Thursday, 11 August, 2022
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‘कोविड पीक’ के समय एलएनजेपी में हो सकती है स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, 150 डॉक्टरों को मिली है परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टी

दिल्ली सरकार द्वारा रविवार को जारी किए गए स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक एलएनजेपी में कोविड-19 के कुल मामलों की संख्या 732 है. इनमें से 37 मरीज आईसीयू और दो वेंटिलेटर पर हैं.

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) के 150 के करीब रेज़िडेंट डॉक्टरों को उनकी परीक्षा के लिए 15 दिन की छुट्टी दी गई है. ऐसे में इस बात का डर है कि जब कोविड-19 अपने चरम पर होगा तो यहां स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी हो सकती है.

एक स्टडी के अनुसार जून-जुलाई में कोविड-19 से संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ने की संभावना है.

दिल्ली के कोविड डेडिकेटिड अस्पतालों में शामिल एलएनजेपी राज्य सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल है. मेडिकल काउसिंल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) द्वारा दी गई 30 जून की देशव्यापी मेडिकल परीक्षा की डेडलाइन के मुताबिक यहां भी परीक्षा होनी है. इसकी वजह से 600 डॉक्टरों वाले इस अस्पताल के रोस्टर पर और भार पड़ सकता है.

एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार और दो अन्य स्वास्थ्यकर्मी शनिवार को कोविड पॉज़िटिव पाए गए. जिसके बाद पीएन पांडे को नया निदेशक नियुक्त किया गया है. शनिवार की घटना से डॉक्टरों में इस बात का डर है कि अन्य स्वास्थ्य कर्मियों में भी वायरस फैला होगा.

डॉक्टरों की कमी का कारण दिल्ली सरकार का एक आदेश भी है जिसके तहत एलएनजेपी का एक पूरा बैच दिल्ली के ज़िलों में ज़मीनी स्तर पर काम कर रहा है. हालांकि, नए निदेशक के तौर पर एलएनजेपी से जुड़ने वाले पीएन पांडे का कहना है की अभी परीक्षा की कोई ज़रूरत नहीं थी.

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उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बात का भरोसा है कि इस महामारी के चरम पर होने की स्थिति में भी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी नहीं होगी क्योंकि 30 जून तक परीक्षा समाप्त हो जाएगी.’

इस विषय पर दिप्रिंट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी मेल, फोन और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन स्टोरी प्रकाशित होने तक तक उनका कोई जवाब नहीं आया है.

दिल्ली सरकार द्वारा रविवार को जारी किए गए स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक एलएनजेपी में कोविड-19 के कुल मामलों की संख्या 732 है. इनमें से 37 मरीज आईसीयू और एक वेंटिलेटर पर हैं. दिल्ली के अन्य अस्पतालों की तुलना में एलएनजेपी पर कोविड के मरीज़ों का काफ़ी ज़्यादा भार है.

डॉक्टरों की कमी से जूझ सकता है एलएनजेपी

कई डॉक्टरों ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा अप्रैल के दूसरे हफ्ते में जारी किया गया एक ऑर्डर एलएनजेपी में डॉक्टरों की कमी का बड़ा कारण है. ऑर्डर के तहत एलएनजेपी के रेज़िडेंट डॉक्टरों के 2019-2022 वाले बैच को अस्पताल की जगह दिल्ली के तमाम ज़िलों में कोविड ड्यूटी पर लगाया गया है.


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एक सीनियर रेज़िडेंट डॉक्टर ने कहा, ‘दिल्ली सरकार के आदेश के बाद हमें लोगों की कमी की आशंका थी. हमने इसे लेकर चिंता ज़ाहिर की लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.’ उनकी चिंता को और बढ़ाने का काम भारत में मेडिकल शिक्षा के वॉचडॉग एमसीआई के एक निर्देश ने किया. निर्देश के मुताबिक सभी मेडिकल कॉलेजों को 30 जून तक अपने यहां परीक्षा करवा लेनी है.

एलएनजेपी के रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन का कहना है कि इस परीक्षा में 150 डॉक्टरों के एक पूरे बैच को शामिल होना पड़ेगा जिससे संख्या बल में कमी आएगी.

इसके अलावा एलएनजेपी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक कम से कम 31 डॉक्टर और 30 नर्स
कोविड पॉज़िटिव पाए गए हैं. इनमें से 8 से 10 पिछले दो हफ़्तों में पॉज़िटिव हुए हैं. डॉक्टरों को भय है कि उनमें फैल रही बीमारी भी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का बड़ा कारण बन सकती है. क्वारेंटाइन पॉलिसी में हुए बदलाव ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है.

18 मई क्वारेंटाइन से जुड़ी नई पॉलिसी आई. एलएनजेपी के रेज़िडेंट वेलफेयर (आरडीए) एसोसिएशन प्रेसिडेंट
पर्व मित्तल ने कहा कि कोविड का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को पहले रोटेशन आधार पर क्वारेंटाइन पर भेजा जाता था. ऐसे में दो हफ्ते की कोविड ड्यूटी के बाद उन्हें दो हफ्ते के लिए क्वारेंटाइन होना पड़ता था.

अब सिर्फ हाई रिस्क वालों को क्वारेंटाइन पर भेजा जाता है. उन्होंने कहा, ‘ये ठीक नहीं है. लो रिस्क वालों को भी क्वारेंटाइन पर भेजा जाना चाहिए क्योंकि जो भी कोविड ड्यूटी कर रहे हैं उसपर बराबर का खतरा है.’ पर्व मित्तल समेत उनके सहकर्मियों का कहना है कि इन सभी कारणों से उनके अस्पताल में मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है.

इस विषय में एलएनजेपी के आरडीए ने 27 मई को अपने मेडिकल निदेशक को एक पत्र लिखा. पत्र में एमडी-एमएस की परीक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी का विषय उठाया गया है. पत्र में मांग की गई है कि जिस बैच को दिल्ली सरकार ने हॉस्पिटल के बाहर कोविड ड्यूटी में लगा रखा है, उसे वापस बुलाया जाए.


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दिप्रिंट से बातचीत में नए मेडिकल निदेशक पांडे ने भरोसा जताया कि डॉक्टरों की कमी नहीं होगी. हालांकि, उन्होंने दोहराया कि अभी परीक्षा ज़रूरी नहीं थी.

पांडे ने कहा, ‘एक तरफ जहां यूपीएससी तक की परीक्षाएं रोक दी गईं, तमाम स्कूल-कॉलेज बंद हैं. कहीं कोई परीक्षा नहीं हो रही. ऐसे में एमडी-एमएस की परीक्षाओं की घोषणा नहीं करनी चाहिए थी.’

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि जिन रेज़िडेंट डॉक्टरों को परीक्षा में शामिल होना है उन्हें ऑफ ड्यूटी कर दिया गया है और तैयारी के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. उनके मुताबिक इस महीने के अंत तक इन रेज़ीडेंट्स की परीक्षाएं समाप्त हो जाएंगी और कोविड के चरम की स्थिति में भी लोगों की कमी नहीं होगी.

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