उडुपी (कर्नाटक) फरवरी (भाषा) कर्नाटक में आखिरी नक्सली बतायी जा रही लक्ष्मी ने रविवार को उडुपी की उपायुक्त विद्या कुमारी और पुलिस अधीक्षक अरुण के के सामने रविवार को बिना शर्त समर्पण किया।
पुलिस के अनुसार लक्ष्मी आंध्र प्रदेश में छिपी हुई थी और उसपर उडुपी जिले में कुंदापुर तालुक के अमासेबेल और शंकरनारायण थानों में तीन मामले दर्ज हैं। ये मामले 2007-2008 के हैं और ये पुलिस के साथ मुठभेड़, हमला और गांवों और छोटे शहरों में माओवादी साहित्य सामग्री पहुंचाने से संबंधित हैं।
पुलिस का कहना है कि लक्ष्मी मूल रूप से कुंडापुरा तालुक में चच्चात्तू गांव के थोम्बाट्टू की रहने वाली है।
पुलिस के अनुसार जब वह आत्मसमर्पण के लिए पहुंची तब उसके साथ राज्य नक्सली आत्मसमर्पण समिति के सदस्य श्रीपाल और उसके पति सलीम थे। सलीम एक पूर्व नक्सली है जिसने 2020 में आंध्रप्रदेश में आत्मसमर्पण किया था।
पंद्रह साल पहले अपने परिवार से संबंध विच्छेद करने के बाद लक्ष्मी भूमिगत हो गई थी तथा चिकमंगलूर तथा उडुपी जिलों में नक्सली एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्रिय हो गयी थी।
लक्ष्मी ने आज आत्मसमर्पण के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने जिला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की क्योंकि कर्नाटक सरकार द्वारा आत्मसमर्पण प्रोटोकॉल और पैकेज की घोषणा के बाद मैं आत्मसमर्पण करना चाहती थी, लेकिन किसी कारणवश ऐसा नहीं हो सका। अब जब आत्मसमर्पण समिति का गठन हो गया है, तो मेरा आत्मसमर्पण आसान हो गया है।’’
उसने उदार आत्मसमर्पण पैकेज के लिए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को धन्यवाद दिया और जिला प्रशासन से अपील की कि कुंदापुर तालुका के अमासेबेल और शंकरनारायण के थानों में दर्ज मामलों में उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से उसे मुक्त किया जाए।
उपायुक्त विद्या कुमारी ने बताया कि लक्ष्मी आत्मसमर्पण के लिए ‘ए’ श्रेणी की उम्मीदवार है और आत्मसमर्पण पैकेज के नियम के अनुसार इस श्रेणी में आने वाले नक्सलियों को सात लाख रुपए की राशि दी जाती है।
कुमारी ने बताया कि ‘ए’ श्रेणी कर्नाटक राज्य से आने वाले नक्सलियों के लिए निर्धारित की गई है।
राज्य आत्मसमर्पण समिति के श्रीपाल ने पत्रकारों को बताया कि समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए, ताकि उन्हें समाज में सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सके।
भाषा राजकुमार रंजन
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