Wednesday, 5 October, 2022
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मॉरीशस जासूसी कांड- भारत के ‘मूंछ वाले आदमी’ को लेकर क्यों मचा हुआ है बवाल

मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर बने हुए है जो भारतीय तकनीकी टीम को वहां के संवेदनशील इंटरनेट सेंटर तक पहुंचने की अनुमति देने को लेकर उन पर ‘बड़े पैमाने पर राष्ट्रद्रोह’ का आरोप लगा रहे हैं.

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नई दिल्ली: मॉरीशस में गत जून से ही खासे बवाल की वजह बना जासूसी कांड—जिसने भारत को लपेट लिया है—अब नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है. इस द्वीप राष्ट्र में विपक्षी दल प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ पर ‘बड़े राष्ट्रद्रोह’ का आरोप लगा रहे हैं. इसके साथ ही जगन्नाथ के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है.

इस बीच, पिछले हफ्ते मीडिया में आई भारत के एक खास ‘मूंछ वाले व्यक्ति’ की तस्वीर सुर्खियों में छाई है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह उस भारतीय तकनीकी टीम का नेतृत्व कर रहा था, जो मॉरीशन में अत्यधिक संवेदनशील इंटरनेट लैंडिंग स्टेशन तक पहुंची थी.

इंटरनेट लैंडिंग स्टेशन मॉरीशस के ऐतिहासिक लैंडमार्क बाई-डु-जैकोटेट में एक निषिद्ध क्षेत्र में स्थित है और बवाल इस बात को लेकर मचा हुआ है कि प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने जिस भारतीय टीम को वहां तक पहुंचने की अनुमति दी, वह कथित तौर पर वहां ‘जासूसी’ उपकरण लगाने गई थी ताकि मॉरीशस के इंटरनेट ट्रैफिक पर नजर रखी जा सके.

यद्यपि पीएम जगन्नाथ ने इस बात को तो स्वीकारा है कि भारत के तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम को बाई-डु-जैकोटेट तक पहुंच मुहैया कराई गई, लेकिन उनका दावा है कि वहां कोई जासूसी उपकरण नहीं लगाया गया है.

नई दिल्ली ने अब तक यही रुख अपना रखा है कि पीएम जगन्नाथ ने जो कहा वह भारत के बारे में स्थिति को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त है.

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मॉरीशस के बाई-डु-जैकोटेट स्थित इंटरनेट लैंडिंग स्टेशन न केवल एक महत्वपूर्ण इंटरनेट हब है, जिस पर मॉरीशस का पूरा द्वीप निर्भर है, बल्कि एसएएफई (यानी सेफ या सुदूर पूर्व दक्षिण अफ्रीका) पनडुब्बी केबल नेटवर्क का भी हिस्सा है. 13,500 किलोमीटर का ये सबमरीन फाइबर ऑप्टिक केबल दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, फ्रांस में ला रीयूनियन, भारत और मलेशिया को जोड़ता है.

शनिवार को, ‘मूंछ वाले व्यक्ति’ के मामले पर एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद दो पूर्व प्रधानमंत्रियों सहित मॉरीशस के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के सदस्यों ने मीडिया में बयान जारी किए और मॉरीशस के प्रधानमंत्री को तुरंत पद से हटाने को कहा.

मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता नवीन रामगुलाम ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पीएम जगन्नाथ ने ‘संसद और मॉरीशस से झूठ बोला है.’

राम गुलाम ने कहा, ‘उन्होंने देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. यह स्पष्ट तौर पर मॉरीशस के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रद्रोह जैसा कृत्य है…मैं अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ भी बात करूंगा. प्रविंद जगन्नाथ के पास एक ही विकल्प है कि इस्तीफा दें या लोगों को सत्ता लौटाएं. नहीं तो मॉरीशस के लोगों को कमान खुद अपने हाथ में लेने के लिए आगे आना होगा. सभी को साथ आने की जरूरत है.’

इस मामले में भारत का हाथ होने की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर हम ऐसा नहीं करते, तो वे हमारे डेटा की जासूसी वाला उपकरण बनाएंगे.’

मॉरीशस रेडियो स्टेशन रेडियो प्लस को शुक्रवार को दिए एक फ्री-व्हीलिंग इंटरव्यू में मॉरीशस टेलीकॉम (एमटी) के पूर्व सीईओ शेरी सिंह—जो इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं—ने कहा कि सर्वे के लिए बाई-डु-जैकोटेट के लैंडिंग स्टेशन पहुंची भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे एक व्यक्ति की मूंछें थीं लेकिन उसकी पहचान अब तक उजागर नहीं हो पाई है और इसलिए इंटरव्यू के दौरान शेरी सिंह ने उसे ‘मूंछ वाला आदमी’ कहा.

गौरतलब है कि वो शेरी सिंह ही थे, जिन्होंने एमटी के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद इस माह के शुरू में मीडिया को इंटरव्यू दिए थे और उसके बाद से ही द्वीप राष्ट्र में हंगामा मचा हुआ है. पूर्व एमटी सीईओ ने दावा किया था कि पीएम जगन्नाथ ने भारतीय खुफिया सेवाओं को बाई-डु-जैकोटेट स्टेशन पर उपकरण लगाने की अनुमति दी थी, जो इंटरनेट ट्रैफिक ले जाने के लिए समुद्र के अंदर से गुजरने वाले केबल से डेटा एकत्र करने में सक्षम है.

मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी दल मॉरीशस मिलिटेंट मूवमेंट (एमएमएम) के सदस्य पॉल बेरेन्जर ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार को स्पष्ट तौर पर सामने आना चाहिए और मॉरीशस की जनता को यह बताना चाहिए कि भारतीय टीम उस संवेदनशील क्षेत्र में क्या सर्वे करने गई थी.

बेरेंजर ने आरोप लगाया, ‘सर्वेक्षण उनके अपने उपकरणों का इस्तेमाल करके किया गया था जबकि वे कई इंटरनेट लिंक से जुड़े थे जो हमारे पास सेफ केबल पर हैं…इसके पीछे इरादा स्थायी तौर पर (वहां) एक जासूसी उपकरण लगाना था.’


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मॉरीशस सरकार का आरोपों से इनकार

इस माह के शुरू में संसद में एक सत्र के दौरान पीएम जगन्नाथ ने कहा कि मॉरीशस के राजनीतिक समुदाय का एक वर्ग जानबूझकर भारत को इस मामले में घसीट रहा है और अपने खुद के ‘विघटनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत को कोसने’ में लिप्त है.

लेकिन मामला शुक्रवार को तब और बिगड़ गया, जब एमटी के पूर्व मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) गिरीश गुड्डोय की एक तकनीकी रिपोर्ट मीडिया के जरिये सामने आई जिसमें शेरी सिंह के दावों की पुष्टि की गई थी.

इस रिपोर्ट—जिसे मॉरीशस सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है—में दावा किया गया कि एक भारतीय टीम को सेफ केबल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान की गई थी, इसने अपने खुद के उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए वहां से डेटा कैप्चर किया और एक बार डेटा लेने के बाद टूल हटा दिए गए.

सरकार ने यह तकनीकी रिपोर्ट खारिज करते हुए इस तरह के आरोपों का पुरजोर तरीके से खंडन किया, और इसे सरकार को अस्थिर करने की एक चाल बताया.

मॉरीशस के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री बॉबी हुर्रेराम ने शनिवार को वहां प्रेस से बातचीत में कहा, ‘सब कुछ कानूनी तौर पर किया गया था. इस मामले में पुलिस जांच चल रही है और सच्चाई सामने आ जाएगी.’

हुर्रेराम, जिन्होंने आईटी मंत्री दीपक बालगोबिन के साथ मीडिया को संबोधित किया, ने कहा कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ होता तो वो ये सुनिश्चित करती कि सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाएं, जिसमें टीम और ‘मूंछ वाले आदमी’ की तस्वीरें कैद हुई हैं. साथ ही उन्होंने इस तथ्य की ओर इशारा किया कि तकनीकी रिपोर्ट पर कोई अधिकृत हस्ताक्षर नहीं है.

उन्होंने कहा कि यह पूरा विवाद ‘सरकार को अस्थिर करने की साजिश’ है और यहां के आम लोगों के ‘दिमाग में जहर घोलने’ की कोशिश की जा रही है.

मॉरीशस के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्राधिकरण (आईसीटीए) के पूर्व अध्यक्ष अशोक राधाकिसून ने दिप्रिंट को बताया कि सेफ केबल एक इंटरनेट गेटवे है, जो मॉरीशस की राष्ट्रीय सुरक्षा की लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा, ‘यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम आउटलेट है. (जैकोटेट) द्वीप पर अवैध घुसपैठ हुई है. मैं इसे एक अहम फैसिलिटी सुविधा कहता हूं. पीएम ने खुद स्वीकारा है कि उन्होंने भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ टीम को एक्सेस देने के निर्देश दिए थे.’

राधाकिसून, जो एक स्वतंत्र वकील भी हैं, ने कहा, ‘सरकार को जवाब देना होगा कि सर्वे क्यों किया गया था? वह कौन-सा जोखिम था जिसके लिए तकनीकी टीम को बुलाया गया? उस फैसिलिट के अंदर छह घंटे तक उनकी पहुंच रही और हमें नहीं पता कि उन्होंने किस प्रोटोकॉल का पालन किया और उन्हें क्या पता लगाना था.’

उन्होंने कहा, ‘मॉरीशस के लोग भारत का सम्मान करते हैं लेकिन यहां की आबादी का एक वर्ग अब उसका आलोचक बनने लगा है. हमारी घरेलू राजनीति में भारत का जरूरत से ज्यादा दखल हो रहा है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां  क्लिक करें.)


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