scorecardresearch
Thursday, 25 April, 2024
होमदेश'छावला रेप-मर्डर केस में रिहा शख्स हत्या मामले में गिरफ्तार'- रिव्यू पिटीशन में पुलिस ने SC को बताया

‘छावला रेप-मर्डर केस में रिहा शख्स हत्या मामले में गिरफ्तार’- रिव्यू पिटीशन में पुलिस ने SC को बताया

अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि 'आरोपी एक सख्त अपराधी है' और 'समाज के लिए खतरा' है.

Text Size:

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बुधवार को पिछले साल नवंबर में 2012 के छावला सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन लोगों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपनी समीक्षा याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की है.

याचिका में कहा गया है कि विनोद के रूप में पहचान किए जाने वाले आरोपियों में से एक को अब हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

बुधवार को दायर आवेदन में दावा किया गया है कि बरी होने के बाद, विनोद ने कथित तौर पर एक ‘निर्दोष ऑटो चालक की तब हत्या कर दी, जब उसने आरोपी द्वारा लूट के प्रयास का विरोध किया गया.’

इस मामले में 26 जनवरी को द्वारका थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी और मामले में विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आवेदन में कहा गया है, ‘उसकी रिहाई के बाद हत्या करना जाहिर करती है कि आरोपी एक सख्त अपराधी है, जिसने माननीय न्यायालय के उपकार का दुरुपयोग किया है.’

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

इसमें यह भी कहा गया है कि, ‘आरोपी विनोद द्वारा किया गया कृत्य साफतौर से दिखाता है कि वह एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति है और वास्तव में पूरे समाज के लिए खतरा है और किसी भी तरह की नरमी का पात्र नहीं है’, और यह कि, ‘विनोद को जघन्य अपराध की आदत है और वह समाज में रहने दिए जाने के लायक नहीं है.’

इसलिए अर्जी में मांग की गई है कि उच्चतम न्यायालय विनोद को बरी किए जाने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर छावला सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए विचार करे.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस अर्जी का जिक्र करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ओपन अदालत में सुनवाई और मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की मांग की.

जवाब में, भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक पीठ का गठन करने पर सहमति व्यक्त की है और मेहता को आश्वासन दिया है कि वह एक ओपन अदालत की सुनवाई के अनुरोध पर विचार करेंगे. आम तौर पर, चैंबर में एक समीक्षा याचिका पर निर्णय वकीलों की उपस्थिति के बिना न्यायाधीशों द्वारा लिया जाता है, जब तक कि अदालत इसे ओपन कोर्ट में सुनने के लिए सहमत न हो.


यह भी पढ़ें: CM योगी और अखिलेश के अपने-अपने दावे, क्या लोकसभा चुनाव में UP में ‘चमत्कार’ होगा


सजा और रिहाई

सामूहिक बलात्कार और हत्या की तारीख 9 फरवरी 2012 की है, जब 19 वर्षीय लड़की और उसके सहयोगी गुरुग्राम में साइबर हब से घर लौट रहे थे -जहां वह डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम करती थी. कथित तौर पर तीन लोग उसके पास आए और उसे एक लाल टाटा इंडिका में खींच लिया. दिल्ली एचसी के फैसले के अनुसार, यह घटना दिल्ली के कुतुब विहार इलाके में पीड़िता के घर से ज्यादा दूर नहीं हुई थी.

उसके सहयोगियों ने तुरंत पुलिस और परिवार को सूचित किया था, जिन्होंने छावला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 फरवरी 2012 को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से दो उन्हें हरियाणा के रेवाड़ी के रोदई गांव ले गए, जहां से उन्होंने उसी दिन लड़की का क्षत-विक्षत शव बरामद किया.

कथित तौर पर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसे प्रताड़ित किया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उस पर शराब की बोतलों और मेटल की चीजों से हमला किया गया था और उसके सिर पर चोट, जलने के निशान और उसके निजी अंगों पर चोट से घाव थे. रिपोर्टों ने यह भी सामने लाया है कि उसकी आंखों और चेहरे पर तेजाब डाला गया था.

दिल्ली की एक अदालत ने 2014 में तीनों लोगों को अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया था और मौत की सजा सुनाई थी. उसी वर्ष, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन लोगों को ‘प्रशिक्षित शिकारी कुत्ते’ और ‘यौन मनोरोगी’ बताते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा था.

हालांकि, पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों – राहुल, रवि और विनोद को ‘संदेह का लाभ’ दिया और कहा था कि निचली अदालत की सुनवाई ‘कई स्पष्ट चूक’ से भरी थी. दिल्ली पुलिस ने पिछले साल दिसंबर में फैसले को चुनौती देते हुए एक समीक्षा याचिका दायर की थी.


यह भी पढ़ें: दिल्ली HC ने महिला आरोपियों की न्यायिक या पुलिस हिरासत में वर्जिनिटी टेस्ट को बताया असंवैधानिक 


 

share & View comments