालय के कुछ कर्मचारी, जिनमें एक कर्मचारी चंदन कुमार भी शामिल है, गोपनीय जानकारी जैसे आवेदन की स्थिति और प्रस्तावित इंस्पेक्शन की तारीखें गीतांजलि यूनिवर्सिटी के रावल को दे रहे थे और रावल यह जानकारी आगे कॉलेजों तक पहुंचा रहे थे.
इस जानकारी और 30 जून को रायपुर मेडिकल कॉलेज की जांच के आधार पर, सीबीआई ने जाल बिछाया और असेसरों तथा उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया और कुल 55 लाख रुपये नकद बरामद किए.
चार्जशीट (जिसकी प्रति दिप्रिंट ने देखी है) के अनुसार, रावल ने टेकइंफी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड रंदीप नायर का इस्तेमाल किया था, जो एनएमसी में तैनात थे.
एजेंसी ने आरोप लगाया कि नायर के पास उस अवधि में एनएमसी के असेसमेंट मॉड्यूल तक अनधिकृत पहुंच थी, और वह निर्धारित इंस्पेक्शन और इंस्पेक्टरों की लिस्ट से जुड़ी जानकारी कॉलेजों को भेज रहे थे.
सीबीआई ने आगे कहा कि यह एक्सेस अप्रैल की बैठक में लिए गए फैसले के बावजूद जारी रही, जिसमें तय हुआ था कि सिस्टम इंटीग्रेटर या पोर्टल चलाने वाली निजी कंपनी का कोई भी व्यक्ति एप्लिकेशन या असेसमेंट मॉड्यूल तक पहुंच नहीं रखेगा. असेसमेंट मॉड्यूल 23 मई से लागू हुआ था.
MARB की तय प्रक्रिया (चार्जशीट में दी गई) के अनुसार, किसी मेडिकल कॉलेज द्वारा MBBS सीटें बढ़ाने या नया कॉलेज शुरू करने की मंजूरी के लिए जो आवेदन भेजा जाता है, उसे सबसे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय के अंडर-सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी द्वारा जांचा जाता है.
इसके बाद डिप्टी सेक्रेटरी उस आवेदन का मूल्यांकन करते हैं, अंडर-सेक्रेटरी द्वारा पास की गई फाइल या बताई गई कमियों के आधार पर. इनके क्लियरेंस के बाद आवेदन MARB डायरेक्टर तक पहुंचता है, जो या तो प्रक्रिया शुरू करता है और एक “ड्यू डेट” तय करता है, जिसके भीतर असेसमेंट पूरा होना है, या फिर कमी होने पर कॉलेज मैनेजमेंट को शो-कॉज नोटिस भेजता है.
सीबीआई चार्जशीट के अनुसार, जहां केवल MARB डायरेक्टर अनुपम अनीश चौहान को ही असेसमेंट पोर्टल तक अधिकृत पहुंच थी, वहीं नायर ने असेसरों और इंस्पेक्शन वाले कॉलेजों से बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाले डिफॉल्ट ईमेल एड्रेस तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर रखी थी.
चार्जशीट में एजेंसी ने कहा, “श्री आर. रंदीप नायर, प्रोजेक्ट हेड, टेकइंफी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने SITEAM यूज़र क्रेडेंशियल्स का उपयोग करते हुए एनएमसी के असेसमेंट मॉड्यूल को अनधिकृत रूप से एक्सेस किया. ऐसा करके उन्होंने मेडिकल कॉलेजों की आने वाली इंस्पेक्शनों से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की, जिसमें संभावित तारीखें और एसआरआईएमएसआर, रायपुर से जुड़े असेसरों के यूनिक रेफरेंस नंबर शामिल थे.”
‘48 घंटे पहले इंस्पेक्शन की तारीख बताने के लिए 50 लाख रुपये’
सीबीआई ने चार्जशीट में कहा कि रावतपुरा मेडिकल कॉलेज 2024 में शुरू हुआ था और उसे MBBS कोर्स में 150 सीटों की मंजूरी मिली थी. कॉलेज ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए सीटें बढ़ाकर 250 करने के लिए आवेदन किया था.
अंतिम आवेदन स्वास्थ्य मंत्रालय के निचले स्तर के अधिकारियों से होते हुए MARB डायरेक्टर तक पहुंचा, जिन्होंने 25 जून को 30 जून की तारीख को इंस्पेक्शन के लिए तय किया.
उसी दिन, तय प्रक्रिया के अनुसार, चार असेसर, डॉ. मंजप्पा सी.एन., डॉ. पी. रजनी रेड्डी, डॉ. अशोक शेल्के और डॉ. चैतरा एम.एस. को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड के किसी एक राज्य में मेडिकल कॉलेजों की सीट बढ़ाने के लिए होने वाले असेसमेंट का निमंत्रण मिला.
MARB के नियमों के मुताबिक, असेसरों को कॉलेज का नाम केवल इंस्पेक्शन से एक रात पहले बताया जाता है. कॉलेज को भी इंस्पेक्शन की जानकारी उसी दिन सुबह दी जाती है. कॉलेज को पहले से इंस्पेक्शन और असेसरों की पहचान की जानकारी नहीं दी जानी चाहिए और असेसरों को भी तय समय से पहले यह नहीं बताया जाना चाहिए कि उन्हें किस कॉलेज में जाना है.
लेकिन चार्जशीट में सीबीआई ने आरोप लगाया कि ये दोनों नियम तोड़े गए.
सीबीआई का कहना है कि रावतपुरा कॉलेज मैनेजमेंट को इंस्पेक्शन की जानकारी कम से कम चार दिन पहले मिल गई थी और असेसरों की पहचान भी कम से कम तीन दिन पहले मिल गई थी.
एजेंसी के अनुसार, यह साजिश 22 मई से शुरू हुई, जब कॉलेज के एक डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी ने गुजरात की वाइटैलिटी हेल्थकेयर के डॉ. पंकज नथवानी से संपर्क किया. नथवानी ने उन्हें गांधीनगर स्थित स्वामीनारायण इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SIMSR) के स्वामी भक्तवत्सल दासजी के पास भेजा.
तिवारी ने 26 मई को उनसे कॉलेज के असेसमेंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहले से जानने की बात की. भक्तवत्सल दासजी ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये मांगे ताकि वे इंस्पेक्शन की तारीख 48 घंटे पहले बता दें और 250 सीटें मंजूर कराने में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद करें.
तिवारी ने यह “रेट” लगभग 2 से 3 लाख रुपये प्रति सीट, रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन रवि शंकर जी महाराज को बताया. उन्होंने यह भी कहा कि “गुजरात का एक आदमी” एनएमसी में अच्छे संपर्क रखता है और काम करा सकता है. वह रावल का ज़िक्र कर रहा था, पर नाम नहीं लिया. तिवारी ने यह भी बताया कि भक्तवत्सल दासजी ने अपने कॉलेज के लिए खुद 50 लाख रुपये दिए थे.
लेकिन रवि शंकर और तिवारी ने 100 सीटों के लिए 2 करोड़ रुपये को बहुत महंगा माना. इसलिए दोनों ने रकम घटाकर 30 लाख रुपये पर लाने का फैसला किया.
रिश्वत घटाने पर तिवारी और रवि शंकर और तिवारी और रावल के बीच तीन दिन तक बातचीत चली. इसी दौरान रावल ने कथित तौर पर 30 लाख रुपये में 48 घंटे पहले इंस्पेक्शन की तारीख और असेसरों के नाम देने पर सहमति जताई.
तिवारी को पहली सूचना 20 जून को मिली, जब रावल ने कथित तौर पर बताया कि इंस्पेक्शन जून के आखिरी हफ्ते में होगा. तिवारी ने यह जानकारी रवि शंकर को दे दी.
इसके बाद 26 जून को रावल ने तिवारी को बताया कि इंस्पेक्शन 30 जून को होगा और कॉलेज को 1 जुलाई को पेश होने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है.
रावल नोटिस के बारे में कुछ नहीं कर सकता था, क्योंकि डील सिर्फ इंस्पेक्शन की जानकारी देने की थी. पूरी 35 लाख की डील में यह काम भी शामिल होता, तिवारी ने कथित तौर पर रवि शंकर को बताया.
सीबीआई ने चार्जशीट में तिवारी और रवि शंकर के बीच की एक्स्ट्रैक्टेड व्हाट्सएप चैट भी शामिल की है.
26 जून को, रावल ने कथित तौर पर रात 10:40 बजे नायर से गोपनीय जानकारी ली और 11:05 बजे तिवारी को 30 जून के इंस्पेक्शन की जानकारी दे दी.
अगले दिन तिवारी ने कथित तौर पर रवि शंकर को बताया कि असेसरों की पहचान उस रात भेज दी जाएगी.
एजेंसी ने दावा किया कि नायर ने 26-27 जून को MARB का असेसमेंट मॉड्यूल अवैध रूप से इस्तेमाल किया, जो लॉग्स की ऑडिट में साबित हुआ.
इंस्पेक्शन पता लगते ही, कॉलेज मैनेजमेंट ने बाहर से डमी फैकल्टी बुलाकर उन्हें कॉलेज की फैकल्टी के रूप में दिखाया. मरीजों की भीड़ दिखाने के लिए आसपास के गांवों से लोगों को बुलाया गया और उन्हें 150 रुपये प्रति व्यक्ति दिए गए.
चार्जशीट में एजेंसी ने कहा, “इन सभी कामों का मकसद सिर्फ एनएमसी असेसरों को यह दिखाना था कि SRIMSR के पास 150 से 250 सीटें बढ़ाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ मौजूद है. नकली फैकल्टी को स्थायी स्टाफ दिखाकर और गांव वालों को मरीज बनाकर कॉलेज ने झूठा माहौल तैयार किया ताकि उन्हें पॉज़िटिव असेसमेंट रिपोर्ट मिल सके.”
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज मैनेजमेंट ने असेसरों को प्रभावित किया और 55 लाख रुपये सतीशा ए. को दिए, जिन्होंने कथित तौर पर डॉ. मंजप्पा सी.एन. और डॉ. चैतरा एम.एस. की तरफ से रिश्वत ली.
रकम हवाला चैनल के जरिए दी गई, जिसे श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट के एक पूर्व ट्रस्टी ने व्यवस्थित किया था.
लेकिन जब चैतरा एम.एस. के पति सतीशा के बेंगलुरु वाले घर से रिश्वत लेने आए, तो सीबीआई ने उन्हें कार में 16.62 लाख रुपये के साथ पकड़ लिया.
सीबीआई ने चार्जशीट में कहा, इसके बाद सतीशा के घर की तलाशी में बाकी के 38.38 लाख रुपये भी बरामद हुए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: दुबई एयर शो क्रैश पर हंगामा और नाराज़गी नहीं, समझदारी भरे विश्लेषण की जरूरत है
