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Wednesday, 11 February, 2026
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बंगाल में एसआईआर सुनवाई के बाद व्यक्ति की मौत; तृणमूल ने निर्वाचन आयोग, भाजपा को दोषी ठहराया

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कोलकाता/जयनगर, चार जनवरी (भाषा) अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद एसआईआर सुनवाई के लिए पेश हुए 68 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद राजनीतिक घमासान शुरू हो गया।

कोलकाता में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद व्यक्ति जब सुनवाई के लिये पेश हुआ, उस वक्त उसकी नाक में कैनुला लगा हुआ था।

तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चिंता को उनकी मौत का कारण बताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आरोप को ‘नाटक’ करार दिया।

दक्षिण 24 परगना के जयनगर में उत्तर ठकुरेचक इलाके के निवासी नजीतुल मुल्ला की शनिवार रात मौत हो गई।

मुल्ला के परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्हें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित सुनवाई का नोटिस जब मिला था, वह सांस संबंधी बीमारियों का इलाज करा रहे थे।

उन्होंने बताया कि मुल्ला की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 20 दिसंबर को कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुल्ला के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम न मिलने के बाद उनके घर पर एसआईआर सुनवाई का नोटिस भेजा गया।

उन्हें 28 दिसंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, और परिवार के अनुसार, अपनी खराब स्थिति के बावजूद वह 31 दिसंबर को सुनवाई केंद्र में पेश हुए थे।

घर लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उन्हें दो जनवरी को उसी अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया। परिवार ने बताया कि डॉक्टरों ने शनिवार रात उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिवार का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े डर और मानसिक तनाव ने उनकी हालत और बिगाड़ दी। मुल्ला के एक रिश्तेदार ने दावा किया, ‘एसआईआर ने उन्हें हमसे छीन लिया।’

तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि राज्य में कम से कम 56 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनका कारण एसआईआर को लेकर कथित चिंता, तनाव या आत्महत्या बताया गया है। पार्टी ने इन मौतों के लिए सीधे तौर पर भाजपा और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है।

तृणमूल के स्थानीय नेताओं ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और निर्वाचन आयोग पर ‘अपारदर्शी’ पुनरीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से भय का माहौल बनाने का आरोप लगाया।

तृणमूल के एक स्थानीय नेता ने कहा, ‘‘एसआईआर प्रक्रिया के डर से कई लोगों की मौत हो चुकी है। अब जयनगर भी इस सूची में शामिल हो गया है। यह सब भाजपा की गरीब लोगों को डराने-धमकाने और उनके मताधिकार को छीनने की साजिश के कारण हो रहा है।’’

भाजपा ने इन आरोपों को “राजनीति से प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया। भाजपा के एक स्थानीय नेता ने कहा, ‘‘एसआईआर पूरे भारत में मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है। तृणमूल इन मौतों का राजनीतिक लाभ उठाने और भाजपा को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।’’

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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