नई दिल्ली: बुधवार तड़के पुरानी दिल्ली में तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) द्वारा चलाए गए तोड़फोड़ अभियान के दौरान विरोध प्रदर्शन और पथराव हुआ. मौके पर रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की बटालियनों की भारी तैनाती थी. पुलिस ने बताया कि चार से पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं.
माना जाता है कि 100 साल से ज्यादा पुरानी फैज़-ए-इलाही मस्जिद उन जगहों में से एक थी, जहां दिल्ली धमाके का आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी 10 नवंबर की दोपहर गया था. कुछ ही घंटों बाद, उसके द्वारा चलाई जा रही आई20 कार रेड फोर्ट के पास फट गई थी, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी.
संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि शांति बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने, जिसमें जिला पुलिस भी शामिल है, अमन कमेटी के सदस्यों और अन्य स्थानीय हितधारकों के साथ कई समन्वय बैठकें की थीं.
पथराव की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और मस्जिद परिसर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.
सेंट्रल जिला के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस निधिन वल्सन ने कहा कि मस्जिद के आसपास करीब 100 लोग जमा हो गए थे. उन्होंने कहा, “पथराव की घटना में चार-पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं.”
मौके पर मौजूद बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया.
वल्सन ने बताया कि एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 221 (लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालना), 132 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग), 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए चोट या गंभीर चोट पहुंचाना), 191 (2 और 3) (दंगा), 223 (A) (लोक सेवकों के आदेशों की अवहेलना), 3(5) (सामान्य उद्देश्य) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम, 1984 की धाराओं के तहत दर्ज की गई है.
उन्होंने आगे कहा कि अब तक खुफिया जानकारी के आधार पर पूछताछ के लिए पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और सीसीटीवी फुटेज से भी मिलान किया जा रहा है.
30,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ यह तोड़फोड़ कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा एमसीडी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), शहरी विकास मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किए जाने के कुछ घंटे बाद हुई. यह नोटिस मस्जिद सैयद फैज़ इलाही की प्रबंध समिति द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया था. मस्जिद समिति ने एमसीडी के उस तोड़फोड़ आदेश को चुनौती दी थी, जो नवंबर 2025 में आए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के पालन में जारी किया गया था.
मस्जिद समिति की ओर से हाईकोर्ट में पेश हुए वकील इरशाद हनीफ ने कहा कि अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली थी और मौखिक रूप से कहा था कि इस पर विचार की ज़रूरत है और कोई भी कार्रवाई याचिका के नतीजे पर निर्भर करेगी.
हनीफ ने दिप्रिंट से कहा, “जब हाईकोर्ट का आदेश अभी अपलोड भी नहीं हुआ था, तो रात के सन्नाटे में तोड़फोड़ करने की इतनी जल्दी क्या थी? क्या कोई राष्ट्रीय सुरक्षा आपात स्थिति थी, जैसे भारत-पाकिस्तान युद्ध, जिसकी वजह से तड़के तुरंत कार्रवाई ज़रूरी थी? यह कुछ नहीं, बल्कि ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली सोच का प्रतीक है.”
22 दिसंबर के अपने आदेश में एमसीडी ने दर्ज किया था कि मस्जिद से जुड़े उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड बताते हैं कि एलएंडडीओ ने फरवरी 1940 की लीज के तहत मस्जिद को केवल 0.195 एकड़ ज़मीन आवंटित की थी.
एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया, “प्रबंध समिति, मस्जिद सैयद फैज़ इलाही या दिल्ली वक्फ बोर्ड के पक्ष में संबंधित जमीन के स्वामित्व या कानूनी कब्ज़े को साबित करने वाला कोई भी दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया गया है. इसके अलावा, किसी भी तरह से मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान का इस्तेमाल शादी स्थल या क्लिनिक के रूप में नहीं किया जा सकता. यह सार्वजनिक भूमि का खुला दुरुपयोग है. उपरोक्त को देखते हुए, 0.195 एकड़ से अधिक भूमि पर बना कोई भी ढांचा अतिक्रमण है और उसे हटाया जाना चाहिए.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
