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Wednesday, 14 January, 2026
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माघ मेला: एकादशी पर 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी

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(तस्वीरों सहित)

प्रयागराज, 14 जनवरी (भाषा) प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति से पूर्व बुधवार को एकादशी के अवसर पर शाम तक 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार रात 12 बजे से ही स्नान शुरू हो गया था और मकर संक्रांति से पूर्व बुधवार शाम तक 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया।

उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर शाम तक यह आंकड़ा एक करोड़ से अधिक पहुंच सकता है। माघ मेला के 800 हेक्टेयर क्षेत्र को सात सेक्टर में बांटा गया है। मेला क्षेत्र में 25 हजार से अधिक शौचालय स्थापित किए गए हैं और 3,500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं।

अग्रवाल ने बताया कि कम अवधि के कल्पवास के इच्छुक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए माघ मेले में ‘टेंट सिटी’ बसाई गई है, जहां ध्यान और योग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए ‘बाइक टैक्सी’ और ‘गोल्फ कार्ट’ की व्यवस्था की गई है और अब तक 1.10 लाख से अधिक लोग ‘बाइक टैक्सी’ का लाभ उठा चुके हैं।

पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई थी, जबकि माघ मेला-2024 में पौष पूर्णिमा के अवसर पर 28.95 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था।

मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि भीड़ प्रबंधन और सुगम यातायात के मद्देनजर इस बार 42 अस्थायी पार्किंग स्थल तैयार किए गए हैं, जिनमें एक लाख से अधिक वाहनों के पार्क होने की व्यवस्था है।

उन्होंने बताया कि माघ मेला 2025-26 में कुल 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है, जहां वस्त्र बदलने के कक्ष सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मेला अधिकारी के अनुसार माघ मेले में गंगा में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कानपुर स्थित गंगा बैराज से प्रतिदिन 8,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

दारागंज में कर्मकांड कराने वाले पंडित रविशंकर मिश्रा ने बताया कि बुधवार को षट्तिला एकादशी है और इस दिन छह प्रकार से तिल का प्रयोग किया जाता है। इस अवसर पर काले तिल और काली गाय के दान का विशेष महत्व है।

उन्होंने बताया कि एकादशी का मुहूर्त बुधवार रात नौ बजे से बृहस्पतिवार दोपहर डेढ़ बजे तक है, हालांकि स्नान की दृष्टि से बृहस्पतिवार को पूरे दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल माना जाएगा।

भाषा राजेंद्र जितेंद्र खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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